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चमत्कार को नमस्कार

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शशिकांत गुप्ते

लेखक की नजर एक विशाल होर्डिंग पर गई।होर्डिंग पर विज्ञापन लिखा हुआ था।जीवन की हर समस्या का इलाज,नोकरी नहीं मिल रही है?संतान नहीं हो रही है?कर्ज से परेशान हो?कोई स्त्री सौतन से परेशान है?सासूमाँ झगड़ालू है?पति शराबी है?बच्चे गलत लाइन पर हैं?

किसी ने कोई जादू टोना कर रखा है?जीवन की हरएक समस्या का शर्तिया इलाज किया जाता है।नीचें किसी बाबा का नाम लिखा होता है।संपर्क के लिए,एक से अधिक मोबाइल नंबर भी लिखे होतें है।लेखक बहुत ही ध्यान से होर्डिंग पढ़ रहा था।उसी समय लेखक के मित्र ने पास आकर पूछा?क्या होर्डिंग पर लिखे हुए इबारत में कुछ व्यंग्य ढूंढ रहे हो?लेखक ने कहा यह होर्डिंग अपने आप ही व्यंग्य है।लेखक ने मित्र से कहा देखो कितनी आश्चर्य की बात है।

जिस बाबा के पास हर समस्य का इलाज है,उसे विज्ञापन करना पड़ रहा है?लेखक के मित्र ने कहा,यह तो एकदम सामान्यज्ञान की बात है।यह तो एक होर्डिंग मात्र है।ऐसे अनेक विज्ञापन आए दिन प्रकाशित और प्रसारित होतें रहतें हैं।ऐसे ही विज्ञापनों को देख,पढ़ कर भोले लोग झांसे में आजाते हैं और ठगे जातें हैं।समाचार माध्यमो की एक विशेषता है।समाचार माध्यमों में अंध विश्वास के विरूद्ध लोगों को जागृत करने के लिए लेख प्रकाशित होतें रहतें हैं।आश्चर्य तो इस बात का है कि,इन्ही समाचार माध्यमो में बाबाओं के विज्ञापन भी तादाद में प्रकाशित और प्रसारित होतें रहतें हैं।प्रायः उक्त बाबा लोगों की वेशभूषा मिलती जुलती होती है।अधिकतर बाबा लंबी दाढ़ी रखतें हैं।आश्चर्य तो इस बात का होता है।जिस देश में इतने बाबा हों,इन बाबाओं के अतिरिक्त और भी ऐसे लोग विद्यमान हो जो लोगों की हर तरह समस्याओं के समाधान के लिए इलाज करने की क्षमता रखतें हों।उसी देश में इतनी समस्याएं क्यों हैं?
शशिकांत गुप्ते इंदौर

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