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गुजरात चुनाव और ईवीएम की धांधली

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विजय दलाल

आप को मिले वोटों के बारे में यह बात लगभग निश्चित तौर पर कहीं जा सकती है कि इसमें कांग्रेस का बहुत बड़े पैमाने पर वोट आप को ट्रांसफर किया गया।*
यह बात इस तर्क़ पर आधारित है कि किसी भी राज्य में एंटी इनकंबंसी वोट जो गिरता है वहउस राज्य में सत्ताधारी दल के खिलाफ पड़ता है और उस पार्टी को मिला फ्लोटिंग वोटर होता है।*
आप पार्टी को दिल्ली या पंजाब में कांग्रेस का मिला वोट तो समझ में आता है। लेकिन गुजरात में तो 27 साल से बीजेपी का राज है।
वहां अधिकतम वोट विपक्षी पार्टी को मिले तो वह बीजेपी का होना चाहिए। इसलिए आप पार्टी को मिला अधिकतर वोट ईवीएम से कांग्रेस का ट्रांसफर किया हुआ वोट है।
2.जहां शासन और प्रशासन इतने लंबे समय से बीजेपी के हाथ में है और केंद्र में भी उसी पार्टी की सरकार हो और चुनाव आयोग भी यदि उसकी कठपुतली के रूप में काम करें तो हर तरह की धांधली संभव है। ऐसे राज्यों में सीधे बीजेपी के पक्ष में भी सीधे भी किए जा सकते हैं।
3.इस चुनाव में जो मुख्य मुद्दा एक और सामने आया है वह है आखिरी घंटे की वोटिंग। वैसे सामान्यतः यह तर्क दिया जा सकता है कि कई बार आखिरी घंटों में वोटिंग ज्यादा होती है।
या बैलेट पेपर की वोटिंग में भी वोटिंग के अंत में बचे हुए वोटों को दबंग मोहरें लगा कर इकट्ठे अपने पक्ष में डलवा लेते थे।
दूर दराज के क्षेत्रों में बुथ ही कैप्चर कर सारे वोट अपने पक्ष में डलवा लेते थे।
जैसा कि कांग्रेस प्रवक्ता ने शंका व्यक्त की कि ईवीएम में एक घंटे में वोट पड़ने का औसत टाईम है उससे अधिक मत आखिरी के घंटे में इतने कैसे पड़े?
यह इस बात की शंका तो जरूर पैदा करता है कि वोटिंग के अंत में बड़े पैमाने पर बीजेपी के पक्ष में बटन दबा दिये गए हों।
अगर नहीं हुआ है तो इसकी जांच संभव है बुथ के वोटर रजिस्टर से मशीन में पड़े वोटों का मिलान किए जाय और उन रजिस्टर्स का भी।
4.*19 लाख मशीनें यदि सही में गायब है तो यह तो बहुत बड़े ईवीएम फ्राड की ओर संकेत करता है। वो मशीनें हेराफेरी के उद्देश्य से किसी कंपनी को चिप लगाने दी गई हो। वो रोटेशन में चल रही हो। वो रोटेशन से तैयार हो कर आ जाती हो। फिर उनके स्थान पर नई मशीनें जाती हो।

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