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शबाना आजमी ने कैसे कायम किया था नेशनल अवॉर्ड जीतने का रिकॉर्ड, जिनसे कंगना अभी पीछे हैं

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चार बार नेशनल अवार्ड और पद्मश्री जीतने के बाद भी कंगना रनौत अभी शबाना आजमी से पीछे हैं. कंगना को हाल ही में ‘पंगा’ और ‘मणिकर्णिका’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का राष्ट्रीय पुरस्कार (Best Actress national award 2021) मिला है फिर भी वे नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली एक्ट्रेस की लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं. पहले नंबर पर आज भी खूबसूरती और टैलेंट की मिसाल कही जाने वाली शबाना आजमी का नाम दर्ज है.

कंगना को तीन बार बेस्ट एक्ट्रेस और एक बार सपोर्टिंग रोल के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है जबकि शबाना आजमी को पांच बार बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवार्ड मिल चुका है. यानी कंगना अभी भी शबाना आजमी से एक अवार्ड पीछे हैं. तो चलिए अब शबाना आजमी के पांच बार नेशनल अवार्ड जीतने की कहानी (shabana azmi success story) बताते हैं. शबाना आजमी को फिल्म अंकुर, अर्थ, कंधार, ‘खंडहर’ और गॉडमदर के लिए पांच बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है. अपने करियर के समय शबाना आजमी ने बेनेगल, सत्यजीत रे, मृणाल सेन और अपर्णा सेन जैसे सम्मानित डायरेक्टर्स के साथ काम किया.

शबाना आजमी ने हमेशा वही किया है जो उनके दिल ने चाहा है

शबाना, मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मनोविज्ञान विषय में ग्रेजुएट हैं. पढ़ाई पूरी करने के बाद शबाना, जया बच्चन की फिल्म ‘सुमन’ देखकर इतना प्रभावित हो गईं कि फिल्मों में काम करने की ठान लीं. अपने इस सपने को पूरा करने के लिए शबाना ने भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान में एडमिशन ले लिया. उनकी पहली फिल्म अंकुर थी, जिसमें उनकी एक्टिंग की काफी सराहना हुई.

अपनी पहली फिल्म में बेहतरीन अभिनय के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवार्ड पाकर उन्होंने को बता दिया कि वे अभिनय की दुनिया में बहुत नाम कमाने वाली हैं. इसके बाद शबाना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 120 से ज्यादा हिंदी और बांग्ला फिल्मों में काम किया. नेशनल अवार्ड के अलावा शबाना को स्वामी, अर्थ, और भावना जैसी फिल्मों के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार से भी नवाजा गया.

सिर्फ इतना ही नहीं शबाना आजमी को पद्मभूषण, गांधी इंटरनेशनल फाउंडेशन लंदन द्वारा गांधी शांति पुरस्कार, शिकागो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ‘फायर’ के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सिल्वर हुगो अवॉर्ड’ से भी पुरस्कृत किया गया है.

शबाना अपने पिता कैफी आजमी के करीब थीं. पिता की लिखी पंक्तियां ‘कोई तो सूद चुकाए कोई तो ज़िम्मा ले, उस इंक़लाब का जो आज तक उधार सा है…’ शबाना के दिल के बेहद करीब है. इसलिए वे अक्सर लोगों की मदद के लिए चैरिटी करती हैं. वह समाज सेवा करने में यकीन रखती हैं और खुद करती भी हैं. इस जज्बे की वजह से ही शबाना ने समाज के अलग-अलग पहलुओं और परेशानियों को पर्दे पर बखूबी दर्शाया है, क्योंकि वे अपने किरदारों को गहराई से समझतीं और महसूस करती हैं.

यह कहना गलत नहीं होगा कि शबाना के जीवन में आगे बढ़ने के पीछे उनकी प्रगतिशील विचारधारा है. शबाना बचपन से ही प्रोग्रेसिव माइंड वाली रही हैं. समाज की नियमों के विपरीत उन्होंने अपने दिल की सुनी. चाहें उस जमाने में बोल्ड विषय पर बनी दीपा मेहता की फिल्म ‘फायर’ में एक्टिंग करने का फैसला हो या फिर शादीशुदा जावेद अख्तर से शादी करने का फैसला हो. शबाना आजमी ने वही किया है जो उन्होंने चाहा है और यही उनकी सफलता की वजह है.

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