-निर्मल कुमार शर्मा,
दैनिक भास्कर और इंडिया टीवी पर छापेमारी कराना मोदी सरकार की बुजदिली और नपुंसकता तथा फॉसिस्ट मनोवृत्ति का परिचायक है,क्योंकि तानाशाह हमेशा डरा रहता है,उसका मन,मस्तिष्क और दिल इस बात से हमेशा सशंकित और डरा तथा बेहद भयभीत रहता है कि उसके किए कुकृत्यों और दमन से समाज के सजग,चैतन्य व अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक वर्ग यथा देश के किसानों,मजदूरों, विद्यार्थियों व अन्य सजग लोगों यथा प्रोफेसरों, डॉक्टरों,वकीलों,इंजीनियरों,लेखकों तथा समाज के अन्य प्रबुद्ध लोगों आदि के द्वारा कहीं वैचारिक, शारीरिक तथा संगठित व सशक्त विरोध की सुगबुगाहट तो नहीं हो रही है ! इसलिए वह अपने अधीन लोकतंत्रात्मक व्यवस्था में किसी अन्य उद्देश्य से बनाई गई संस्थाओं यथा इनकमटैक्स डिपार्टमेंट,प्रवर्तन निदेशालय या सीबीआई आदि को अपने विरोध करने वाले लोगों,प्रकाशन संस्थानों,समाचार पत्रों,टेलीविजन समाचार चैनलों या राजनैतिक दलों के कर्ता-धर्ताओं के खिलाफ प्रयोग करता है !
आज भारत में छद्म लोकतांत्रिक व्यवस्था के खोल में बैठा यहाँ के कथित प्रधानसेवक के सारे कुकृत्य इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी में किए गये जुल्मों को काफी पीछे छोड़ चुका है ! अब तो उसकी तुलना जर्मनी के बदनाम व कुख्यात तानाशाह एडोल्फ हिटलर,जिसका शासन काल 1933 से 1945 तक रहा,के पदचिन्हों पर अनुगमन करता हुआ प्रतीत होता है। अभी पिछले दिनों बर्लिन में हिटलर के दौर की नृशंसता और कुकृत्यों पर आधारित एक प्रदर्शनी लगी थी। उस समय के कुछ पुराने अभिलेखों के अनुसार कुछ दृष्टांत निम्नवत हैं,एक बैंक कर्मचारी,जिसने बड़े पदों पर बैठे नाजी लोगों का मजाक उड़ाया था,एक संगीतकार जिसने हिटलर पर तंज कसने वाले गानों को कंपोज किया था, एक खदान कर्मी जिसने पुलिस वालों को कम्युनिस्ट विचारधारा के पर्चे बांटे थे,एक 22 साल के स्विस धर्मप्रचारक को बिना टिकट यात्रा करने के जुर्म में गिरफ्तार करके उससे हिटलर को मारने का जुर्म कबूल करा दिया गया । इन सभी लोगों को नाजियों द्वारा गठित कथित जनता की अदालत ने देशद्रोह का मुकदमा चलाकर तुरंत फटाफट फाँसी पर लटका दिया !_*
*_भारत के वर्तमान काल के सत्ताधारियों का भी एकमात्र उद्देश्य यही है कि अपनी भांड़ मिडिया के बल पर लोकतंत्र की बात करने वालों, गरीबी,बेरोजगारी,मंहगाई,भ्रष्टाचार,शिक्षा और अस्पतालों की दुर्व्यवस्था आदि समस्याओं के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों,किसानों,आम आदमी,दिहाड़ी मजदूरों,दलितों के हित की बात करने वालों के प्रति नफ़रत पैदा कराना,डरा देना, बदनाम कर देना,जैसे भी हो जातीय और धार्मिक ध्रुवीकरण कराना,मानवाधिकारों की बात करने वालों को सीधे अर्बन नक्सलाइट और माओवादी घोषित कर देना बायें हाथ का खेल हो गया है ।_*
*_आज सामाजिक कार्यकर्ता एस. वंचिनाथन, आदिवासियों ,दलितों और सियासी कैदियों की मदद करने वाले सहृदय और सज्जनता के प्रतीक वकील सुरेन्द्र गाडगिल, हैदराबाद के मानवाधिकार कार्यकर्ता चिक्कुडू प्रभाकर जैसे सज्जन व्यक्ति को निरर्थक आरोप लगाकर छः महिने छत्तीसगढ़ के सुकमा जेल में बंद कर दिया गया,इसी क्रम में भीमाकोरेगांव उपद्रव में अलग -अलग शहरों से ये सरकार,जो खुद 33 प्रतिशत दागी सांसदों से संपन्न है,16 सामाजिक कार्यकर्ताओं,मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले,आदिवासियों,किसानों,मजदूरों की जायज हकों के लिए लड़ने वाले,अंधे बच्चों को पढ़ने में मदद करने वाले,जनवाद पर मार्मिक कविता लिखने वाले कवियों को गिरफ्तार करके उन्हें जबर्दस्ती आतंकवादी,अर्बन नक्सली और माओवादी घोषित करने के प्रयास में विफल रहने पर,मोदी की हत्या करने का कथित षड़यंत्र रचने का घृणित आरोप लगा दिया गया,जबकि ये सारे लोग खुद सत्तारूढ़ दल के नेताओं के चरित्र से हजार गुना पवित्र लोग हैं । उन सभी को भीषण मानसिक व शारीरिक यंत्रणा देकर मारने को अभिशापित किया जा रहा है !_*
*_यक्षप्रश्न है कि आखिर गुजरात नरसंहार के दोषियों, पुलवामा काँड के अपराधियों,दिल्ली दंगों के सूत्रधारों,मध्यप्रदेश के व्यापम घोटाले में संलिप्त हजारों करोड़ के घोटालेबाजों व पचासों लोगों के हत्यारों,सीबीआई जज बृजमोहन लोया के संदिग्ध हत्यारों आदि के खिलाफ सीबीआई,कोर्ट और अन्य दंडित करने वाली संस्थाएं मौन क्यों हैं ? क्या कारण है कि वर्तमानसमय की सरकार के कुकृत्यों से जो पर्दा हटाता है,उसी पर इनकमटैक्स,प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई के सरकारी बुलडागों को छोड़ दिया जाता है। मोदी ऐंड कंपनी सरकार की भी आनेवाले कुछ ही दिनों में शीघ्र ही एक न एक दिन पतन होगी,तब इस दौर को भी जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर, इटली का नाजी डिक्टेटर बेनिटो मुसोलिनी के समकक्ष ही रखा जाएगा और लोकतंत्र के इन कलंकों और रामनामी चद्दर के छद्म आवरण में छिपे तथा सफेद दाढ़ी बढ़ाए इन तेज दाँतों और नाखूनों वाले हिंसक भेड़ियों को इतिहास के एक सीलन व बदबूदार कोने में दफ़न कर दिया जाएगा,जहाँ लोग इन अमानवीय,असहिष्णु,क्रूर,हिंसक, दयाविहीन,हृदयविहीन भेड़ियों के कुकृत्यों को याद करके हिकारत से उधर केवल लोग थूक देंगे ! इन हिंसक भेड़ियों के लिए केवल और केवल यही लिखा जा सकता है,सोचा जा सकता है और भविष्यवाणी की जा सकती है ! ये भेड़िए दया,सहृदयता और सहानुभूति के कतई पात्र नहीं हैं।_*
*_-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद, उप्र,संपर्क -9910629632,ईमेल-nirmalkumarsharma3@gmail.com_*

