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*लीजिए,आ गई मंदिरों के लूट की बारी!*

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 -सुसंस्कृति परिहार 

 मंदिरों की ज़मीन जो बहुतायत में मंदिर में बैठे भगवानों के नाम पर हैं जिसे राजा , महाराजाओं, मुस्लिम शासकों और जमींदार वगैरह 

 ने पुजारियों के भरण पोषण और मंदिर के रखरखाव के लिए दी थीं।उस ज़मीन पर जो दस एकड़ से अधिक है उसका मालिकाना हक़ अब कलेक्टर को देने का आदेश मध्यप्रदेश सरकार ने दिया है।इस बावत गुना जिले के आरोन में स्थित जानकी मंदिर के पुजारीगण मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में राज्यसभा के कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह से मिले जिससे यह बात सामने आई है।सिंह ने कहा है कि वे पुजारियों के आंदोलन में शरीक हैं।वे चाहते हैं मंदिरों की ज़मीन पर सरकार अपना मालिकाना हक ना जमाए।ये ज़मीनें मंदिर में  बैठे देवता के नाम से रहनी चाहिए।जिसका संचालन पुजारी अपने और ट्रस्ट के मुताबिक सदियों से कर रहे हैं।

Act, 1995) और पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 (Places of Worship Act, 1991) जैसे कानूनों के तहत शासित होता है; 1991 का कानून 15 अगस्त 1947 को किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को बदलने पर रोक लगाता है। हालांकि वर्तमान सरकार ने अयोध्या के बाबरी ढांचे को विनष्ट कर राममंदिर बनाने का आदेश सुको से लिया। जो आज भी एक विवादास्पद फैसला माना जाता है। विदित हो,भाईचारा बनाए रखने के लिए मुसलमानों के त्याग को नहीं भूलना चाहिए क्योंकि वहां राममंदिर के कोई अवशेष नहीं मिले थे।इधर सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसम्बर 25  केआदेश में स्पष्ट किया है कि, श्रद्धालुओं का दान मंदिर संस्था की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं के हित और सुविधाओं के लिए ही उपयोग किया जाएगा।लेकिन अब तो यह सरकारी आदेश है कि मंदिरों की ज़मीन नीलामी का पैसा जिला कार्यालय के शासकीय खाते में जाएगा।

उपर्युक्त कानून 1995 का संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश में मठ-मंदिरों की भूमि नीलामी से जुड़े आदेश के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर यह आदेश तत्काल वापस लेने की मांग की है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि जो सरकार खुद को सनातनी बताती है, वही सनातन परंपराओं पर हमला कर रही है। मुख्यमंत्री उस शहर से आते हैं जहां प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग है, लेकिन उनके कार्यकाल में पुजारियों के साथ कुठाराघात हो रहा है।

गुरुवार को मीडिया से बातचीत में सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पुस्तैनी पुजारियों के साथ दुर्व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार के दौरान पुजारियों की तनख्वाह बढ़ाई गई थी। लेकिन धर्म का ठेका लेने वाले लोग आज धर्मविरोधी फैसले कर रहे हैं।” सिंह ने बताया कि हाल ही में उनकी उज्जैन के पुजारियों से बातचीत हुई, जिन्होंने कहा कि मंदिरों में करोड़ों रुपये का चंदा आता है, लेकिन उसका उपयोग मंदिरों के रख-रखाव और पुजारियों के कल्याण में नहीं हो रहा है।

विदित हो,सरकार ने 22 अप्रैल 2023 को आदेश जारी किया था कि जिन मंदिरों के पास 10 एकड़ से अधिक भूमि है, उसे नीलाम किया जाएगा और उससे प्राप्त राशि सरकारी खाते में जमा कराई जाएगी। इसी आदेश के तहत गुना जिले के आरोन स्थित रामजानकी मंदिर के पुजारी प्रद्युम्नदास को नोटिस दिया गया है।

इधर पुजारी उत्थान कल्याण समिति के अध्यक्ष मंगल भारती के हवाले से मिली  जानकारी के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय स्पष्ट आदेश पहले ही दे चुका है कि मंदिरों की भूमि देवता के नाम दर्ज होती है और उसे न तो नीलाम किया जा सकता है। न ही लीज पर दिया जा सकता है और न ही कलेक्टर के नाम स्थानांतरित किया जा सकता है। इसके बावजूद नीलामी प्रक्रिया शुरू करना न्यायालय की अवहेलना है।

 प्रदेश में इस समय तक़रीबन  50 हजार पुजारी हैं। लेकिन आज उनके बच्चे शिक्षा से वंचित हैं और मंदिरों की समुचित देखरेख भी नहीं हो पा रही है। “मंदिरों की भूमि नीलामी का फैसला पूरी तरह असंवैधानिक, अवैध और सनातन परंपराओं का अपमान है। ये जमीन पुजारियों की नहीं बल्कि देवी-देवताओं की है।”

वस्तुत:देखा जाए तो भाजपा सरकार की नज़रें मंदिर और मठों पर लगी हुई हैं बाबा केदारनाथ मंदिर का सोना पीतल में बदल गया। अयोध्या, काशी,और उज्जैन सहित प्रमुख  तीर्थ स्थलों से जो ज़मीन खाली कराई गई वह कारपोरेट के हाथों में चली गई है।अभी ज़मीन की लड़ाई है आगे ट्रस्ट की सम्पत्ति सरकारी होने की तैयारी है। क्योंकि जनता को बेरहमी से लूटने वाली सरकार की नज़रें अब मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, बौद्ध मठ ,जैन तीर्थ और चर्च के ट्रस्टों पर है। जहां अकूत धन लोगों द्वारा दिए जाने से भरा पड़ा है।जय जगन्नाथ का शोर यूं ही नहीं था। तिरुपति बालाजी के लड्डुओं के हंगामें के पीछे यहां हस्तक्षेप की भावना ही प्रबल थी। पुजारियों को जब वेतन का प्रावधान हुआ तभी यह समझ जाना चाहिए था कि दाल में कुछ काला है।

बहरहाल, वक्फ़ संपत्ति के बाद अभी गाज मंदिरों की ज़मीन नीलामी पर गिरी है यदि नहीं संभले तो सब कुछ देश नियामक अडानी के लिए कुर्बान हो जाएगा।

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