अग्नि आलोक

दूर्वा (दूब) घास का महत्व

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 पुष्पा गुप्ता

     _पौराणिक मिथक के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब देवतागण अमृतकलश को लेकर जा रहे थे तो, उस अमृतकलश से छलक कर अमृत की कुछ बूंदें पृथ्वी के दूर्वा घास पर गिर गयी. दूर्वा घास अमर हो गई और अमृतदायी बन गयी._

  *भगवान कृष्ण गीता ( 9-26 ) में कहते हैं :*

      जो भी भक्ति के साथ मेरे पास में दूर्वा की एक पत्ती , एक फूल , एक फल या पानी के साथ मेरी पूजा करता है मैं उसे दिल से स्वीकार करता हूँ.

दूर्वा एक घास है. जो आमतौर पर भारत में हर जगह उपलब्ध है. यह बारहमासी घास है और, तेजी से बढ़ती  है. यह गहरे हरे रंग की होती है और  इसके नोड में जड़ें होती है जो उलझे हुए गुच्छों के रूप में होती हैं.

       _इस घास को पूरी तरह उखाड़ लेने के बाद भी यह वापस जल्द ही उग आती है.  इस तरह इसका बार-बार अंकुरित होना जीवन के उत्थान का एक शक्तिशाली प्रतीक है जो नवीकरण, पुनर्जन्म और प्रजनन क्षमता को परिलक्षित करता है._

      वैदिक काल से ही गणेश और विश्व पालक नारायण की पूजा में दूर्वा घास को आवश्यक रूप से इस्तेमाल किया जाता है.

*दूर्वा घास का औषधीय गुण :*

          दूर्वा घास या बरमूडा घास ( वानस्पतिक नाम Cynodan dactylon ) में  कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. आधुनिक शोधों से यह स्थापित हो चूका है  कि दूर्वा  घास का रस अपने आप में ही कई बीमारियों के लिए एक शानदार उपाय के तौर पर  भारत में प्रयोग किया जाता है.

     _दूर्वा घास में गेहूँ के जवारे से भी जयादा क्रूड प्रोटीन , फाइबर , कैल्शियम , फास्फोरस और पोटाश मौजूद होता है._

      दूर्वा  घास क्षारीय होता है और, अगर हमारा भोजन अधिक अम्लीय है तो ये दूर्वा घास अपने क्षारीय गुण के कारण हमारे शरीर में अम्ल की तीव्रता को कम कर हमारे शरीर को ख़राब होने से बचाता है.

दूर्वा घास हमारे तंत्रिका तंत्र के लिए एक बहुत अच्छा टॉनिक है यह सभी उम्र के लिए उपयुक्त है.

      _असहज महसूस करने से बचने के लिए प्रारंभिक चरण में इसके रस का सेवन क़म मात्रा (आधे से एक कप) में किया जा सकता है._

   दूर्वा घास  हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को भी निकालता है.

     कब्ज, बहुत सारी बीमारियों  की जननी है.इस में दूर्वा घास का रस अमृत के समान है। दूर्वा घास हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को दूर कर हमारी रक्त प्रणाली शुद्ध कर देती है.

       औषधीय गुणों के कारण दूर्वा घास को पूजा-पाठ के माध्यम से  पूजनीय एवं हमारे जीवन का अभिन्न अंग बना दिया गया है।

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