डॉ. प्रिया
स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है। इसके बावजूद हम इसे ऐसे खर्चते हैं, जैसे मुफ्त मिले चिल्लर। अगर आप बिना व्याधियों की लंबी उम्र पाना चाहते हैं, तो अपने डिक्स और जीवन को दुरूस्त करें। स्वस्थ रहना इतना भी मुश्किल नहीं. स्वस्थ रहने का नुस्खा बहुत ही आसान है, बस आपको सही शुरुआत करनी है।
स्वास्थ्य और फिटनेस तीन प्रमुख तत्वों का मेल है – शरीर, दिमाग और समाज। इन तीनों में से एक चीज अगर अज्ञान है तो उसकी बाकी दो चीजें भी प्रभावित होती हैं, यह तय है।
आपकी जीवनशैली और आपस में जुड़ी इन तिकड़ी चीजों का आधार है। यानी अगर यह अच्छा है तो आपकी समग्र सेहत भी अच्छी बनी रहती है और अगर यह खराब है, तो आपको देर होने की चिंता नहीं करनी चाहिए।
_समझिए क्या है संपूर्ण स्वास्थ्य :_
*1 शारीरिक सेहत (Physical health)*
यह हर दिन की गतिविधियों को पूरा करने की हमारे शरीर की क्षमता होती और वह भी थकान, शारीरिक तनाव जैसी बाधाओं के बिना।
दूसरे शब्दों में कहा जाए तो हमारे शरीर का आधे से ज़्यादा हिस्सा पैरों का होता है, इसलिए व्यक्ति को शारीरिक रूप से सक्रिय होना चाहिए और हर दिन कम से कम 45 मिनट व्यायाम करना चाहिए।
इन व्यायामों ने दौड़ना, जॉगिंग करना, तैरना, नृत्य, ज़ुंबा, ट्रेडमिल, साइकिल चलाना, तेज़ गति में टहलना, सीढ़ी चढ़ना शामिल है।
*2 मानसिक सेहत (Mental health)*
यह मस्तिष्क या दिमाग की सेहत की स्थिति होती है। मानसिक रूप से सेहतमंद होने का मतलब है कि व्यक्ति को तनाव, अवसाद, परेशानी, ज़रूरत से ज़्यादा सोचने जैसी मनोवैज्ञानिक समस्याएं नहीं हैं।
अगर आप दिमागी तौर पर स्वस्थ हैं, तो आप तनाव से निपट सकते हैं, भावनाओं को नियंत्रित कर सकते हैं और गुस्से पर काबू पा सकते हैं।
*3 सामाजिक सेहत (Social health)*
इससे आशय अन्य लोगों के साथ अच्छे और समरसतापूर्ण संबंध बनाए रखने से है।
यह तभी संभव है जब आप शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ हों।
_पहचानिए अपनी सेहत के दुश्मन :_
*1 निष्क्रिय जीवनशैली :*
(Enemies of your health)
निष्क्रिय जीवनशैली का मतलब न्यूनतम शारीरिक गतिविधि या पर्याप्त मात्रा में शारीरिक गतिविधि न कर पाना है। ऐसी जीवनशैली कई गंभीर बीमारियों के प्रमुख कारणों में से एक है।
शारीरिक गतिविधि न होने से वज़न बढ़ने, मोटापे, कार्डियोवैस्क्यूलर बीमारियों, डायबिटीज़, उच्च रक्तचाप, हार्मोनल डिस्फंक्शन, अवसाद जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा खाने-पीने की गैर-सेहतमंद आदतें भी घातक साबित हो सकती हैं।
बैठे-बैठे काम करने वाली नौकरी, शारीरिक गतिविधियों की कमी की वजह से व्यक्ति का वज़न बढ़ जाता है और मोटापे की समस्या होती है।
*2 खानपान की खराब आदतें :*
खाना न खाना, बाहर का खाना खाने के लिए तैयार रहना, गैर-सेहतमंद खाना, ज़रूरत से ज़्यादा खाना, बाहर का खाना, पैकेटबंद खाना इत्यादि।
*3 ज़्यादा धूम्रपान या शराब का सेवन :*
समाज में धाक जमाने, आधुनिकीकरण के दबाव में, तनाव का सामना न कर पाने, गलत आदतों की वजह से धूम्रपान करना या शराब पीना।
*4 तनाव की अधिकता :*
व्यक्तिगत और पेशेवर चिंताएं, प्रतिस्पर्धाएं, लक्ष्य पूरे करने के दबाव, भरपूर नींद न हो पाना इत्यादि।
*5 काम करने के का अस्वस्थ कल्चर :*
