,मुनेश त्यागी
पिछले दिनों खबर आई है कि आगामी चैत्र नवरात्रि के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार देवी मंदिरों में देवी जागरण व अखंड रामायण के पाठ कराएगी। इन कार्यक्रमों के आयोजन में हर जिले में जिला तहसील और विकासखंड स्तर पर आयोजन समितियों का गठन किया जाएगा। सभी जिला अधिकारी अपने अपने जिले में देवी मंदिरों शक्तिपीठों और इन में होने वाले कार्यक्रमों के लिए कलाकारों का चयन अपनी अध्यक्षता में कमेटी बनाकर करवाएंगे।
कार्यक्रमों के तहत महत्वपूर्ण मंदिरों शक्तिपीठों का चयन करते हुए मंदिरों का पता, फोटो, जीपीएस लोकेशन तथा मंदिर का संपर्क नंबर कलाकारों का नाम पता व मोबाइल नंबर की जानकारी नवरात्र शुरू होने से पहले तक संकलित कर ली जाएगी और इसकी पूरी जानकारी संस्कृति विभाग को भेजी जाएगी।
विपक्ष ने सरकार के इस निर्णय को सरकार द्वारा धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाया है और सपा नेता अखिलेश यादव ने मांग की है कि भाजपा धर्म का बाजारीकरण ना करे।
इससे पहले भी योगी सरकार ने कावड़ यात्रा के समय कावड़ियों पर पुष्प वर्षा कराई थी। हिंदू आस्था का सम्मान योगी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता में रहा है।
यहां पर सबसे प्रमुख सवाल यह उठता है कि भारतीय संविधान के अंतर्गत शपथ लेकर आई सरकार, इस तरह की धर्मांधता और अंधविश्वासों को बढ़ावा देने जा रही है और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का सरासर अवमूल्यन कर रही है। संविधान के अनुसार भारतीय समाज में ज्ञान, विज्ञान, तर्क, विवेक, लॉजिक और वैज्ञानिक संस्कृति का प्रचार प्रचार करते हुए जनता के सांस्कृतिक स्तर और विकास को आगे बढ़ाना चाहिए और हर तरह की धर्मांधता, अंधविश्वासों और पाखंड पूर्ण कार्यक्रमों से अलग रहना चाहिए। मगर यहां पर तो हम एक दूसरी तरह की सरकार का अवलोकन कर रहे हैं।
सरकार ने संविधान की शपथ के अनुसार ज्ञान विज्ञान तक लॉजिक और वैज्ञानिक संस्कृति एवं धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों और आदर्शों को त्याग कर और उनके प्रचार-प्रसार को छोड़कर, जनता को धर्मांधता और अंधविश्वासों के भंवर में धकेलने का निर्णय लिया है, जिसे किसी भी दशा में समर्थन नहीं दिया जा सकता। हमारा देश हजारों सालों से इन्हीं अंधविश्वासों, धर्मांधता और पाखंडों का शिकार रहा है। इसी वजह से भारतीय समाज वैज्ञानिक रूप से और धर्मनिरपेक्ष रुप से आगे नहीं बढ़ पाया।
इन जन विरोधी और समाज विरोधी, ज्ञान-विज्ञान विरोधी अभियानों को रोकने के लिए भारतीय संविधान में वैज्ञानिक, अनुसंधान, खोज, अन्वेषण, ज्ञान विज्ञान और तर्क के अभियान को आगे बढ़ाने की बात की गई थी। कितना अच्छा होता कि सरकार इस नवरात्रि के अवसर पर ज्ञान विज्ञान और तर्क, लॉजिक, विवेक, अनुसंधान, अन्वेषण और वैज्ञानिक संस्कृति एवं धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों और आदर्शों के प्रचार प्रसार के लिए जनता को जागरूक कराने के लिए प्रदेश के हर स्कूल, कॉलेज और महाविद्यालय का चयन करती और इस अवसर पर वहां पर ज्ञान विज्ञान, संविधान और कानून के शासन और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का पाठ पढ़ाती।
सभी छात्र-छात्राओं में इस तरह की वैज्ञानिक संस्कृति और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार करती और उसके बाद यह सारे विद्यार्थी भारत में, प्रदेश में, तर्क वितर्क और वैज्ञानिक संस्कृति को आगे बढ़ाने और प्रचार-प्रसार करने का काम करते और इसे एक वैज्ञानिक रूप से सशक्त प्रदेश में तब्दील करते। इसे पूरी दुनिया और देश में उत्तर प्रदेश सरकार का नाम रोशन होता, लोग उसके गुण गाते।
हम यहां पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं सरकार के यह कदम जनता में अंधविश्वास और धर्मांधता को और विस्तार देंगे, उसे गहराई प्रदान करेंगे। सरकार के इन कदमों से जनता में ज्ञान विज्ञान तर्क लॉजिक और वैज्ञानिक संस्कृति और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों और आदर्शों का प्रचार-प्रसार नहीं होगा, बल्कि इन सबकी जानिब से उनका ध्यान हटेगा और हम पूरे यकीन के साथ कहेंगे कि सरकार के इन कदमों से अंधविश्वास और धर्मांधता का माहौल बढ़ेगा और इससे भारत के संविधान में उल्लिखित वैज्ञानिक संस्कृति और धर्मनिरपेक्षता का ह्रास होगा, अवमूल्यन होगा।
हम यहां पर यह भी कहेंगे सरकार के इन असंवैधानिक और वैज्ञानिक संस्कृति एवं धर्मनिरपेक्षता विरोधी नीतियों और कदमों का लाभ उठाकर दूसरे धर्मों की धर्मांध, अंधविश्वासी और डपोरशंखी ताकतें भी अपने धर्म और सांप्रदायिक एजेंडे को लेकर जनता के बीच में जाएंगी और उन्हें भी जनता को धर्मांध और अंधविश्वासी बनाए रखने में मदद मिलेगी। सरकार की इस नीति और इन कदमों को किसी भी दशा में समर्थन नहीं दिया जा सकता है।

