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अनीता कैसे बनी लोगों के लिए प्रेरणा:मल्टीग्रेन आटे से सालाना लाखों की कमाई

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 गोंडा : उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड झंझरी स्थित तिवारी पुरवा गांव की अनीता तिवारी ने यह साबित कर दिया है कि हौसला और मेहनत हो तो मुश्किल हालात भी रास्ता दे देते हैं. घर से शुरू किए गए छोटे से काम को उन्होंने आज आजीविका का मजबूत साधन बना लिया है. मल्टीग्रेन आटे के व्यवसाय से वह न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य को भी संवार रही हैं.गोंडा जिले के झंझरी ब्लॉक की अनीता तिवारी ने कठिन हालात में भी हार नहीं मानी. पति की मृत्यु के बाद बच्चों की जिम्मेदारी ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी. घर पर चक्की लगाकर मल्टीग्रेन आटे का व्यवसाय शुरू किया और आज वह इससे अच्छी कमाई कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं.

घर की चक्की बनी रोजगार का जरिया
अनीता तिवारी ने अपने घर में ही चक्की लगाकर मल्टीग्रेन आटा तैयार करना शुरू किया. गेहूं के साथ ज्वार, बाजरा, मक्का, चना, सोयाबीन और जौ जैसे मोटे अनाजों को मिलाकर वह शुद्ध आटा तैयार करती हैं. स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण लोग पैक्ड आटे के बजाय घर पर तैयार शुद्ध आटे को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे उनके उत्पाद की मांग लगातार बढ़ रही है.

निजी जीवन ने बदली दिशा
अनीता तिवारी बताती हैं कि उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की थी. शादी के बाद वह एक गृहिणी के रूप में जीवन बिता रही थीं. अचानक पति की हत्या हो जाने से उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई. इस सदमे के कारण वह करीब दो साल तक सामान्य स्थिति में नहीं रहीं. जब बच्चों की जिम्मेदारी सामने आई, तब उन्होंने खुद को संभालते हुए कुछ नया करने का फैसला लिया.

बच्चों की परवरिश बनी वजह
तीन बेटियों और एक बेटे की जिम्मेदारी ने अनीता को आगे बढ़ने की ताकत दी. उन्होंने सोचा कि ऐसा काम किया जाए, जिससे बच्चों की अच्छी परवरिश हो सके. इसी दौरान मोटे अनाज के व्यवसाय का विचार आया. उन्होंने इस विषय पर रिसर्च की और फिर स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने सपने को आकार देना शुरू किया.

स्वयं सहायता समूह से मिली ताकत
अनीता तिवारी बताती हैं कि वह दिव्यांजलि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं. समूह से उन्हें शुरुआती पूंजी और मार्गदर्शन मिला. इसी के सहारे उन्होंने मोटे अनाज के आटे का व्यवसाय शुरू किया और धीरे-धीरे इसे आगे बढ़ाया.

इस तरह तैयार होता है शुद्ध आटा
अनीता बताती हैं कि वह ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का और चना जैसे अनाज बाजार से अच्छी क्वालिटी के चुनकर लाती हैं. इसके बाद अनाज की अच्छी तरह धुलाई की जाती है. धूप में सुखाने के बाद अपने घर में लगी पिसाई मशीन से आटा तैयार किया जाता है. यहां मल्टीग्रेन आटा भी बनाया जाता है, जिसकी सबसे ज्यादा मांग रहती है.

पिसाई से भी होती है अतिरिक्त आमदनी
उन्होंने बताया कि आसपास के मोहल्लों और गांवों के लोग भी गेहूं और मोटे अनाज की पिसाई कराने उनके यहां आते हैं. इससे उन्हें अतिरिक्त आय होती है. एक तरफ पिसाई का काम और दूसरी ओर आटे की बिक्री से उनकी कमाई में लगातार इजाफा हो रहा है.

कई तरह के आटे उपलब्ध
अनीता तिवारी के यहां मल्टीग्रेन आटा, ज्वार का आटा, बाजरा का आटा, रागी का आटा, मक्का का आटा और चना का आटा उपलब्ध रहता है. वह किसी भी तरह की मिलावट नहीं करतीं, इसी कारण ग्राहक बार-बार उन्हीं से आटा खरीदते हैं.

कहां से आता है अनाज और कहां होती है सप्लाई
अनीता बताती हैं कि वह रॉ मटेरियल कानपुर और कभी-कभी गोंडा के स्थानीय किसानों से लेती हैं. उनके आटे की सप्लाई स्मार्ट बाजार और गोंडा की कुछ निजी दुकानों पर होती है. इसके अलावा लोग सीधे उनके घर से भी आटा खरीदने आते हैं.

सीमित पूंजी से सालाना लाखों की आय
अनीता तिवारी ने बताया कि उन्होंने यह व्यवसाय स्वयं सहायता समूह से मिले 30 हजार रुपये से शुरू किया था. आज उनके इस काम से सालाना करीब एक से डेढ़ लाख रुपये की आय हो रही है. उनकी यह कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है.

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