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*कर्नाटक के धारवाड़ में जेन जेड का पहुंचना!*    

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–सुसंस्कृति परिहार 

हिमालय की वादियों से जेन जेड आंदोलन मैदानी क्षेत्र को छोड़कर  एकाएक दक्षिण के राज्य  कर्नाटक  जो कांग्रेस शासित राज्य है में अवतरित हो जाना आश्चर्यजनक है।याद कीजिए संबित पात्रा की वह बात जब वे कह रहे थे जिस दिन भारत में भाजपा की जेन जेड उतरेगी उस दिन गांधी परिवार को देश छोड़ भागना पड़ेगा।उनके इन कड़वे बोल के पीछे भाजपा ने निश्चित कोई रणनीति बनाई है।जिसका पहला प्रयोग कर्नाटक से प्रारंभ हुआ है।यह प्रदेश इसलिए भी चुना गया क्योंकि राहुल गांधी ने इस प्रदेश में हुई वोट चोरी के मामले को एटम बम बताकर प्रेस कांफ्रेंस में  खुलासा किया था। वहीं से वोट चोर गद्दी छोड़ नारा देश से नेपाल तक पहुंचा।

निश्चित ही इस बेरोजगार आंदोलन के पीछे भाजपा का हाथ होगा इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दावा किया जा रहा है कि धारवाड़ में अखिल कर्नाटक छात्र संघ के बैनर तले सिविल सेवा उम्मीदवारों ने पुलिस कांस्टेबलों सहित हजारों लंबित सरकारी पदों पर तत्काल भर्ती की मांग की है। अगर धारवाड़ के प्रदर्शन की पुनरावृत्ति राज्य के दूसरे शहरों में होती है तो निश्चित तौर पर सरकार के लिए चिंता बढ़ सकती है। क्योंकि इस समय कांग्रेस बेरोजगारी को मुद्दा बनाकर बीजेपी पर हमलावर है। रोजगार के लिए हजारों की तादाद में छात्र कर्नाटक में भी प्रोटेस्ट कर रहे हैं लेकिन अंतर देखिए सिद्धारमैया और डी के शिवकुमार ने इसे स्टूडेंट जेहाद नहीं बताया, इसलिए ना तो वहां लाठी चार्ज हुआ और ना ही पानी की बौछार की गई।

छात्र भर्तियों को खोलने के साथ भर्ती की उम्र में शिथिलता की मांग कर रहे है। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार पहले ही छात्रों की मांग को जायज बता चुके हैं। अब समय आ गया है कि छात्रों की मांग मानकर वादा पूरा किया जाए।

यदि छात्रों की मांग उचित मानी गई है तो उस पर कर्नाटक सरकार को कार्रवाई कर बेरोजगारों की दोनों मांगों पर शीध्र कार्रवाई करनी चाहिए। बताया जा रहा है कि सरकार इन नियुक्तियों को इसलिए रोककर रखे हुए है ताकि जाति जनगणना पूरी हो जाए जिससे सभी वर्ग के लोगों को रोजगार मिल सके।यदि सरकार इसके इंतजार में है तो इसके लिए तुरंत ऐलान कर जनगणना कराई जाए।

ज्ञात हुआ है कि कर्नाटक में सामाजिक और शैक्षणिक तौर पर पिछड़े वर्ग के लाेगों के लिए हो रहे जातिगत सर्वे पर हाईकोर्ट ने रोक लगाने से मना कर दिया है, हालांकि हाईकोर्ट ने सिद्धारमैया सरकार को झटका देते हुए कहा है। इसमें लोगों को जानकारी देने और शामिल होने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। यह स्वैच्छिक होना चाहिए। सरकार असमंजस में है।ऐसी स्थिति कैसे जातिगत गणना की जा सकती है।

देश का युवा जाग गया है यह सच है कि तैलंगाना में यह कार्य पूर्ण होने के बाद रोजगार उपलब्ध कराया गया है। किन्तु इस मामले में कर्नाटक सरकार और हाईकोर्ट के बीच चल रही कशमकश के परिणाम अच्छे नहीं होंगे। 

क्योंकि इसके बाद  स्वाभाविक  तौर पर यह हो सकता है कि  भाजपा शासित राज्यों में यह मांग उठ बैठे। इसलिए पहली चढ़ाई कांग्रेस पर अपने एजेंडे के तहत कार्रवाई  की गई है।आज ज़रुरी है कर्नाटक की कांग्रेस सरकार युवाओं से बात कर उन्हें उग्र होने से बचाएं।ताकि सरकार पर विश्वास कायम रहे।वरना यह राज्य भी नेपाल के जैसी स्थिति में पहुंचाने का भरसक प्रयास केंद्र सरकार करेगी जिससे सरकार ,युवा और नागरिक बेवजह परेशान हो जाएंगे।

यदि कर्नाटक राज्य से प्रेरणा लेकर  बदले की भावना से भाजपा शासित राज्यों में ऐसी ही हुंकार उठाई जाती है तो देश बर्बाद हो जाएगा।वैसे भी हमारी अर्थव्यवस्था घाटे में चल रही है ।देश में बदहाली है। इसलिए उम्मीद है कि कर्नाटक के बेरोजगार युवा समझ से काम लेंगे तथा देश को आग में झौंकने से बचाने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे। वहीं सरकार भी बेरोजगारी से निपटने शीध्र कदम उठाए और गतिरोध हटाने के लिए पूरी ताकत के साथ प्रयास करें।

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