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*नए साल की मुबारक असली या नकली ?*

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*प्रोफेसर राजकुमार जैन*

 पूरे मुल्क में नए साल की मुबारकबाद देने की होड मच रही है। मोबाइल, इंटरकॉम, इंटरनेट बगैरह की तकनीकी सहूलियत के कारण तूफान पर है। पर वह दीगर बात है की जो हम लिखकर या बोलकर इजहार कर रहे हैं वह दिल के कितना नजदीक और हकीकत से भरा हुआ है। या महज एक औपचारिकता की दौड़ में शामिल होने का ढंग।

 आज रात टेलिविजनों पर स्पेशल शो आयोजित करने की होंठ चल रही है। और उसमें क्या है फिल्मी सितारों की  तड़क-भड़क,  शान शौकत, इश्क- मासूकी के सच्चे झूठे किस्से का इतिहास परोसा जाएगा।  हजारों करोड़ की मिल्कियत के मालिक फिल्मी सितारों में इकका दुक्का ही होंगा जो अब अपनी अपार संपत्ति में से कुछ बेसहारा,  हालात के मजबूर लोगों के लिए कुछ कर रहे होंगे। जबकि दुनिया के नामवर हस्तियों ने  अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा दान में लगा दिया है।

 अफसोस इस बात का है कि हमारी तवारीख के हमारे रहबर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस जैसे महान नायकों ने रईस खानदान में जन्म लेने के बावजूद  और दुनिया की मशहूर यूनिवर्सिटी  से तालीम हासिल कर अपने को आजादी की जंग में बरतानिया हुकूमत के के खिलाफ लड़ते हुए, यातनाएं सहते हुए लंबी-लंबी जेल  भोगी है। भगत सिंह, सुखदेव, राजशेखर,  अशफाक उल्ला खान,  जैसे इंकलब्धियों ने फांसी का फंदा चूम लिया। जयप्रकाश नारायण ने अमेरिका से एमबीए की डिग्री हासिल कर हिंदुस्तान में बरतानिया हुकूमत के खिलाफ लड़ते हुए 7 साल जेल में बिता दिए। डॉ राममनोहर लोहिया ने जर्मनी के हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री हासिल कर 19 वर्ष की आयु में शिरकत करते हुए कई साल जेल में बिताएं। लाहौर किला जेल में अंग्रेजों की अमानुष यातनाओं को सहा।

 ऐसे अनेको देशभक्त, हमारे इतिहास में रहे हैं, परंतु कितने नौजवानों को यह इतिहास पता है या बतलाया जा रहा है? नकली झूठी शान शौकत, आभासी दुनिया का यह दिखावा कुछ वक्त के लिए तो हमें भी भीड़ में उछलने कूदने को का मौका देता है परंतु जब आपका जिंदगी की हकीकत से सामना होता है, तो वह रात के सुरूर में केवल मायूसी ही भरता है।

 आज भी हमारे पुरखों ने ऐसी रवायत डाली है जिसमें हम हिस्सा लेकर  मानवता  की कुछ सेवा कर सकते हैं। गुरुद्वारों में श्रद्धालुओं के जूते साफ कर, अपने अहंकार को दफन कर सकते हैं। लंगर की पेटी में दान देकर लाखों बेसहारा, भूखे पेटों की भूख मिटाकर संतोष का सबक पा सकते हैं। ऐसीं अनेको  नजीर है, 

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