मुनेश त्यागी
इस अंधकार के मौसम में
हम चंदा तारे दिनमान बनें ,
यह मारकाट के आलम में
हम होली और रमजान बनें ।
,,,,,,,,,इस अंधकार के मौसम में ,
वैज्ञानिक सोच में वृद्धि हो
धनिया सुखिया की बात चलें,
बेटी बहुओं को मान मिले
और मातृ पितृ सम्मान बढे।
,,,,,,,इस अंधकार के मौसम में,
हिंदू मुसलमां साथ चलें
और भाई चारे की बात बने ,
जनता का खून जो पीते हैं
हम ऐसे ना धनवान बनें।
,,,,,,,,,, इस अंधकार के मौसम में,
हिंसा के पुजारी ठहरे वो
हम अमन के पहरेदार बनें,
रोजी रोटी और शिक्षा की
गारंटी का संविधान बने।
,,,,,,,,,,इस अंधकार के मौसम में ,
उस माहौल की बात करें
जहां मेलजोल की राह बने ,
जन-मुक्ति के सपने देखें
हम क्रांति का नवगान बनें।
,,,,,,,,,,इस अंधकार के मौसम में,
इस अंधकार के मौसम में
हम चंदा तारे दिनमान बनें,
यह मारकाट के आलम में
हम होली और रमजान बनें।

