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मणिपुर में हिंसा :संगठनों ने विरोध में इंदौर में बनाई मानव श्रंखला, रीगल तिराहे पर किया प्रदर्शन

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शफी शेख. इंदौर

मणिपुर में दो बेटियों को नग्न घुमाने और उनके साथ बलात्कार करके सामूहिक बलात्कार करके मार डालने की घटना के खिलाफ इंदौर के जागरूक लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया । महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने रीगल चौराहे पर 4:00 बजे शुरू हए विरोध प्रदर्शन ने धीरे-धीरे एक बड़ा रूप ले लिया।पहले लगभग 20 22 लोग इस प्रदर्शन में शामिल हुए फिर धीरे-धीरे 10-10 ,20-20 के जत्थों में महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग, बेटियां सब इसमें शामिल होते गए।

इत्तेफाक की बात है कि जहां प्रदर्शन हो रहा था वही केवल 100 मीटर की दूरी पर दो बड़े बड़े फोल्डिंग से लगे हुए थे जिसमें माननीय प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री जी के आदम कद फोटो के साथ साथ, बहना सम्मान का विज्ञापन था । विरोध प्रदर्शन लगभग 1 घंटे तक चला और जोश खरोश के साथ खूब नारेबाजी भी ।

अचरज की बात है इस विरोध प्रदर्शन की जगह लगभग 1 घंटे तक पानी बिल्कुल नहीं गिरा, जबकि वहां से बमुश्किल 600 मीटर की दूरी पर मधुमिलन चौराहे सपना संगीता रोड तक तरबतर ऐसा लग रहा था मानो ईश्वर भी चाहता है कि उन महिलाओं और बच्चियों के दर्द में शामिल हो उनके परिवार उनके परिजनों के दर्द में शामिल हो जिन्होंने यह दुख झेला है।

मणिपुर में दो समुदायों के बीच में हों रहीं हिंसा के विरोध में शहर के अनेक संगठनों ने मिलकर रीगल तिराहे पर प्रदर्शन किया जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी सम्मिलित हुईं। मणिपुर में रोज मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाओं के समाचार मिल रहे हैं। इसे लेकर भारत के कोने-कोने में मणिपुर में शांति बहाली के लिए प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

इंदौर के नागरिक भी मणिपुर में घृणा, वैमनस्यता, दुश्मनी और हिंसा को ख़त्म कर प्यार, अमन और शांति बहाली के लिए अपनी आवाज़ वहां तक पहुंचाना चाहते हैं। इसके लिए 25 जुलाई की शाम रीगल चौराहे पर भारतीय महिला फेडरेशन, म प्र धरेलू कामकाजी महिला यूनियन, प्रगतिशील लेखक संघ एवं भारतीय जन नाट्य संघ,वामपंथी समाजवादी दलों से जुड़े कार्यकर्ताओं आदि संगठनों द्वारा सामूहिक रूप से प्रदर्शन कर मणिपुर सरकार को बर्खास्त करने की मांग की।

गलत है हिंसा का तांडव

विनीत तिवारी ने कहा कि मणिपुर में जो हो रहा है, चाहे वो महिलाओं के साथ हो, बच्चों के साथ हो, बुजुर्गों के साथ या निरपराध नौजवानों के साथ, ये हिंसा का तांडव गलत है। वहां की सरकार हिंसा को रोकने में पूरी तरह से असफल हो चुकी है। मणिपुर की घटनाएं देश को कलंकित कर रही हैं, वहां तत्काल अमन कायम होना चाहिए।

प्रदर्शन में कई संगठन हुए शामिल

प्रदर्शन में इंटक के श्याम सुंदर यादव, सोशलिस्ट पार्टी के रामस्वरूप मंत्री, घरेलू कामकाजी महिला यूनियन की सिस्टर शिवानी, राम बाबू अग्रवाल, रूपांकन वाचनालय से अशोक दुबे, बैंक आफिसर्स यूनियन के अरविंद पोरवाल, विजय दलाल, अजय लागू, मुश्ताक अली बड़नगर वाला, एनी पवार, सिस्टर रोशनी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के रुद्रपाल यादव, ओम प्रकाश खटके, अमूल्य निधि, शबाना पारेख, चुन्नीलाल वाधवानी जीवन मंडलेचा, शशिकांत गुप्ते आदि उपस्थित थे।

महिलाओं ने तख्तियों पर नारे लिखकर किया प्रदर्शन।

सभी धर्म और समाज की महिलाओं ने जताया विरोध।

तख्तियों पर लिखे नारे।

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