मुनेश त्यागी
नो साल पहले जब मोदी ने “सबका साथ सबका विकास” का नारा दिया था तो जनता उसकी मुरीद हो गई थी और उसे झोलियां भर भर के वोट दी थी। उसको पूर्ण बहुमत से सरकार में बिठाया। हर हर मोदी, घर घर मोदी के नारे जनता में गूंजने लगे। सबका साथ सबका विकास के नारे में जनता ने विश्वास किया और पूरी जनता ने अपना मुस्तकबिल सुधारने और संवारने के लिए, मोदी को सत्ता सौंप दी थी।
वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी ने उस वक्त कहा था कि आने वाले समय में सबको रोटी रोजी शिक्षा मिलेगी, भ्रष्टाचार का खात्मा होगा, मंहगाई की कमर तोड़ दी जाएगी, छोटे बड़े सब का विकास होगा। गरीबी दूर कर दी जाएगी, भ्रष्टाचार का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा। सबको सस्ता और सुलभ न्याय प्रदान किया जाएगा। मुकदमों के अनुपात में न्यायाधीशों की नियुक्तियां की जाएंगी। कोर्ट कर्मचारीयों की नियुक्तियां की जाएंगी।
धन का असमान वितरण खत्म किया जाएगा। किसानों मजदूरों किसानों को उनकी फसलों का वाजिब दाम दिया जाएगा। मजदूरों के लिए बनाए गए कानूनों को लागू किया जाएगा और सबको न्यूनतम वेतन दिया जाएगा। मोदी ने सबसे जोर-शोर से कहा था कि विदेशों में जमा काला धन वापस लाया जाएगा। सबको 15 15 लाख रुपए दिए जाएंगे। लोगों ने मोदी के इन वायदों और नारों का खुलकर समर्थन किया और उन्हें दो बार सत्ता में बिठाया।
मगर आज हम देखते हैं कि मोदी अपने वायदों और नारों से मुकर गए हैं। उन्होंने अपने वायदे और नारे छोड़ दिए हैं। उन्होंने किसानों मजदूरों नौजवानों छात्रों की समस्याओं से मुख मोड़ लिया है। गरीबों की ओर ध्यान देना बंद कर दिया है, बल्कि अब तो यह लगता है कि जैसे मोदी सरकार किसानों मजदूरों नौजवानों छात्रों और गरीबों की, पीड़ितों की, सबसे ज्यादा खिलाफ सरकार है।
हम यहां पर यही कहेंगे कि पिछले नो साल का मोदी सरकार का इतिहास बताता है कि मोदी सरकार ने अधिकांशतः अपने पूंजीपति मित्रों के मुनाफे बढ़ाने और उनकी तिजोरियां भरने के अलावा और कुछ काम नहीं किया है और अब तो उन्होंने देश की संपत्ति को कौड़ियों के दाम बेच बेच कर अपने मित्रों का, अपने पूंजीपति मित्रों का घर भरना शुरू कर दिया है। मोदी सरकार ने देश के लगभग सभी प्राकृतिक संसाधनों को अपने चंद पूंजीपति मित्रों को सौंप दिया है। अब जनता के विकास का, कल्याण का, उनकी नीतियों में, उनके नारों में, उनकी बातों में, कोई जिक्र नहीं होता।
आज स्थिति इतनी विकट है कि रोजी-रोटी पर हमले हो रहे हैं, खाने पीने की चीजों पर जीएसटी लगाकर मुख्य रूप से गरीबों की कमर तोड़ दी गई है। वन कानूनों में किए गए संशोधन आदिवासी समुदाय को दिए गए संवैधानिक गारंटियों का खुल्लम खुल्ला उलंघन है। देश में गरीबों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में इस वक्त 80 करोड़ से ज्यादा लोग गरीब हैं। देश में बच्चों के हालात बेहद खराब हैं। आज भारत में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे हैं
लाखों की संख्या में स्कूल बंद कर दिए गए हैं पर्याप्त संख्या में स्कूल, विश्वविद्यालय, अध्यापक और किताबें नहीं हैं। कालिज और विद्यालय स्तर पर स्थाई रूप से पढ़ाई छोड़ने वालों की संख्या में खतरनाक वृद्धि हुई है। शिक्षा के साथ धर्मनिरपेक्ष तथा वैज्ञानिक संस्कृति और विषयों के खिलाफ आपराधिक और घृणित हमला किया जा रहा है। पूरे समाज में अंधविश्वास और धर्मांधता को बढ़ाने वाले कार्यक्रमों की बाढ़ आ गई है। हमारे देश में इस समय रिकॉर्ड तोड़ बेरोजगारी है, नौजवान बच्चों को काम नहीं मिल पा रहा है। सरकार ने सरकारी उद्योग धंधों को बढ़ाने से जैसे हाथ खींच लिया है और अब तो कमाल यह है कि मनरेगा में काम और धन लगातार कम किया जा रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय के जज कह रहे हैं कि भारत का जनतंत्र और संविधान खतरे में है। भारत एक पुलिस राज बन चुका है। आज रोटी कपड़ा मकान शिक्षा स्वास्थ्य और बुढ़ापे की बुढ़ापे की पेंशन पर हमले जारी हैं। जनता के हिसाब से क्रांतिकारी कानून नहीं बनाए जा रहे हैं। किसानों को उनकी फसलों का वाजिब दाम और एमएसपी नहीं दी जा रही है। सरकार द्वारा बनाए गए चार नए मजदूर कानूनों ने मजदूरों को आधुनिक गुलाम बना दिया है उनसे उनकी सारी स्वतंत्रता छीन ली है। मोदी सरकार ने मीडिया को पूंजीपतियों के हाथ में सौंप दिया है और सरकारी मीडिया संस्थानों का लगभग खात्मा कर दिया है।
