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कायदे_से तथ्य को समस्या में बदलने का खेल

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राजेश बहुगुणा

एक होता है तथ्य जिसे अंग्रेजी में फैक्ट कहते हैं |  एक होती है समस्या | तथ्य को बदला नहीं जा सका जबकि हर समस्या का एक समाधान होता है | सारा इतिहास तथ्य ही है| आज पहले जो कुछ भी सुखद-दुखद घट गया वह सब लिखित या मौखिक रूप में तथ्य होते हैं |जब आपके सामने कोई तथ्य आता है तो आप अपनी-अपनी मानसिकता के अनुसार उससे सुखी या दुखी होते हैं | जैसे सिकंदर ने भारत पर हमला किया |

इस तथ्य से कोई भी भारतीय दुखी होगा और कोई भी यूनानी गर्वित | लेकिन किसी तथ्य से आप दुखी हों या सुखी, आप उसे बदल नहीं सकते | लेकिन धूर्त सत्ताएं इस तरह के तथ्यों को समस्या में बदल देती हैं | चूंकि हर समस्या का कोई समाधान होता है तो जिस तथ्य को धूर्त सत्ता समस्या में बदल कर पेश करती है जाहिर है जनता उसका समाधान भी मांगेगी और समाधान होगा धूर्तों की सत्ता कायम रखना | उदाहरण के लिए -औरंगजेब ने कोई मंदिर तोड़ा,  पेशवा ने किसी जाति के साथ अन्याय किया| ये एक तथ्य है | लेकिन एक राजीनीतिक दल उसे समस्या के रूप पेश करता है जिसका समाधान है उसे वोट दो | इसलिए एक राजनितिक दल कभी नहीं चाहेगा कि समाज समस्या से मुक्त हो | यहाँ तक कि अफगानिस्तान में तालिबान का आना भी हम भारतियों के लिए एक तथ्य ही है लेकिन इसे भी एक समस्या के रूप में पेश किया जाएगा | और इस समस्या के एक ही समाधान है एक राजीनीतिक दल को वोट देना | और धूर्त सत्ताएं उसी तथ्य को समस्या में बदलती हैं जिससे उनका वोट बैंक उत्तेजित होता हो |

 जैसे – उत्तराखंड के किसी भी निवासी के लिए औरंगजेब द्वारा काशी में मंदिर में तोडा जाना भी एक एतिहासिक तथ्य है और नेपाल का  ३० साल अत्याचारी शासन – जिसके बारे में हज़ारों कथाएं हैं – भी एक एतिहासिक तथ्य है | और उत्तराखंड में नेपाल मूल के भी काफी लोग बसते हैं और मुस्लिम समुदाय से भी | लेकिन यहाँ के एक विशेष दल के लिए नेपाल का शासन एक तथ्य मात्र है जिसे अधिकांश ने भुला भी दिया होगा लेकिन औरंगजेब का शासन एक समस्या है जिसका एक ही समाधान है उस दल को सत्ता दे दी जाय |उसी प्रकार 47 का विभाजन भारत के लिए एक दुखद तथ्य है जिसे बदला नहीं जा सकता लेकिन हमारे सत्ताधारी चाहते हैं कि हम उसे समस्या के रूप याद रखें  और वोट देते समय उनका चुनाव चिन्ह समाधान के रूप में दिखे !  ( राजेश बहुगुणा )

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