श्री श्रीश यादव
मन की यदि लिख दूँ..
तो बवाल होगा….!

हँसते हुए मिलता हूँ
आपकी ही सुनता हूँ
अपनी जो कह दूँ.....!
तो बवाल होगा….!
पाखण्ड के महलों में
महिमा का मंडन है
मंडन का खंडन कर दूँ !
तो बवाल होगा….!
हिन्दू और मुस्लिम में
आपका ही मंगल है
जातिवाद पर लिख दूँ....!
तो बवाल होगा…..!
इतिहास के पन्नों में
भूखे और नंगों की
सदियों से पीड़ा है,
वो पीड़ा यदि कह दूँ.....!
तो बवाल होगा…..!
रात में जलाया गया.....!
जीप से कुचला गया......!
मटके के पानी पीने से.....!
जान से मार दिया गया....!
इस पर कुछ कह दूँ...!
तो बवाल होगा….!
आप गरुण पर बैठे हैं....!
और बुलबुल पर उड़ते हैं...!
इधर...
कोई घोड़ी पर चढ़ कर...
अपनी बारात सजा लें...!
कोई मेज पर बैठकर...
खाना खा ले…!
कोई साफ-सुथरा ….
कपड़ा पहन ले…!
कोई कड़क मूँछ रख ले…!
कोई खेत की कटाई करने से..
मना कर दे…!
कोई मरी गाय की खाल….!
छीलने से मना कर दे…!
कोई पत्रकार……
सच-सच लिख दे…!
कोई कर्तव्यनिष्ठ अफसर….
ईमानदारी से….!
अपनी ड्यूटी निभा ले…!
कोई जबरन……!
वंदेमातरम् न बोले..!
कोई अंधविश्वास के खिलाफ…!
अलख जगाने लगे…!
कोई दंगों में मारे गए..
निर्दोष लोगों की व्यथा कथा..!
की पोल – पट्टी खोलने लगे…!
आदि…आदि…आदि….!
तो…..!
आपके पालतू गुंडों द्वारा
उसकी ही पिस्तौल से….!
उसकी दिन-दहाड़े..!
उसकी कनपटी पर…!
गोली मार दी जाएगी..!
उसके दरवाजे पर ही…!
उस पर मिट्टी का तेल..!
छिड़ककर…….
जिंदा जला दिया जाएगा..!
जेल में सड़ा दिया जाएगा..!
ईडी,इन्कम टैक्स, सीबीआई….!
जैसे पालतू कुत्तों को…!
उनके ऊपर…..!
छोड़ दिया जाएगा…!
हिटलर, मुसोलिनी,जार…
चंगेज आदि …!
जैसों के भी…!
आज नामों – निशान तक….!
इस धरती से मिट गए…!
ये सारे तानाशाह…!
इतिहास के बदबूदार..!
अंधेरे कोने में…!
गंदे कीचड़ में …..!
लिपटे हुए….!
सड़ रहे हैं….!
दुनिया…..!
उन्हें याद कर….!
हिकारत से…..!
घृणा से…. !
उनकी तरफ…!
थूकती है….!
फिर भी इन नन्हें कीटों को….!
अभी भी गुमान है कि…!
“हम हजार साल तक….!
सत्ता पर काबिज रहेंगे …!
सुख भोगेंगे…! “
कितने नादां हैं ये….?
साभार- श्री श्रीश यादव जी ,जाति का विनाश पटल, संपर्क - 85650 03008
संकलन एवम् संपादन - निर्मल कुमार शर्मा गाजियाबाद उप्र संपर्क - 9910629632