77 फ़ीसदी जनता से शिक्षा और स्वास्थ को दूर कर दिया है। अब गरीब जनता उच्च स्तर की शिक्षा और आधुनिक और मुफ्त स्वास्थ्य आम जनता की पहुंच से बाहर हो गए हैं। पूंजीवादी नीतियों, लूट, मुनाफों और व्यवहार के कारण आम जनता का जीवन खतरे में पड़ गया है। भ्रष्टाचार ने सभी सीमाएं तोड़ दी हैं। सस्ता और सुलभ न्याय एक ख्वाब बनकर रह गया है।
महंगाई और जीएसटी ने गरीबों और जनता की कमर तोड़ दी है और अब तो रोज बढ़ती मंहगाई को जैसे पर लग गए हैं। संवैधानिक संस्थाओं में सरकारी हस्तक्षेप के चलते, सुशासन को रौंद दिया गया है। सरकार पूरे विपक्ष के खात्मे की मुहिम पर उतर आई है। वैज्ञानिक संस्कृति को तिलांजलि दे दी गई है। इसके प्रचार-प्रसार को लगभग खत्म कर दिया गया है और खतरनाक स्थिति यह है कि सरकारी कार्यक्रमों में और जनता के बीच अंधविश्वास, धर्मांधता और अज्ञानता को बढ़ाया और पनपाया जा रहा है और सरकार इन्हें रोकने का कोई प्रयास नहीं कर रही है।
एक तरफ मोदी के पूंजीपति मित्रों के पास पैसे का अंबार लगा है, धन के अम्बार खड़े हो गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस समय देश के 10 फ़ीसदी लोगों पर 78 फ़ीसदी धन है और 90 फ़ीसदी लोगों के पास केवल राष्ट्रीय धन का 22 परसेंट है और दूसरी तरफ 77 फ़ीसदी जनता की आमदनी ₹20 प्रतिदिन भी नहीं है और सरकारी आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में इस समय 80 करोड़ गरीब हैं। हमारे देश में करोड़ों करोड़ गरीब हैं, करोड़ों नौजवान बेरोजगार हैं जिन्होंने नौकरी की तलाश करनी ही छोड़ दी है। क्योंकि उन्हें योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिल पा रहा है।
यह भी एक खतरनाक तथ्य है कि मोदी भक्त अपने विरोधियों को देशद्रोही बता रहे हैं। वे सरकार की आलोचना और समालोचना को सुनने को तैयार नहीं हैं। मोदी सरकार के शासन काल में एक और भयंकर सत्य सामने आ रहा है कि मोदी सरकार सत्ता में बने रहने के लिए हिंदू मुस्लिम में नफ़रत की राजनीति और विवाद पैदा कर रही है, हिंदू मुस्लिम एकता तोड़ रही है और देश की एकता और अखंडता को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। इसी के साथ मोदी सरकार एससी, एसटी और ओबीसी और गरीबों को शिक्षा से बाहर करके, देश में फिर से मनुवादी शासन व्यवस्था कायम करना चाहती है। मोदी सरकार ने sc-st, ओबीसी और दूसरी जातियों के गरीबों के अधिकांश हिस्सों को शिक्षा व्यवस्था से, रोजगार से और नौकरियों से लगभग बाहर कर दिया है।
मणिपुर की हिंसा और अराजकता ने सरकार के सुशासन की पोल खोल दी है। जिस तरह से वहां घरों को जलाया जा रहा है औरतों नंगा घुमा जा रहा है सुनते साथ बड़ा काशी जा रहे हैं उन्हें मारा जा रहा है साठ हजार से ज्यादा लोगों को टेंटों में रहना पड़ रहा है, हजारों हजार की संख्या में सरकारी हथियार लूट लिए गए हैं। वहां के पीड़ित लोगों का कहना है कि वहां की हिंसा को बढ़ाने में सरकार का सबसे बड़ा हाथ है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय को भी कहना पड़ा है कि मणिपुर में संविधान और कानून के शासन का अंत हो चुका है, ऐसी अवस्था में हम चुप नहीं बैठ सकते।
उपरोक्त तथ्यों के आलोक में हम कह सकते हैं कि मोदी सरकार में जनता को रोटी कपड़ा मकान शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार न्यूनतम मजदूरी अधिकारों की रक्षा, धन का समान वितरण, किसानों को फसलों का वाजिब दाम और एमएसपी देने से मुकर गई है। भ्रष्टाचार और महंगाई पर रोक लगाना जैसे उसने छोड़ दिया है और जनता को असहाय छोड़ दिया गया है। अब सरकार किसी भी हालत में 2024 के चुनाव जीतना चाहती है, जैसे उसके पास अब यही अकेली मुहिम रह गई है।
नो साल पहले मोदी ले जो नारे लगा दिए थे, जो वायदे किए थे, जो सब के विकास की बात कही थी, वे सब के सब हवा में उड़ गए हैं और मोदी सरकार उन्हें जैसे भूल गई है। उसने जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया है और जनता का विकास उसके एजेंडे में नहीं रह गया है। वह केवल चंद पूंजीपतियों के विकास, मुनाफों और धन धान्य को बढ़ाने का काम कर रही है। हम पक्के तौर पर कह सकते हैं कि मोदी राज में देश की जनता का भविष्य सुरक्षित नहीं है। हम यहां पर यही कहेंगे कि,,,,
मजूर आ किसान आ, वतन के नौजवान आ
तुझे सितम की सरहदों के पार अब निकलना है,
यह राह पुरखतर है पर तुझे इसी पर चलना है
जमाने को बदलना है जमाने को बदलना है।