इन दिनों ज्यादातर लोग देर तक बैठे रहने वाली जॉब में हैं। इंटरनेट पर बढ़ी हुई निर्भरता ने फिजिकल मूवमेंट कम की है। इसके साथ ही बंद कॉम्पैक्ट एसी केबिन में बैठे रहने से न तो उन्हें कोई ताज़ी हवा मिल पाती है और न ही सूर्य की रोशनी।
ज़्यादा घंटों तक काम करना, नाइट शिफ्ट, नौकरी में ओवरटाइम करना आदि भी सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
उपरोक्त तमाम कारक सेहत के लिए जोखिम बढ़ा रहे हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इन पर जल्द से जल्द कोई एक्शन लिया जाए। इसमें केवल व्यायाम करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपको सही खाना और सुरक्षित खाना भी ज़रूरी है।
आपका शरीर सेहतमंद और अच्छा रहे, इसके लिए ज़रूरी है कि आप अपनी जीवनशैली में बदलाव करें जिनमें ये चीज़ें शामिल हैं :
खाना जो हम खाते हैं – सुरक्षित और सेहतमंद खाएं, मिलावटी खानपान से बचें, किसी भी दूषित और अनजाने में दूषित हुई चीज़ों से बचें, खाने की चीज़ों के पोषण से संबंधित लेबल पढ़ें।
व्यायाम जो हम करते हैं – किसी भी शारीरिक गतिविधि में 45 मिनट हिस्सा लें. व्यक्तिगत एवं आसपास की साफ-सफाई और हाइजीन का खयाल रखें।
*यह भी याद रखें :*
संतुलित आहार सबसे अहम है- हर तरह की चीज़ें खाएं, सही मात्रा में खाएं।
डायट में विविधता लाएं- अलग-अलग तरह की और अलग-अलग रंगों के फल-सब्जियां, सीड्स आदि खाएं।
जहरीले ट्रांस फैट को खत्म करें – तला हुआ और पूरी तरह तला हुआ खाने से बचें।
नमक, चीनी और सैचुरेटेड ट्रांस-फैट की खपत कम करें.
सूक्ष्म-पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए फोर्टिफाइड फूड खाएं।
किसी भी समय का खाना न छोड़ें – कम और जल्दी-जल्दी खाने की आदत रखें, समय पर खाएं.
पैकेटबंद, सुरक्षित किया गया, प्रसंस्कृत किया गया, बेकरी, मैदा, तला हुआ और कैन वाला खाना न खाएं, बाहर का और देर रात खाना न खाएं।
एल्कोहॉल, धूम्रपान और तंबाकू का सेवन न करें।
खूब पानी पिएं और स्थानीय स्तर पर पैदा की जाने वाली चीज़ें खाएं, प्राकृतिक चीज़ें खाएं।
समुचित खान-पान इस बात का सूचक होता है कि आप खुद का कितना सम्मान करते हैं, और यह न भूलें कि सेहत ही एकमात्र ऐसी संपत्ति है जो हमेशा आपका साथ देगी।
*तनावमुक्ति और खुशी के लिए 5 तरीकों से बनाएं संबंध में बाउंड्रीज :*
न आप हर काम कर सकते हैं और न ही सभी को खुश रखना आपकी जिम्मेदारी है। जब आप ऐसा करने की कोशिश करते हैं, तो यकीन और ज्यादा तनाव और बोझ की शिकार होने लगती हैं। खुद को टेंशन फ्री रखने के लिए हर तरह की लिमिट लाइन तय करना जरूरी है।
बात की जाने वाली दखलअंदाजी कई बार घुटन भरा माहौल पैदा करने का काम करती है।
बात बात पर की जाने वाली दखलअंदाजी कई बार हमारे आसपास एक घुटना भरा माहौल पैदा करने का काम करती है। हमारे आसपास के लोग रुक-रुक कर कई बार हमें अपने होश पर चलते हैं और सिचुएशन के मुताबिक ढलने की कोशिश करते हैं। फिर देखते ही देखते वो पर्सनल स्पेस में भी अपना इन्वॉल्वमेंट ले लेता है। वे चीजें भी वो प्रमुखता से उठा रहे हैं, जो शायद ही उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं।
सोना, उठना, खाना, शॉपिंग और सोशल गैदरिंग सहित हर चीज में दखल देना उनकी आदत बन जाती है। समय के साथ अगर आप उन्हें इस बात का एहसास नहीं करवाते हैं, तो धीरे-धीरे आप तनाव का शिकार हो सकते हैं।
ऐसे में आपके आसपास कुछ हेल्दी बाउंड्रीज बनाना बेहद जरूरी है। जानते हैं हेल्दी माउंड्रीज को किस प्रकार से बनाया जा सकता है।
