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जो मन में आएगा वही करते जाओगे,तो यही हाल होना है

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विश्व_देव_शास्त्री

विदेशी विनियमन रोकोगे,ऑर्गेनिक फार्मिंग को बिना प्लान के करोगे,जो मन में आएगा वही करते जाओगे,
तो यही हाल होना है।
श्रीलंका की लंका लग चुकी है, इकॉनमी ध्वस्त हो चुकी है, भूख से जनता बेहाल है, शरणार्थी बमुश्किल भारत आ रहे हैं। सबका एकमात्र कारण है बिना कोई रणनीतिक सोच के राष्ट्रवाद को जनता पर थोपना। राष्ट्रवाद के नाम पर जो आपने जनता पर थोपा उसका नतीजा देखिए क्या हो रहा है।
● ऑर्गेनिक फार्मिंग बुरा नहीं है, लेकिन तुरंत थोप देना सबसे बुरा है। वर्षों से चली आ रही केमिकल युक्त खेती को एक दम से बैन करके आप ऑर्गेनिक खेती करोगे तो फसलों को ही नुकसान होना है और आपकी ज़मीन को भी। एक दम से कोई नशेड़ी दारू छोड़ दे तो उसका लिवर कल खराब होता आज हो जाए, फिर तो यह खेती है। अन्य देशों ने भी ऑर्गेनिक फार्मिंग की तरफ कदम बढ़ाए लेकिन आपने उनसे सीख लेने की बजाय हिटलर तरीका आज़माया। हमारे देश के छोटे से राज्य सिक्किम ने ही 2004 से टुकड़ों में ऑर्गेनिक खेती की शुरुआत की तो 2015 में जाकर यूरिया मुक्त प्रदेश बन गया। आपकी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खेती पर निर्भर है जिसे आपकी हिटलरशाही ने बर्बाद कर दिया। रही सही कसर कोरोना काल में पर्यटन बाधित हो जाने से भी बिगड़ गई।
● विदेशी विनियमन को न के बराबर कर दिया जिससे विदेशों से रुपया आना मुश्किल हो रहा है और घर में उत्पादन ठप पड़ा है। नतीजतन हर ज़रूरी चीज़ महंगी हुई जा रही है।
● राजपक्षे बन्धु पूरे सरकारी तन्त्र में काबिज़ हो गए। छोटे भाई गोतब्या राजपक्षे राष्ट्रपति, बड़े भाई महिंद्रा राजपक्षे प्रधानमंत्री और परिवार के अन्य 4 सदस्य मंत्रिमंडल में बैठकर कुल 6 राजपक्षे मिलकर सरकार चला रहे थे। पूरे देश को बपौती समझ रखा था। पूरे राज को पक्ष में कर रखा था। अभी भी सभी मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है लेकिन दोनों भाइयों ने इस्तीफा नहीं दिया।
● मनमानी करके पीछे हटना भी नहीं चाह रहे यहीं आपकी दिक्कत का सबब है।
अब भारत की बात। भारत में जो हमको डराया जा रहा है कि श्रीलंका से भी ज़्यादा हालत खराब हो सकते हैं वह सरकार का ही प्रोपेगैंडा दिख रहा है अपनी नाकामियों का ठीकरा कोरोना या अन्य किसी कारण पर फोड़ने का। राज्यों पर फोड़ने की शुरुआत भी हो गई है। अभी हाल फिलहाल श्रीलंका जैसी स्थिति तो आने से रही। भारत को वर्षों से इतना मज़बूत बनाया गया है कि हम अपनी आपूर्ति अन्य साधनों से भी कर सकते हैं। भारत फिलहाल खतरे से बाहर है। पेट्रोल डीज़ल आदि की महंगाई तो चुनाव दौरान भाव न बढ़ाने की मजबूरी करा रही है जो एक माह के भीतर ये लोग कंट्रोल कर भी सकते हैं। गुजरात चुनाव आते आते शायद सस्ता भी कर दें। काहे से कि कच्चे तेल का भाव निरन्तर गिर रहा है और इधर भाव अभी भी बढ़ रहे हैं। सरकार के दावों की पोल खुद सरकार ही खोल रही है कि भाव को बढ़ने से वे कंट्रोल नहीं कर सकते। चुनाव के समय कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर भी यहाँ पेट्रोलियम का दाम कंट्रोल रहना, कच्चा तेल अभी घटने के समय भी बढ़ना साफ दिखाता है कि सब सरकार के हाथ में है। UPA सरकार के समयानुसार टैक्स वसूलने पर 80 से 85 का पेट्रोल आराम से बिक सकता है लेकिन सरकार वह नहीं करेगी जब तक चुनाव नहीं आ जाते।
आप चिन्ता न करें आपने शेर पाला हुआ है जैसे उन्होंने झण्डे पर पाला हुआ है। अपने शेर की हालत भी लगभग इस शेर के जैसी ही है लेकिन देश की हालत श्रीलंका जैसी हो जाए फ़िलहाल के लिए सम्भव नहीं है।
#विश्वराज#विश्व_देव_शास्त्री

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