~ सोनी तिवारी, वाराणसी
यह देखा जाता है, कि जो लोग उन्नतिशील स्वभाव के होते हैं, उन्हें कहीं-न-कहीं से आगे बढ़ाने वाली सहायता प्राप्त होती रहती हैं।
कभी-कभी तो अचानक ऐसी मदद मिल जाती है, जिसकी पहले कुछ भी आशा नहीं थी।
छोटे-छोटे आदमी बड़े-बड़े काम कर डालते हैं, उन्हें अनायास ऐसे अवसर मिल जाते हैं, जिससे बहुत बड़ी उन्नति का रास्ता खुल जाता है। साधारण बुद्धि के लोग उन्हें देखकर ऐसा कहा करते हैं-“अमुक व्यक्ति का भाग्योदय हुआ।
उसके भाग्य ने अचानक ऐसे कारण उपस्थित कर दिए, जिससे वह तरक्की की ओर बढ़ गया। हम इसे ईश्वर की कृपा कहते हैं।
पिता अपने बालकों की आदतों और इच्छाओं को परखता है, जो पढ़ने के लिए बेचैन है, उसे स्कूल भेजता है, जो व्यापार करना चाहता है,उसे दुकान खुलवाता है, जो निठल्ला है उसे पशु चराने का काम सौंप देता है। व्यापार में पैसे की जरूरत समझता है, तो पिता उसके लिए व्यवस्था करता है, पढ़ने वाले की पढ़ाई का खरच जुटाता है।
खरच के लिए अचानक पहुँचा हुआ मनीआर्डर देखकर कोई नादान-लड़का यह ख्याल कर सकता है, कि यह पैसा अकस्मात् कहाँ से आ गया है? पर असल में इस व्यवस्थित विश्व में अकस्मात् कुछ नहीं है, सब कार्य व्यवस्थापूर्वक चल रहे हैं।
पढ़ने की उत्कट इच्छा रखने वाला बालक पिता का ध्यान बलात् अपनी ओर खींचता है और उसे पढ़ाई में मदद करने के लिए बाध्य करता है।
निठल्ले स्वभाव के लड़के को चरवाहा बनाकर पिता निश्चिन्त है, पर उद्योगी बालक को तो वह निरालम्भ नहीं छोड़ सकता। जो मनुष्य आगे बढ़ने की तीव्र इच्छा करते हैं, उन्नति के लिए सच्चे हृदय से जो ईमानदारी के साथ प्रयत्नशील है, उसके प्रशंसनीय उद्योग को देखकर ईश्वर प्रसन्न होता है, अपना सच्चा आज्ञापालक समझता है और उसे प्यार करता है।
जिस पर उस परम पिता का विशेष स्नेह है, उसे यदि वह कुछ विशेष सहायता दे देता है, तो इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं है। एक प्रसिद्ध कहावत है कि- “ईश्वर उसकी मदद करता है, जो अपनी मदद आप करता है।”
उन्नतिशील स्वभाव के लोगों को, उनकी उचित प्रवृत्ति में सहायता करने के लिए परमपिता परमात्मा ऐसे साधन उपस्थित कर देता है, जिससे उसकी यात्रा सरल हो जाती है। अचानक, अनिश्चित एवं अज्ञात सहायताओं का मिल जाना, इसी प्रकार सम्भव होता है।