*1. अपनी भावनाओं को महसूस करें :*
अगर आप किसी इंसान या उसकी किसी एक्टिविटी को पसंद नहीं कर रहे हैं, तो उसे डायरेक्ट बोल दें। अगर आप समय रहते अपने विचारों को व्यक्त नहीं करते हैं, तो वो शख्स आपके उपर लगातार हावी होता चला जाएगा।
साथ ही आपके हर छोटे बड़े काम वो पैरलली अपना दखल देगा। उस शख्स को ये समझाएं कि उसकी लिमिट क्या है और कौन से टॉपिक्स पर आपको किसी का भी इंटरफेरेंस पसंद नहीं है।
अगर आप समय पर क्म्यूनिकेट नहीं करेंगे और हेल्दी बाउंड्रीज़ नहीं बनाएंगे, तो आपका रिश्तो उस शख्स से जल्दी ही खराब होने का खतरा हमेशा बना रहेगा।
हर रिश्ते में सीमाएं निर्धारित करना आपको अनावश्यक तनाव से बचाता है।
*2.डिस्प्यूट को उसी वक्त सुलझाएं :*
अगर ऑफिस में किसी कलीग या घर पर किसी सदस्य के साथ कोई बात हो गई है, तो उसे उसी वक्त सुलझा लें। साथ ही उस व्यक्ति को ये भी क्लीयर कर दें कि वो कहां पर गलत है।
किसी भी प्रोब्लम को अगर आप लंबे वक्त तक अपने ज़हन में रखते हैं, तो वो आपके मानसिक तनाव का कारण बन सकती है। किसी भी डिस्प्यूट को उसी वक्त सुलझाना और उस व्यक्ति की कमी को बताना बहुत ज़रूरी है।
ऐसा करने से आपका माइंड फ्री हो जाता है। साथ ही खुश रहने से हैप्पी हार्मोन रिलीज़ होने लगते हैं, जो हमारी मेंटल हेल्थ के लिए भी ज़रूरी है।
*3. ना बोलना सीखें :*
अगर आप किसी काम को लेकर खुश नहीं है या आपके पास उसे करने के लिए समय नहीं है, तो उसके लिए कभी भी हामी न भरें। साफ और सपष्ट भाषा में अगर आप किसी काम के लिए मना कर देते हैं, तो इससे मिसअंडरस्टैंडिंग से आप बच सकते हैं।
आप खुद कसे सेफ रखने और भविष्य में अपने अच्छे टर्मस के लिए ना शब्द को कहने से न डरें। इस बारे में विशेषज्ञ का कहना है कि कई बार कुछ चालबाज़ लोग मासूम लोगों का फायदाउ उठाकर उन्हें जानबूझकर गैरज़रूरी चीजों में उलझाने का प्रयास करते है। ऐसे में समझदारी से काम लें और अपने काम पर फोक्स करते हुए आगे बढ़ते चले जाएं।
सिचुएशन के ज्यादा बिगड़ने से पहले ही उस व्यक्ति को कुछ कहे बिना ही उससे दूरी बनाना शुरू करें। सिचुएशन के ज्यादा बिगड़ने से पहले ही उस व्यक्ति को कुछ कहे बिना ही उससे दूरी बनाना शुरू करें।
*4.करीब आने से रोकें :*
कई बार हम कुछ लोगों से बातचीत और विचार मिलने के कारण काफी नज़दीक आ जाते हैं। ऐसे में अब उन्हें ऐसा लगने लगता है कि वे कुछ भी कह सकते हैं और किसी भी तरह से हमें टच कर सकते हैं और दूसरे व्यक्ति को बुरा नहीं लगेगा। मगर ऐसा नहीं है।
टचिंग और बात बात में फलर्टिंग करना कई बार अलार्मिंग सिचुएशन का एक साइन है। इसके अलावा उनके द्वारा किए जाने वाले भद्दे कमेंटस भी हमारी इमेज को दूसरों की नज़रों में खराब करने का कारण बन सकते है। सिचुएशन के ज्यादा बिगड़ने से पहले ही उस व्यक्ति को कुछ कहे बिना ही उससे दूरी बनाना शुरू करें।
*5.हर जगह फलैक्सिबिलिटी न दर्शाएं :*
अगर कोई शख्स आपकी गिरफ्तारी को जान लेग, तो वो आप पर अपना दबाव बनाएं। ऐसे में खुद के व्यवहार को इतना लचीला न बनाएं कि कोई भी आप पर अपना हुकुमत चलाएं। अपनी पहचानों और सीमाओं से अन्य लोगों को अवाक करें।
अगर आप देर तक ऑफिस में रुकते नहीं हैं, तो अपनी बात को कहने का दम रखें। दूसरों से अपने रिलेशंस को खराब कर अपनी बात को रखने की कोशिश करें। इससे आपका रिलेशन भी हेल्दी बना रहेगा।

