बबिता यादव
देवताओं ( 11 रुद्र और 12 आदित्य सूर्य सहित ) के पिता कश्यप को लोभ के कारण ही पुनर्जन्म का कष्ट झेलना पड़ा। वे लोभ के कारण ही वरुण देव के शाप से ग्रस्त हुए।
उस शाप को भगवान कृष्ण ने भी नष्ट नहीं किया क्योंकि यदि देवताओं के पद को पाकर भी यदि लोग पाप करके तत्काल निष्पाप हो जायेंगे तो मनुष्य पर क्या असर पड़ेगा।
ये देव योनी भी 84 लाख योनियों में आती है पर अक्षयतिथियों पर दान पुण्य से आपके पास अक्षय फल हो जाता है जिस कारण वह फल देवता बनकर भोगा जाता है।
शनि , शुक्र, सोम, मंगल , बुध , बृहस्पति और सूर्य , 11 रुद्र , 12 आदित्य ये देव भी एक मन्वन्तरतक ही हैं कुछ एक कल्प तक भी रहते हैं।
सनत्कुमार सनक सनन्दन आदि देवताओं से भी उच्च स्तरीय पद पर माने गए हैं।
जनलोक, तपोलोक, महर्लोक के निवासी इन ग्रहों व देवताओं से अधिक आयु के होते हैं। अतः 5-10 वर्ष के भोग के लिए किसी की वस्तु पर नियत खराब मत करो उस वस्तु को चाटकर या दीवार पर सजाकर तुमको क्या मिलेगा ?
उम्र तो निकल जायेगी पर कश्यप और देवकी जैसा भयंकर बंधन और पीड़ा शेष रहेगी। इनके पूर्व पाप को देखकर इसी कारण श्रीकृष्ण जी को दुख नहीं हुआ और श्रीकृष्ण भी सोचते रहे कि -जैसा किया है वैसा भोगो मैं भी क्या कर सकता हूँ करूँगा तो देवता विद्रोह कर देंगे प्रजा विद्रोह कर देगी कि कैसा ईश्वर है ? अपने बाप के पाप को नष्ट करने में अपनी शक्ति खर्च कर दी और तत्काल बंधन काट दिये और हम भगत लोग भी नाक रगड़ रहे हैं मंदिर में पर पाप
न काट सके। अतःवे चुपचाप गोकुल चले गए।
जब पाप भोग की अवधि समाप्त हुई तो चुपचाप बाप मेहतारी को मुक्त कर रही। और तो और तुलसी के शीलभंग के समय विष्णु और इनके भाई शेषनाग को भी शाप मिला था उसी से स्वयं विष्णु और लक्ष्मण को वनवास ( महल छोड़कर वन में विचरण) करना पड़ा।
यह कर्म रहस्य बड़ा गूढ़ है हे अक्षयरुद्र!
कश्यप गाय के लोभ से जेल भेज दिए गए , अदिति सौतिया ढाय से बंधन में पड़ी और सौत के बच्चों को मारने के प्रयास से ऐसे शापित बच्चो की माँ बनी जो पैदा होते ही स्वाहा हो जायें।

