मुनेश त्यागी
दुर्दशा देखकर देश की
मैं हो गया बहुत परेशान,
कैसे जालिम गटक गए
मेरा पूरा का पूरा हिंदुस्तान।
बनना था हिंदुस्तानी तुमको
तुम बन गए हिंदू मुसलमान,
क्या हुआ और कहां भटक रहा
मैं ढूंढ रहा हूं मेरा पूरा हिंदुस्तान।
कैसे बढ़ गये शोषण और अन्याय
कैसे लुट गये मजदूर और किसान,
अब मैं तुम सबसे ही पूछ रहा हूं
कैसे लुट गया मेरा पूरा हिंदुस्तान?
सत्ता तो तुमको सौंपी थी
करोगे जनता को मालामाल,
तुम खुद ही बन बैठे सरमायेदार
तुमने लूट लिया मेरा पूरा हिंदुस्तान।
अब फिर तुमसे पूछ रहे हैं
भगतसिंह सुभाष और अशफाक,
विकास विकास का क्या हुआ?
फिर से लुटवा दिया मेरा पूरा हिंदुस्तान।
ये दोस्त नहीं हैं, पूरे के पूरे जालिम हैं
कह रहे हैं ज्यादातर मजदूर किसान,
इन जालिमों को अब हटाओ सत्ता से
फिर से कह रहा है मेरा पूरा हिंदुस्तान।

