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जनता ने किसानों का साथ नहीं दिया तो भारी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहें..!

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हो सकता है की सरकार के इन नए कानूनों से किसानो को अपनी फसल बेचने मे फायदा हो! उसकी आय में वृद्धि हो! लेकिन जब देश का पूरा अनाज, सब्जियां और फल उद्योगपतियों और कार्पोरेट के बड़े बड़े गोदामों में चला जाएगा! तो क्या स्तिथि होगी!?

क्या भारत की आम जनता 100 रुपए किलो आटा, 200 से 300 रुपए किलो दाल, 200 रुपए किलो तेल, 200 से लेकर 500 रुपए किलों चावल के अलावा 100 रुपए किलों आलू, 150 रुपए किलो प्याज, 300 से लेकर 500 रुपए किलो लहसुन, 100 रुपए किलो टमाटर, के अलावा अन्य सब्जियां और फल भी इसी भाव में खरीदने की क्षमता रखती है!*क्योंकि अनुभव बताते हैं कि जब भी इस देश में उद्योगपतियों और कार्पोरेट के पास कोई बुनियादी सिस्टम जो सरकार की जिम्मेदारी थी दिया गया फिर चाहे वह बिजली, पेट्रोल, डीजल, गैस हो या शिक्षा, स्वास्थ्य या मकान हो आम भारतीय की दुर्दशा हो गई उसकी कीमत चुकाने मे!मोदी सरकार किसानो की भलाई और उनकी आय बढ़ाने के नाम पर जो नए क्रषी कानून के जरिए उद्योगपतियों और कार्पोरेट लाबी को देश के किसानो द्वारा खेत में पैदा किए जाने वाले अनाज, सब्जियों और फलों की खुले बाज़ारों मे खरीद फरोख्त करने की कानूनन छूट देने जा रही हैं! वही दूसरी तरफ आवश्यक वस्तु अधिनियम कानून मे बदलाव कर आलू, प्याज से लेकर तकरीबन सभी क्रषी उत्पादों के स्टॉक करने की लिमिट को हटा दिया गया है! अब कोई भी बड़ा निवेशक, उद्योगपति या कार्पोरेट कंपनी कितना भी अनाज, आलू, प्याज, लहसुन, तिलहन, गेहूँ, दाल, चावल,… आदि किसी भी सीमा तक स्टॉक कर सकता है!ये बहुत आश्चर्य की बात है कि हम किसानो के आन्दोलन और उनकी माँगों से अपने आपको कैसे अलग कर सकते हैं! किसानो की तो हक की लड़ाई है लेकिन देश की जनता के लिए तो ये पेट और भूख की लड़ाई है!?आम आदमी को आटा, दाल, चावल, तेल, आलू, प्याज, लहसुन, टमाटर और सब्जियां क्या भाव मिलेगी इसके रेट सरकार तय करे! कम से कम इसके लिए तो बाहर आना ही होगा

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