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गाँधी जी खुद सच्चाई बताते हैं कि वे ‘राजभक्त थे

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गोडसे और सावरकर के भक्त गाँधी जी पर जो आरोप लगाते हैं वह तो झूठ का पुलिंदा है।

वामसेफ के कई धड़ों के कई नेता लोग गाँधी जी पर कई अश्लील आरोप लगाते हैं वह भी महत्वहीन है।

गाँधी जी के भक्त जो गाँधी की तारीफों के पुल बाँधते हैं, उसमें भी बहुत कुछ सफेद झूठ ही है। गाँधी जी जो नहीं थे वो भी बता देते हैं

तो सच क्या है?

गाँधी जी ने अपनी आत्मकथा में सच बता दिया है-

गाँधी के भक्त बताते हैं कि ‘गांधी जी देशभक्त थे’ मगर गाँधी जी खुद सच्चाई बताते हैं कि वे ‘राजभक्त थे।’

गाँधी के भक्त बताते हैं कि ‘गांधी जी दक्षिण अफ्रीका में आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे’ मगर गाँधी जी खुद बताते हैं कि वहां जूलूस विद्रोह, बोअर युद्ध के दौरान गाँधी जी अन्यायी ब्रिटिश सेना के सार्जेण्ट मेजर बनकर अपनी सेवा दे रहे थे। गाँधीजी खुद लिखते हैं “…हालाँकि बोअर न्याय पर थे किन्तु मेरी राजभक्ति मुझे अंग्रेजों की तरफ खींच ले गयी।…”

युद्ध के बाद अंग्रेजों की तरफ से गांधी जी को कई तमगे दिए गये।

गाँधी के भक्त बताते हैं कि ‘गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से भारत आने के बाद देश की आजादी की लड़ाई में कूद गए’ मगर गाँधी जी खुद प्रथम विश्वयुद्ध में ब्रिटिश सेना के सार्जेण्ट मेजर की वर्दी पहन कर पूरे देश में घूम-घूम कर नौजवानों को ब्रिटिश सेना में भर्ती करवा रहे थे।

अँग्रेजों ने गाँधी जी को आज के भारत रत्न से भी बड़ी उपाधि “कैसरे हिन्द” की उपाधि दिया था। गाँधी जी को आज के भारत रत्न से भी बड़ी उपाधि यूं ही नहीं मिली। 

तो क्या गाँधी ब्रिटिश साम्राज्य के लिए लड़ रहे थे?

हम अभी कुछ नहीं कह सकते। गाँधी ने खुद अपनी आत्मकथा में ऐसी ही कई सच्चाइयों से खुद पर्दा उठाया है। आप खुद पढ़ कर देखें।

स्वंय महात्मा गांधी द्वारा लिखित उनकी आत्मकथा सत्य के प्रयोग। मगर ध्यान रहे, आप वर्गीय दृष्टि से ही महात्मा गाँधी की आत्मकथा को स्वंय पढ़ें तभी दूध का दूध पानी का पानी हो पाएगा। तभी आप सच्चाई जान पाएँगे…

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