अग्नि आलोक

*राज्यपाल और राज्यों के बीच विवादों का इतिहास 40 साल पुराना*

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि की ओर से 2023 में 10 विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए आरक्षित रखने के कदम को अवैध और गलत करार दिया। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने फैसला सुनाया कि विधानसभा की ओर से दोबारा पारित क‍िसी व‍िधेयक को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखने का अध‍िकार राज्यपाल के पास नहीं है।सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि के फैसले को गलत ठहराया। राज्यपाल ने 2023 में 10 विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा था। अदालत ने कहा कि राज्यपाल को दोबारा पारित विधेयक राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करने का अधिकार नहीं है। यह फैसला तमिलनाडु सरकार की याचिका पर आया है। इससे पहले भी राज्यपाल और राज्यों के टकराव के कई मामले हैं।

 दरअसल तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया था कि राज्यपाल ने खुद को वैध रूप से निर्वाचित राज्य सरकार के ‘राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी’ के रूप में पेश किया है। यह कोई पहला मामला नहीं है, जब राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच खुलकर तनातनी या खींचतान का मामला सामने आया हो। इससे पहले भी ऐसे कई मामले हुए हैं।

पिछले 40 वर्षों (1985 से 2025 तक) में भारत में कई राज्यपाल ऐसे रहे हैं, जिनके कार्यों ने राज्यों के साथ विवादों को जन्म दिया। ये विवाद अक्सर विधायी देरी, राज्य सरकारों के साथ टकराव, या संवैधानिक सीमाओं के कथित उल्लंघन से जुड़े रहे। नीचे कुछ प्रमुख राज्यपालों की सूची दी गई है, जिन्हें उनके कार्यकाल के दौरान विवादों के लिए जाना गया।

1.रोमेश भंडारी
2. बूटा सिंह
3. हंसराज भारद्वाज
4. कमला बेनीवाल
5. जगदीप धनखड़
6.सीवी आनंद बोस
7. आरएन रवि
8. बनवारी लाल पुरोहित
9.आरिफ मोहम्मद खान

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