-सुसंस्कृति परिहार
उफ़ इस देश का क्या हाल होने वाला है सोचकर अजीब स्थिति हो जाती है। बच्चे आमतौर पर सवाल ही करते हुए बहुत कुछ सीखते हैं।छोटे बच्चों के सवालों से मां जितनी परेशान होती है वहीं समझती है किंतु कभी प्रश्नों के जवाब देने से कतराती नहीं है क्योंकि उसे भली-भांति मालूम है की सवाल जवाब से ही उसकी सीखने की तलब बढ़ती जो जीवन में काम आती है।
किंतु यह तो गज़ब हो गया जब एक दलित 14वर्षीय बच्चे अश्वामित गौतम के लाजिकल किंतु राजनैतिक सवालों से सरकार इतनी डर गई कि उसे स्कूल से निकाल दिया गया और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है । विदित हो गौतम दलित समाज से आता है और सरकार से अपनी प्रत्युत्पन्नमति से ऐसे महत्वपूर्ण सवाल करता है। जिन्हें पूछने की हिम्मत गोदी मीडिया तो क्या करेगी।स्वतंत्र मीडिया भी नहीं कर पाई है।

वह एक साधारण परिवार का बच्चा है जिसका परिवेश ना तो राजनैतिक और ना ही पढ़ा लिखा।वह लखनऊ की राजधानी में रहता है तथा इतनी कम आयु में वह भगत सिंह, कार्ल मार्क्स और भीमराव आंबेडकर को काफी कुछ पढ़ और समझ लिया है।वह भगत सिंह की तरह साहस और दिलेरी से सवाल करता है।उसके सवालों में अमीर-गरीब की थ्योरी मार्क्स और शोषण के सवाल हैं।तो अम्बेडकर से उसने संविधान के सूत्रों को सवालों का आधार बनाया है।वह मंहगी शिक्षा पर सवाल पूछता है। बढ़ती बेरोजगारी की आवाज़ उठाता है।साथ ही साथ सरकार से भी सवाल करता है कि जब जनता की सरकार है तो जनता के सवालों का उत्तर लोकतांत्रिक गणराज्य में सरकार को देना ही चाहिए।ये कैसी लोकतांत्रिक सरकार है वगैरह वगैरह।उसका इरादा लखनऊ में एक बड़ी लाइब्रेरी बनाने का था।वह अध्ययन शील एवं चिंतक है।
वाकई उसके उपर्युक्त सवाल बहुत गहरे प्रजातांत्रिक सवाल है।एक सच्चे लोकतंत्र में ऐसे सवालों को सुना जाना चाहिए और जवाब देना चाहिए था। लेकिन जब देश में फासिस्टवादी सरकार हो।जो जनता के प्रति उत्तरदायी ना होकर अमेरिका की पिट्ठू हो।चंद अमीरों पर मेहरबान हो।जनता की ज़बान बंद करने मुफ्त राशन या महिलाओं को रेवड़ियां बांट रही हो।तब इस दलित बच्चे के सच्चे सवाल कैसे बर्दाश्त हो सकते थे।सदन से लेकर सड़क तक वर्तमान सरकार सवाल करने वालों बुरी तरह परेशान कर रही है इसी कड़ी में ये बालक भी शुमार हो गया है।
आज जब इस बच्चे को स्कूल से निकाल दिया गया होगा तो वह कितना मायूस होगा।इसके बाद इस पर भी एफआईआर।कितनी कसाई है वर्तमान सरकार।
यह बच्चा जो अभी किसी दल या संगठन से सम्बंधित नहीं है आगे चलकर कितना बड़ा इस सरकार का विरोधी बनेगा।इस बात को कम से कम सरकार को सोचना था।
लोकतंत्र बचाने और संविधान बचाने वाले लोगों को सबसे पहले इस संविधान के दुलारे बालक को बचाना होगा। क्योंकि यह यूपी हैं यहां दलितों का हाल सब भली-भांति जानते समझते हैं।उसकी सुरक्षा देश हित में ज़रुरी है।वह बेशक आज का भगतसिंह है।बाल अधिकार आयोग भी मौन है। इसलिए हम सबका भी दायित्व बनता है कि संविधान के रक्षक इस बालक पर कोई आंच ना आने पाए।