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*पति मरे तो पत्नी अभागी, पत्नी मरे तो पति सौभाग्यशाली*

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      दिव्यांशी मिश्रा, भोपाल 

 पत्नी के मरने पर पति तुरंत ही दूसरी शादी कर लेता है यह कहकर कि उसके बच्चों को मां की जरूरत है, जबकि सत्य यह होता है कि उसे अपने लिए एक शरीर की आवश्यकता होती है।

   इसके विपरीत औरत बच्चों की खातिर ही ब्याह नहीं करती, इसके लिए वे कहीं भी छोटी मोटी नौकरी करके गुजारा करती है और बच्चों की परवरिश करती हैl

क्या उसको जरूरत नहीं है शरीर की ?

हर गली, हर मोहल्ले,  हर कस्बे,  हर शहर में आप को मर्दाना कमजोरी को भगाने के लिए तरह-तरह के इश्तिहार मिल जाएंगे :

 जापानी तेल का चमत्कार

शीघ्रपतन दोषी मिलें 

टेढ़ापन से पीड़ित मिलें 

छोटे लिंग को बड़ा करने के लिए मिलें 

घोड़े जैसी शक्ति के लिए मिलें 

शुद्ध शिलाजीत का सेवन करें

और भी बहुत सारे मिल जाएंगेl

     बावजूद इसके यदि औरत ने पहले पहल कर दी तो औरत के चरित्र पर तुरंत शक करेंगे कि न जाने कितनी जन्मों की भूखी है यह न जाने कितना चाहिए इससे.

यदि पत्नी किसी कारण मना करती है तो तुम ठंडी, नीरस, बंजर हो।

अगर दुबली पतली हो तो कैसी सीख सिलाई हड्डी वाली हो. गड़ती रहती हो।

अगर शरीर भारी हो चला हो तो कैसे बोरे जैसी फैल गई हो.

अगर मासिक हो रहे होते हैं तो यह तो तुम्हारा हर महीने का नाटक है.

अगर किसी को मासिक नहीं आते तो तुम तो बांझ हो.

अगर बच्चे होने के बाद शरीर में कसाव की कमी हो जाती है तो (स्तन और योनि) तुम तो एकदम चूसा हुआ आम हो गई हो।

भले ही खुद का लिंग मरणासन्न चूहा ही साबित होता हो एक ही पारी के बाद और जरा सी गर्मी पाते ही उल्टी कर देता है कुछ ही सेकंड्स में.

  अगर पत्नी ने एक की जगह दो बार या तीन बार सेक्स की डिमांड कर दी तो तुरंत कहेगा न जाने कितने घाट का पानी पी होगी.

 इसकी प्यास ही नहीं बुझती.

यानी पुरुष सदैव छूरी बनके स्त्री नामक खरबूजे पर गिरता है और नतीजा कटना खरबूजे को ही है।

इसलिए अगर आप में से कोई भाई बंधु इस तरह की हरकत करता हो तो तुरंत बंद कर दें.  अन्यथा किसी दिन स्त्री ने यदि यह कह दिया कि बेकार में घिसो मत. बेचारा मर जाएगा, खत्म हो जाएगा. तो यकीन मानो खुद को मर्द कहने वालों तुम्हारे लिए यह चुल्लू भर पानी में डूब मरने वाली बात होगी.

औरतों में पुरुष से कहीं अधिक सेक्स की क्षमता भी होती है और वह अधिक देर तक टिकती भी है लेकिन वह कभी तुम्हें इस बात का एहसास नहीं होने देती।

  यह एक सच है कि 1% औरतें ही चरमोत्कर्ष को प्राप्त होती हैं और वह भी हर बार नहीं. जबकि 100%  प्रतिशत पुरुष इस्खलित जरूर होता है। इसीलिए कहती हूं तुम्हारी इज्जत की लंगोट तुम्हारे हाथ में नहीं तुम्हारी पत्नियों की हाथ में है.

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