मै शायरी सुन रहा था।
प्रख्यात शायर वसीम बरेवली का यह शेर मुझे बहुत पसंद आया
आसमाँ इतनी बुलंदी पे जो इतराता है
भूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता है
इस शेर के माध्यम से शायर घमंड करने वालों पर कटाक्ष करता है।
मराठी भाषा में इसी आशय की एक कहावत है,आकाश ठेंगणे होणे इसका मतलब अत्यधिक गर्व करना। शब्दशः अर्थ अत्यधिक गर्व करने वाले को लगता है कि आकाश भी उसके लिए नाटा हो गया है।
ऐसे व्यक्ति के लिए शायर सागर आजमी का यह शेर सटीक है।
शोहरत की फ़ज़ाओं में इतना उड़े ‘सागर”
परवाज़ न खो जाए ऊँची उड़ानों में
जब किसी व्यक्ति को उसकी योग्यता से अधिक और महज़ सयोंग से शोहरत मिल जाती है, तो ऐसे व्यक्ति को शोहरत का नशा चढ़ने लगता है।
ऐसे लोगों के लिए,किसी शायर ने खूब कहा है।
बहुत मग़रूर कर देता है शोहरत का नशा
अक्सर, फिसलते देखे हैं,
हमने कई किरदार चुटकियों में
किसी व्यक्ति को बगैर योग्यता के शोहरत मिल जाती है। ऐसे व्यक्ति के लिए शायर फ़ारूक़ इंजीनियर का यह शेर है।
उम्र कितनी भी हो मगर
शोहरत बाज आती कहाँ नख़रे से
नख़रे करना मतलब सच्चाई को छिपाना होता है। नखरा का शाब्दिक अर्थ होते है,विलास-चेष्टा अर्थात चोचले करना, या बनावटी आवरण ओढ़ना।
सच और झूठ की पहचान इस तरह हो सकती है।
यहाँ झूठों को तमगे बांटे जातें हैं
मै सच्चा हूँ तो मुझे परखा जाता है,
जो सच्चा होगा उसे कितनी शोहरत क्यों न मिल जाए वह तो यही कहेगा। जो शायर बशीर बद्रजी इस शेर में फ़रमाते हैं।
ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे
कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे
बात कहाँ से निकलती है और दूर तक जाती है।
इशारों को अगर समझों
राज को राज रहने दो
राज खुलने का तुम पहले
अंजाम सोच लो
कल बहुत से लोगों ने विश्व हास्य दिवस मनाया। सडकों पर आकर समूह के साथ जोर जोर से हँसने की औपचारिकता पूर्ण की।
एक बात तो है कि जीवन में हँसना भी जरूरी है।
मूलभूत समस्याओं को नजरअंदाज करने के लिए हँसना ही एक मात्र हल है।
मराठी भाषा में एक कहावत है।
गाँव हँसल तर वेड ही हँसल। मतलब गाँव हँस दिया तो पागल भी हँस दिया।
शशिकांत गुप्ते इंदौर

