अग्नि आलोक

हिन्दू समाज और जातिवाद

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नीतू पटेल
सभी का मानना है कि जातिवाद भारत के लिए आत्माहन हैं। लेकिन फिर भी सभी जातियों के अपने अपने गरिमामयी संगठन हैं। पर ये संगठन हिन्दू समाज की दुसरी जातियों पर आक्रमक एकदम खून के प्यासे  होते हैं। इन संगठन में बैठे बड़े प्लेयर तय करते हैं अपनी सुविधानुसार कि क्या करना है। इन्हें हिन्दू समाज के उत्थान से मतलब नहीं है, सिर्फ जाति अवमानना ऊंच नीच। 


एक तरफ सनातन के सिध्दांतों की दुहाई देते हैं दूसरी तरफ एक दूसरे के खिलाफ घृणित बाते करते हैं। कभी कहते हैं मंदिर मे चढ़ावा मत दो, पंडित मंदिर छोड़ कर भाग जायेगा। इसका अर्थ है कि आप पूज्यनीय शब्द का मतलब नहीं समझ पाये है।
हमे समझना होगा कि जातियो की ठेकेदारी करने वाले इस कदर नफरत भर रहे मानो गृहयुद्ध में धकेलना हो। आपको जाति के नाम पर कुंठित करके आपका इस्तेमाल एक मूर्ख वोटबैंक के तौर पर किया जाता है।
समाज को समझदार बनना होगा। हमें हिम्मत करके उन सभी मुद्दों पर स्पष्ट होकर बोलना पड़ेगा, जिससे हिन्दू समाज का वास्तव में भला होता हो पर क्षणिक नाराज़गी के डर से कोई बोलता न हो। 
एक दूसरे को जोड़ने का काम करिए, लात मारने का नहीं।

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