Site icon अग्नि आलोक

वर्तमान समय में हिंदू और मुसलमानों के अहम काम

Share

मुनेश त्यागी 

    आज भाजपा, r.s.s. और उसके तमाम 84 से अधिक संगठन हमारे देश के मुसलमानों को, भारत का सबसे बड़ा दुश्मन ठहराने की कोशिश कर रहे हैं। इस काम को वर्तमान केंद्र सरकार की नीतियां और मीडिया भी बखूबी अंजाम देने में जुटी हुई हैं। बल्कि कट्टरपंथी और सांप्रदायिक मुसलमान ताकतें भी चोरी छिपे इस काम में उनकी मदद कर रहे हैं और इन सब ने मिलकर मुसलमानों के खिलाफ, इस देश की जनता के दिलों दिमाग में विष घोल दिया है, उनके खिलाफ हिंसा और नफरत का माहौल तैयार कर दिया है, उनका जीना मुहाल कर दिया है।

     अब यहां पर सबसे अहम सवाल खड़ा हो जाता है कि ऐसे विषाक्त माहौल में इस देश की मुसलमान जनता क्या करें? यहां पर हमारा कहना है कि इस देश की मुसलमान जनता, बुद्धिजीवियों, लेखकों, शायरों, पत्रकारों, मीडिया कर्मीयों, वकीलों, जजों, शिक्षकों आदि सब मिलकर भारत के संविधान में पूर्ण विश्वास प्रकट कर बताएं कि वे सब जनतंत्र, संप्रभुता, धर्मनिरपेक्षता, गणतंत्र, समाजवाद, समता, समानता, स्वतंत्रता, आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द में पूर्ण विश्वास करते हैं

     और एक ऐसे भारत के निर्माण में विश्वास करते हैं कि जहां सब को आधुनिक और मुफ्त शिक्षा मिले, सब को रोजगार मिले, सब को मुफ्त इलाज मिले, सबको रोटी कपड़ा मकान और बुढ़ापे की सुरक्षा मिले। जहां से भूख, गरीबी, शोषण, अन्याय, जुल्म ओ सितम, हिंसा, जातिवाद, भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता, महंगाई, हिंसा और अपराध का हमेशा हमेशा के लिए नामोनिशान मिट जाएं।

     उनका दूसरा सबसे महत्वपूर्ण यह है कि वे सब मिलकर इस देश के सभी प्रगतिशील, जनवादी, धर्मनिरपेक्षतावादी और वामपंथी लोगों, संगठनों व पार्टियों के साथ मिलकर, इस देश की तमाम जनता के सर्वांगीण विकास और प्रगति की बात करें। उन ताकतों के किसान मजदूर और जनता के जनपक्षीय कार्यक्रम और संघर्ष में शामिल होकर अपनी एकता जाहिर करें।

     फिर तीसरा सबसे महत्वपूर्ण काम यह है कि ये दोनों हिंदू और मुस्लिम एकजुट होकर इस देश की जनता को बताएं और अवगत कराएं कि हिंदू और हिंदुत्ववादी ताकतों में जमीन आसमान का फर्क है, ये दोनों एक नहीं है, बल्कि इनकी मान्यताएं, नीतियां, सोच और मानसिकता अलग-अलग हैं। हिंदू धर्म के लोग इस देश की पूरी जनता का कल्याण और विकास चाहते हैं। उनका भारतीय संविधान में पूर्ण विश्वास है। वे सब समता, समानता, स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता, जनतंत्र, गणतंत्र और समाजवादी नीतियों में विश्वास करते हैं, सारी जनता के बीच भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द कायम करना चाहते हैं। वे सब शोषण, अन्याय, जुल्म ओ सितम, गरीबी और भूखमरी का खात्मा चाहते हैं, सबको रोटी कपड़ा मकान शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और बुढ़ापे की पेंशन मोहिया कराना चाहते हैं।

   इसी के साथ-साथ हिंदू और मुसलमानों को एकजुट होकर भारत की हिंदुत्ववादी और मुस्लिम सांप्रदायिक ताकतों की सांप्रदायिक सोच, मानसिकता और नीतियों के बारे में बताना होगा। उन्हें जनता को बताना होगा कि इन दोनों साम्प्रदायिक ताकतों का भारत की जंगे आजादी में कोई रोल नहीं था। ये दोनों ताकतें भारतीय जनता की एकता को तोड़ने में लगी हुई थीं और उसे हिंदू और मुसलमान बना कर और बता कर आपस में बांट रही थीं और अंग्रेजों की “बांटो और राज करो” की नीति में पूर्ण सहयोग कर रहे थे।

    हिंदूओं और मुसलमानों दोनों को जनता को बताना होगा कि हिंदुत्व का पैरोकार वी डी सावरकर 1911 के बाद से ही, अंग्रेजों से लगातार माफी मांग रहा था और अपने द्वारा लिखे गए निबंध “हिंदुत्व” में स्थापित कर रहा था कि “यहां दो राष्ट्र हैं एक हिंदू और एक मुसलमान, यह दोनों एक साथ नहीं रह सकते” यही काम आर एस एस 1925 से और हिंदू महासभा 1906 से कर रहे हैं। भारत की स्वतंत्रता आंदोलन से ये दोनों अलग अलग थे  और यह आज तक भी वही काम कर रहे हैं।

