-सुसंस्कृति परिहार
लखनऊ विश्वविद्यालय से एक पुरसुकून ख़बर आई है। जहां सद्भाव की मिसाल एक नफ़रत के आगोश में जलते हुए उत्तर प्रदेश की है।
पिछले कई वर्षों से दमन और तिरस्कार सहते हुए यह प्रदेश कराह रहा है।जबकि वहां के लोग अभी भी परस्पर भाईचारा बनाए हुए हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय के वे सभी छात्र बधाई के पात्र हैं जिनके साए और संरक्षण में गत रविवार मुस्लिम छात्रों ने नमाज़ अदा की। पता चला है कि विश्वविद्यालय केंपस में स्थित लाल बारादरी मस्जिद तकरीबन दो सौ साल पुरानी है में हमेशा से नमाज़ होती रही है जबकि विश्वविद्यालय सौ साल पुराना है। विश्व विद्यालय बनने के बाद यहां बाहरी नहीं वहां के छात्र ही नमाज़ पढ़ते रहे हैं किंतु इस बार उसे जर्जर बताकर रमजान जैसे मुबारक माह में उसके दरवाजे पर ताला जड़ दिया गया तधा वहां नोटिस चस्पा किया गया कि यहां नमाज़ नहीं होगी।
इस तल्ख़ हकीकत से जब मुस्लिम छात्र बेचैन और परेशान दिखे तो हिंदू छात्रों ने उनकी सुरक्षा कवच बनकर मस्जिद प्रांगण के वे बैरिकेड तोड़े तथा नफरतियों की इस कुचाल के ख़िलाफ़ सहानुभूति प्रदर्शित करते हुए नमाज़ अदा कराई और फिर इफ्तार में भी शामिल रहे।
इसके बाद सबने मिलकर मस्जिद का ताला खोलने हेतु अनशन प्रारंभ कर दिया है। जिसके बाद वहां बड़ी संख्या में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई है। इससे विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार के कठोर और भाईचारा बिगाड़ने वाले रवैए का पता चलता है।
सूत्र बता रहे हैं इस घटना के पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत विश्वविद्यालय आए थे। इसके बाद ही ये नया बहाना बनाकर ताला लगाया गया। ताला अभी भी बंद है तनाव बर करार है। छात्रों के मस्जिद प्रांगण में नमाज़ करने वालों और उनके हिंदू दोस्तों पर एफआईआर की तैयारी कर रही है।

इस मिठास और मोहब्बत भरी दोस्ती को बर्बाद करने की जो कवायद सरकार करने जा रही है उससे प्रदेश में दंगे की बुनियाद खड़ी की जा रही है। चुनाव के मद्देनजर इस घटना को यदि तूल दिया जाता है तो इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ेगा। बेहतर हो इसे रमजान माह तक खोल दिया जाए। अचानक जर्जर कहकर तनाव बढ़ाना उचित नहीं। छात्रों ने भी कोई अक्षम्य अपराध नहीं किया है। उन्हें क्षमा किया जाए।
अंत एक बार पुनः उन तमाम हिंदू छात्रों को बधाई और सलाम जिन्होंने भाईचारा की एक गरिमामय परम्परा निभाई।