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हम दो , हमारे दो ….”शाबास राहुल…..

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सुसंस्कृति परिहार  

     इस बार सदन में एक बहुत पुराना नारा जिसका सम्बंध परिवार नियोजन से था हम दो और हमारे दो सदन में बार बार दोहराया गया। जिसने देश के तमाम लेखकों समालोचकों, विश्लेषकों को चौंका दिया।कल जमा चार शब्द अब तक लिखे गए सब लेखों पर भारी पड़ गए।हम दो यानि —–छोटा भाई और मोटा भाई और हमारे दो यानि— अडानी और अंबानी। अब देखिए जिस तरह माता पिता अपने पुत्र पुत्री के विकास का ख्याल रखते उनके लिए सब कुछ करने तत्पर रहते हैं। उसी तरह दोनों बड़का छुटका जी अपने व्यवसाई  पुत्रों के लिए भी रात दिन एक कर रहे हैं।क्योंकि उनकी बदौलत सत्ता हथियाए है। अच्छे-बुरे का ख़्याल नहीं इसी चक्कर में अन्नदाता से टक्कर चल रही है। इन्हीं के लिए नोटबंदी ,देश की सरकारी संस्थाओं का निजीकरण,विक्रय,जी एस टी,वगैरह वगैरह। सदन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जो नारा दिया वह प्रभावी है और समग्र रूप से भारत-सरकार का सम्यक मूल्यांकन करता है। 

            इस दौरान राहुल गांधी ने एक और यादगार काम किया किसान आंदोलन में अब तक शहीद हुए 200से अधिक किसानों को श्रद्धांजलि देते हुए अपने साथियों सहित दो मिनिट का मौन रखा। भाजपाई चीखते चिल्लाते रहे और स्पीकर महोदय लुत्फ लेते शांति की अपील करते रहे।वे यह भी ताकीद करते रहे कि बजट पर चर्चा करें पर राहुल का जवाब उन्हें इस रूप में हासिल हुआ ।पहली नज़र में यह सदन की अवहेलना नज़र आती है किंतु विपक्ष के एक सक्रिय नेता के रूप में उनका यह काम महत्वपूर्ण और ज़रूरी था । जहां पिछली बातों पर धारधार अश्रु देश के प्रधानमंत्री ने खुलकर बहाए वहीं आंदोलनरत किसानों की दो सैकड़ा से अधिक मौत जिनमें कई किसानों ने आत्महत्याएं भी कीं उनके लिए श्रद्धांजलि के दो शब्द भी नहीं निकले थे।   

           राहुल गांधी ने भयानक टोका-टोकी और आत्मविश्वास के साथ जिस तरह अपने संक्षिप्त समय जितना कुछ कहा वह यह सिद्ध करता है कि राहुल ने विपक्ष में बैठकर बहुत कुछ सीख लिया है और वे चुनौतियों से जूझने की क्षमता रखते हैं।इससे पहले कोरोना के ख़तरे की चेतावनी भी उनकी उपलब्धि मानी जा सकती है। बहुत समय से कांग्रेस को एक मजबूत नेता की तलाश थी उसमें राहुल की यह तरक्की महत्वपूर्ण है ।कहना ना होगा कि नेहरू, इंदिरा,राजीव के बरअक्स राहुल को जितनी चुनौतियों से गुजरना पड़ा वे ही उसे मज़बूत और पुख्ता बना रहीं हैं । कांग्रेस को ऐसे अलोकतांत्रिक राजनैतिक माहौल में अपने को सक्षम और समर्थ बनाने की आवश्यकता है । जहां तक सोनिया जी की और अब तक के राहुल की बात थी उन्होंने राजनीति को इतना मलिन और झूठ का पुलिंदा नहीं समझा था वे तो त्याग और बलिदान का पाठ ही पढ़ते रहे हैं । इसलिए वे पीछे रह गए ‌।अब वो समय आ चुका है जब जनता ने इन फासिस्ट ताकतों को पहचान लिया । ऐसे लोगों से परहेज़ कर  सबका साथ लेकर देश बचाओ अभियान चलाया जाना चाहिए ।’हम दो हमारे दो ‘नारा ‘चौकीदार चोर है’ की तरह प्रभावक और मारक है।

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