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निराश नहीं हूं प्रिय

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निराश नहीं हूं प्रिय
न ही है तुमसे शिकायत
कुछ ही दिनों में
जी लिया पूरा जनम
हमने साथ निभाने का वचन लिया था
तुम न रही तो क्या
मैं हूं न
अपनी लाश खुद के कांधे उठाये
चलूंगा
सृष्टि के अंत तक
ताकि छीन सकूं सृष्टिकर्ता से
तुम्हारे संग जियें हर पल को
अनंत विस्तार देने की ताकत !

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