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अलविदा! फादर…

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फादर!
मुझे सूझ नहीं रहा है
आपको कैसे याद करूं
आप के प्रति कैसे
श्रद्धा सुमन अर्पित करूं
आपको कैसे सलाम करूं
कैसे, आपको अलविदा कहूं
मैं उस देश का नागरिक होने पर
शर्मिंदा हूं
जहां आप जैसे देश के सच्चे सपूत की
आप जैसे खूबसूरत इंसान की
निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई
आप ने ऐसे देश में जन्म लिया
जहां आप जैसा बेहतरीन इंसान होना ही
अपराधी होना हो गया है
अन्याय की मुखालफत करना
देशद्रोही होना
दलितों-आदिवासियों के हक-हकूक लिए लड़ना
माओवादी होना
आप जैसे ‘अपराधियों’ की
आप जैसे ‘देशद्रोहियों’ की
आप जैसे ‘माओवादियों’ की
बहुत- बहुत जरूरत है, इस देश को
आप जैसा होने का संकल्प ही
आपके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी
आपकी मौत
मौत नहीं हत्या से
लाखों लोग गमनीन हैं
उनमें से मैं भी एक हूं
आपने जिंदगी का
एक मेयार गढ़ा
मौत का भी
अलविदा फादर!

          *-सिढार्थ रामू*

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