    कल ये साम्प्रदायिक ताकतें साम्राज्यवादी लुटेरों अंग्रेजों के साथ थीं और आज ये दोनों साम्प्रदायिक ताकतें, देश और दुनिया भर की पूंजीवादी, पैसे वालों, धन्नासेठों, साम्राज्यवादी लुटेरी ताकतों के साथ हैं और भारत में उन्हें पाल पोस रहे हैं और उनके जनविरोधी मुनाफा खोर साम्राज्य को बढ़ा रहे हैं इस देश की जनता की संपत्ति से बनाई गई सार्वजनिक संपत्ति को बेच कर चंद्र पति पति लुटेरों को मालामाल कर रही हैं और इनका देश की जनता किसानों मजदूरों की भलाई के कामों से कोई लेना देना नहीं है।

     दूसरी ओर जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग जंगे आजादी की लड़ाई में शरीक नहीं थी और मोहम्मद अली जिन्ना दो राष्ट्रों की मांग का अनुसरण करके पाकिस्तान की मांग कर रहा था और अंततः अंग्रेजों ने इन दोनों की बात मानकर और उनके इशारे पर भारत के टुकड़े टुकड़े कर दिए। इन ताकतों का भी जनतंत्र गणतंत्र धर्मनिरपेक्षता समाजवाद और जनता की आजादी में विश्वास नहीं है ये भी सांप्रदायिक जातिवादी और लुटेरी साम्राज्यवादी ताकतों की पुजारी हैं।

     यहीं पर हम धर्मनिरपेक्ष और वामपंथी हिंदू मुस्लिम के गठजोड़ को जनता को बताना पड़ेगा की इन सांप्रदायिक ताकतों के पास, भारत की जनता किसानों मजदूरों नौजवानों के कल्याण की कोई योजना नहीं है, उनकी रोजी-रोटी शिक्षा स्वास्थ्य सुरक्षा की समस्याओं को दूर करने की उनकी कोई योजना नहीं है और उनको बताना पड़ेगा कि भारत की जनता की बुनियादी समस्याओं को केवल और केवल किसानों और मजदूरों का राज और सरकार और समाजवादी विचारधारा पर बनी सरकार ही उनकी समस्याओं का हल कर सकती है इसे हमें बड़े पैमाने पर जनता के बीच किसान और मजदूरों के बीच ले जाना होगा।

        इसी के साथ-साथ दूसरा काम हमें यह करना है कि हमें जनता को बताना पड़ेगा कि हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक ताकतें जब भारत का  संविधान बन रहा था, तब ये हिंदुत्ववादी ताकतें भारत के संविधान का विरोध कर रही थी और प्रचार प्रसार कर रही थी कि भारत में पहले से ही संविधान मौजूद है हमें दूसरा संविधान बनाने की जरूरत नहीं है और वह संविधान है “मनुस्मृति” इस प्रकार ये ताकतें हमारे समाज में  वर्णवादी व्यवस्था कायम रखना चाहती हैं जिसमें ब्राह्मण क्षत्रियों वैश्यों का राज होगा और शूद्रों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं को पढ़ने लिखने का धन रखने का और शास्त्र और शस्त्र रखने का कोई अधिकार नहीं होगा, उनकी रोजी-रोटी का कोई इंतजाम नहीं होगा। बस उनका काम होगा उपरोक्त तीनों वर्णों की सेवा करना, उनकी गुलामी करना, उनकी दासता करना। हमें यह बात भी जनता के बीच बड़े विस्तार के साथ बतानी होगी उसे अवगत कराना होगा कि ये हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक ताकतें, भारत की जनता का कल्याण और भलाई नहीं चाहतीं।

    हम सभी जनवादी धर्मनिरपेक्ष और वामपंथी किसानों मजदूरों नौजवानों को मिलजुल कर एक काम करना और होगा और वह यह कि वर्तमान मीडिया, गोदी मीडिया हो गया है। इसके मालिक पूंजीपति है। वह किसानों मजदूरों के हित में कुछ भी बताने को तैयार नहीं है और सारी ज्ञान विज्ञान की बातें हमसे छुपा रहे हैं और लगातार अफवाह फैला रहे हैं, झूठ फैला रहे हैं। अतः उनका मुकाबला करने के लिए हम लोगों को एक वैकल्पिक मीडिया तैयार करना होगा और इसका प्रचार-प्रसार सारी इंडिया में करना होगा ताकि किसानों मजदूरों नौजवानों और पूरी जनता को हम अपनी बात बता सके, अपना पूरा कार्यक्रम उनके सामने रख सकें।

     हिंदू मुस्लिम दोनों को मिलकर भारत की साझी संस्कृति और गंगा जमुनी तहजीब से भी जनता को वाकिफ कराना होगा और हिंदुत्ववादी देशद्रोही तत्वों का मुंहतोड़ जवाब देना होगा। भारत की साझी संस्कृति हिंदू मुस्लिम हीरे मोतियों से भरी पड़ी है। यहां हिंदू और मुसलमानों ने दोनों ने मिलकर शासन किया है और जनता का कल्याण किया है। देश की आजादी में अपने प्राण न्यौछावर किए हैं और देश को आजाद कराने में हिंदू और मुसलमान हाथ से हाथ मिला कर लड़े हैं और अपने प्राणों की आहुति दी है। भारत के इन नायक नायिकाओं से भारत की जनता को अवगत कराना पड़ेगा। इनकी जानकारी देनी पड़ेगी, तभी इन साम्राज्यवादी ताकतों को और सांप्रदायिक ताकतों को हराया  और परास्त किया जा सकता है और भारत के संविधान की, जनता की और मुसलमानों की हिफाजत की जा सकती है।

Exit mobile version