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ऐतिहासिक इतिहास लिखा जा रहा है

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शशिकांत गुप्ते इंदौर

राजनीतिशास्त्र के विद्यार्थियों को जब वर्तमानकाल का इतिहास पढ़ाया जाएगा।आज जो वर्तमान है, वह भविष्यकाल में इतिहास बन जाएगा।सन 2014 के सत्तापरिवर्तन के बाद,1947 से 2014 के बीच का  इतिहास हास्यास्पद है।विवादित भी है।शून्य भी है।सन 1947 के पूर्व लगभग दो सौ वर्ष तक गुलाम रहने वाले देश को स्वतंत्रता करवाने में देशभक्तों ने अपनी कुर्बानिया दी।एक कहावत है,चूहे अपने रहने के जमीन को खोदने का परिश्रम करतें हैं।बिल बनातें हैं।

चूहों के द्वारा निर्मित बिल पर सर्पराज नागदेवता अतिक्रमण कर लेतें हैं।बिल के निर्गम द्वार पर अपनी फ़न निकाल कर इतराते और फुंकार मार कर ऐसा दर्शातें हैं कि, यह बिल बनाने की सारी मशक्कत इन्होंने ही की है।

राजनीतिशास्त्र के विद्यार्थी जब इतिहास पढ़ेंगे,तब उन्हें आश्चर्य होगा, यह पढ़ कर कि, सन 2014 के बाद की राजनैतिक व्यवस्था संभालने वालों की प्राथमिकताएँ निम्न थी।जनकल्याण के लिए सर्वप्रथम लोगों में धार्मिक आस्था जागृत करने के लिए भगवान का मंदिर निर्मित करना?बेरोजगारों के लिए प्रतिवर्ष दो करोड़ रोजगार उपलब्ध करने के सिर्फ वादें करना?महंगाई पर नियंत्रण रखने का वादा करना लेकिन सत्ता प्राप्ति के बाद महंगाई को अनियंत्र कर देना?सन 2014 में धार्मिक लोग सत्ता में विराजित हुए हैं। धार्मिक लोगों के द्वारा किसानों के द्वारा की जा रही आत्महत्याओं के लिए कहा जाएगा कि कृषकों ने स्वेच्छिक समाधि ली है।महामारी फैलने के बाद मजदूरों ने मजबूरी शहरों से पुनः अपने गांवों की ओर पलायन किया।

पहली बार शुचितापूर्ण जीवन यापन करने वाले नर देह धारी इन्द्र के द्वारा आत्मनिर्भरता की घोषणा का समर्थन करतें हुए,मजदूरों ने आत्मनिर्भरता का परिचय दिया।पदयात्रा के दौरान बहुत से मजदूर  भगवान को प्यारे हो गए।इस हादसे पर प्रधान सेवक ने  दार्शनिक वक्तव्य दिया कि, जो मजदूर पलायन के दौरान परलोक  सिधार गए उन्होने बलिदान दिया है।बलिदान की एक नई परिभाषा का उदय हुआ है, व्यवस्था की लापरवाही के कारण यदि किसी की मृत्य होती है वह बलिदान कहलाता है।सन 2014 के बाद पचास वर्षों तक राज करने वालों ने अमृतपान का सेवन कर लिया है।

इतिहास2014 +50 वर्ष =2064 में लिखा जाएगा।तब तक सौ करोड़ लोगों को रोजगार मिल चुका होगा।सत्तासीन लोगों के द्वारा अपने साथ बेरोजगारों को भी अमृत का सेवन कराया जाएगा।आज के युवा पचास वर्षो तक युवा रहेंगे।इतिहास में यह भी लिखा जाएगा कि, गांधीजी की आलोचना और अवहेलना सन 2014 बाद  बेख़ौफ़ होकर की गई।लौहपुरुष की गगनगचुम्बी मूर्ति स्थापित कर पटेलजी के प्रति असीम आस्था का परिचय दिया गया।प्रथम प्रधानमंत्री के धर्म को लेकर बहुत विनोद किए गए।अर्थात नेहरूजी का मजाक उड़ाया गया।

इतिहास सब नोट करता है।इतिहास लिखवाया भी जाता है।कोई लाख चतुराई करें।शोधकर्ताओं के अनुसंधान से कोई।बच नहीं सकता है।गांधीजी की हत्या को जायजा ठहराने वालें बेख़ौफ़ होकर गांधीजी के पुतले कोसार्वजिनक स्थान में रख कर गोली मार कर सांकेतिक खून निकल कर बहादूरी का परिचय दिया गया।बुनियादी समस्याओं के लिए लुभावने वादें और दावें प्रस्तुत कर व्यक्तिपूजक और सत्ताकेंद्रित राजनीति का प्रचलन शुरू हुआ।सन 2014 में राजनीति शब्द कोष में एक महत्वपूर्ण शब्द का सामवेश हुआ।वह महत्वपूर्ण शब्द है जुमला।
शशिकांत गुप्ते इंदौर

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