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भारत में महिला होने के मायने:किसी तरह जन्म ले लेंगी तो पढ़ना मुश्किल, पढ़ लेंगी तो पुरुषों सी सैलरी नहीं मिलेगी

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दशकों से पुरुषों से बराबरी की जंग लड़ रहीं महिलाओं के लिए आज बेहद खास दिन है। आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। करीब 45 बरस पुराने इस दिन को भारत में भी तरह-तरह से मनाया जा रहा है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर अपने देश में आदमी और औरत के बीच खाई गहरी कितनी है? दूसरे शब्दों में कहें तो भारत में स्त्री होने के मायने क्या हैं? यानी ऐसे कौन से मौके हैं जो किसी फीमेल यानी महिला को सिर्फ इसलिए नहीं मिलते है क्योंकि वह मेल यानी पुरुष नहीं।

जून 2020 में जारी यूनाइटेड नेशन्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 50 सालों में भारत से 4.6 करोड़ से ज्यादा लड़कियां मिसिंग हैं। यहां मिसिंग के मायने उन फीमेल्स से है जिन्हें जन्म से पहले लिंग की पहचान होने या जन्म के बाद लड़की होने की वजह से जीने नहीं दिया गया।

वहीं, केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय का कहना है कि नौवीं क्लास में पहुंचने तक 30% लड़कियों को स्कूल छोड़ना पड़ता है। क्लास 11 आते-आते ड्रॉपआउट्स का यह आंकड़ा बढ़कर 57% हो जाता है।

तो आइए आंकड़ों की मदद से जानते हैं कि अपने देश में कन्या भ्रूण, बच्ची, लड़की और महिला होने के मायने क्या हैं?

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