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*क्या संघ ने मोदी की नस दबा ली है?*

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-सुसंस्कृति परिहार 

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस देश की जनता का अपमान करते हुए जिस तरह  पर्दे के पीछे रहने वाले संघ को तरजीह दी है और संविधान की घोर अवज्ञा करते हुए संघ की शताब्दी मनाने अपने पद का जो दुरुपयोग किया है।उसे देशवासी  कभी माफ़ नहीं करेंगे। उन्होंने जो डाकटिकट और स्वर्ण सिक्का जारी किया तथा प्रशासनिक खर्च से दिल्ली में संघ का समारोह आयोजित किया। वह सब गैर कानूनी है। भाजपा  के सांसदों और मंत्रियों को भी इस बारे में सोचना चाहिए।

यदि ऐसा चलता रहा तो भविष्य में मनमाफिक ये लोग सरकार के मामले में ना केवल दख़ल देंगे बल्कि जिम्मेदार पदों पर भी सुशोभित हो जाएंगे। मोदीजी ने जिस तरह का महलनुमा प्रधानमंत्री आवास बनाया है वह इस बात का प्रतीक है कि भविष्य का प्रधानमंत्री राजशाही रंग ढंग वाला ही रहेगा।अब तक के प्रधानमंत्री छोटे छोटे बंगलों में रहे हैं।इस पद पर कौन विराजेगा यह अभी गर्भ में छिपा है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पदनाम भी बदले जाने की पूरी संभावना है। संविधान की इस उपेक्षा से लगता है कि अब संघ का संविधान आहिस्ता आहिस्ता लाया जा रहा है।

किंतु इससे पूर्व संघ निश्चित है कि बिहार चुनाव के बाद भाजपा अध्यक्ष पद पर संजय जोशी ही को इस पद पर  बिराजमान करेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी को मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया जाएगा।नया प्रधानमंत्री संभवतः संघ का ऐसा व्यक्ति होगा जो राहुल गांधी से टकराने की क्षमता रखता होगा।जो अपशब्द नहीं बोलेगा,धीर गंभीर होगा। धड़ल्ले से अंग्रेजी हिन्दी बोलने वाला पढ़ा-लिखा व्यक्ति होगा।जिसकी उम्र भी ज़्यादा नहीं होगी। क्योंकि मोदीजी की अयोग्यता से देश विदेश में भाजपा की इज़्जत खराब हुई है।तलाश जारी है, इंतजार कीजिए कौन इस पद पर सुशोभित होता है।

बहरहाल, मोदीजी ने जिस तरह भाजपा सांसदों की उपेक्षा करते हुए संघ को अपने निजी स्वार्थ के लिए संविधान का मान मर्दन किया है उसका जवाब ज़रूर उन्हें जनता देगी।अभी फिलहाल वोट चोर गद्दी छोड़ का नारा देश में गूंज रहा है कल को उनको   सुप्रीम कोर्ट कोई अपराधिक मामले में सजा सुना देता है।तो संघ मोदी को बाहर कर देगा, यदि वे अपनी ज़िद पर अड़े रहते हैं तो। सूत्र बता रहे हैं कि मोदी के खिलाफ सरकार में वे ही लोग खिलाफत कर रहे हैं जो धनखड़ के साथ थे। यहां यह भी बता दें कि उनके मंत्रीमंडल के कई सदस्य भी उनसे ख़फ़ा हैं।यानि मोदी का जाना लगभग तय है।

अब दिक्कत इस बात की है कि मोदी के जाने के बाद इतने सांसद भाजपा के रहेंगे भी, जो सरकार बना सकें। तेलुगू देशम और जदयू भी क्या साथ रहेंगे? और क्या ये सब मोहन भागवत की अधीनता स्वीकार्य कर लेंगे। मुश्किल लगता है। ऐसे मुश्किल हालात में मध्यावधि चुनाव की स्थिति बन सकती है।तब संघ भाजपा और इंडिया गठबन्धन के बीच मुकाबले में जो जय प्राप्त करेगा वही देश की दशा और दिशा का निर्धारण करेगा। यह संघ के स्वयं सेवकों के परीक्षण का सही वक्त होगा।अभी तो संघ भाजपा के मुखौटे के पीछे से काम करता रहा है। किंतु जाते जाते मोदीजी ने संघ को सत्ता के करीब ला खड़ा कर दिया है।इसकी वजह उनका सत्ता में बने रहने की इच्छा है जो सभी जानते हैं।उनकी इस कमज़ोरी ने देश को ग़लत हाथों में सौंप देने की भारी गलती की है।इसका परिणाम पहले उन्हें ही पहले मिलेगा। उन्हें गद्दी छोड़ना ही पड़ेगी।उधर संघ का भी ये चरमोत्कर्ष है चुनाव बाद 

शायद ही वह सरकार बना पाएगा।

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