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नेताओं के हाथों ईमान बिकते हैं

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जगन प्रसाद तेहरिया ….की वाल से ……….

ख़बर बिकती है, ख़बरों वाले इंसान बिकते हैं,
झूठे नेताओं के हाथ यहाँ, झूठे ईमान बिकते हैं।

कौन लिखेगा हक़ीक़त-ए-सूरत इस समाज की
दौर-ए-झूठ में, कलम बिकती है, कलाम बिकते हैं।

झूठे नेताओं की झूठी कहानियाँ है,
जनता के पास इनकी फ़रेब की निशानियाँ है।

हर झूठे नेता ने समय समय पर ठगा है,
इनकी हिफाज़त में कई सैनिकों ने दी कुर्बानियाँ है।

झूठे नेताओं की झूठी कहानियाँ है,
जनता के पास इनकी फ़रेब की निशानियाँ है।

हर झूठे नेता ने समय समय पर ठगा है,
इनकी हिफाज़त में कई सैनिकों ने दी कुर्बानियाँ है।

नेताओं के हाथों ईमान बिकते हैं

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