Site icon अग्नि आलोक

भारत अमेरिका व्यापार डील…”गजबे वाला व्यापार है भाई!”

Share

वाशिंगटन में जिस कागज पर दस्तखत हुए हैं, उसे “मास्टरस्ट्रोक” बताने वाले ‘भक्तों’ और गोदी मीडिया को जरा यह पोस्ट और साथ में लगा सरकारी दस्तावेज जूम करके पढ़ना चाहिए।
सच्चाई यह है कि प्रधानमंत्री जी का संसद में न आना और चर्चा से भागना बेवजह नहीं था। उन्हें पता था कि जब इस “गजबे वाले व्यापार” की पोल खुलेगी, तो देश का किसान और नौजवान उनसे जवाब मांगेगा।
🤯 “गजबे वाला व्यापार है भाई!” – जरा यह गणित समझिए:
इस डील का लब्बोलुआब यह है:
1️⃣ अमेरिकी किसान अपना माल भारत भेजेगा = 0% टैक्स (शून्य आयात शुल्क)
2️⃣ भारतीय किसान/व्यापारी अपना माल अमेरिका भेजेगा = 18% टैक्स (जुर्माना!)
क्या इसे ही आप ‘विश्वगुरु’ की कूटनीति कहते हैं? यह बराबरी का समझौता नहीं, यह अमेरिका के सामने सरेंडर (आत्मसमर्पण) है।
📄 दस्तावेज क्या कहता है? (तथ्यवार विश्लेषण)

  1. भारतीय किसानों की पीठ पर छुरा (Point No. 1):
    दस्तावेज की पहली ही लाइन कहती है:

“India will eliminate or reduce tariffs on all U.S. industrial goods and a wide range of U.S. food and agricultural products…”

इसका मतलब:
सरकार ने अमेरिका के मक्का (DDGS), लाल ज्वार (Red Sorghum), मेवे (बादाम, अखरोट), सोयाबीन तेल और फलों के लिए भारत के दरवाजे पूरी तरह खोल दिए हैं।
👉 सवाल: जब अमेरिका का सस्ता और सब्सिडी वाला अनाज भारत की मंडियों में बिना टैक्स के डंप होगा, तो हमारे पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और मप्र के किसान की फसल कौन खरीदेगा?

  1. “मास्टरस्ट्रोक” का दूसरा पहलू: हम पर लगा 18% टैक्स (Point No. 2):
    भक्तों, जरा दूसरी बुलेट पॉइंट को ध्यान से पढ़ो:
    “The United States will apply a reciprocal tariff rate of 18 percent… on originating goods of India…”

अमेरिका ने भारत से आने वाले कपड़ा (Textiles), चमड़ा (Leather), जूते (Footwear) और हस्तशिल्प (Artisanal products) पर 18% का भारी-भरकम टैक्स लगा दिया है।
👉 नुकसान: हमारा लुधियाना, तिरुपुर, कानपुर और आगरा का उद्योग बर्बाद हो जाएगा। जब हमारा माल अमेरिका में 18% महंगा बिकेगा, तो चीन और बांग्लादेश बाजी मार ले जाएंगे। यह “मेक इन इंडिया” की हत्या है!

  1. “अतिरिक्त उत्पाद” (Additional Products) – छिपा हुआ खेल:
    पहले पॉइंट के अंत में “Additional Products” शब्द लिखकर सरकार ने यह भी छिपा लिया है कि और क्या-क्या सौदा हुआ है। 2025 में ही $378 मिलियन का कपास आयात हो चुका है। अब क्या दूध, गेहूं और दालों की भी बारी है?
    🔥 मोदी जी, देश जवाब मांग रहा है:
  • संसद से दूरी क्यों? क्या आपको डर था कि अगर सदन में इस कागज पर बहस होती, तो विपक्ष पूछता कि “हमारा 0% और उनका 18%”—यह सौदा किसके फायदे के लिए किया?
  • एमएसपी का क्या होगा? जब अमेरिकी माल सस्ता मिलेगा, तो क्या सरकार धीरे-धीरे एमएसपी और सब्सिडी से हाथ नहीं खींच लेगी? (जैसा कि डील के ‘नॉन-टैरिफ बैरियर्स’ वाले हिस्से में इशारा है)।
  • बदला किसका लिया? अमेरिका ने इसे “Reciprocal Tariff” (बदले की कार्रवाई) कहा है। मतलब साफ है, हमारी सरकार अपनी शर्तों पर डट नहीं पाई और उनके दबाव में झुक गई।
    यह “मास्टरस्ट्रोक” नहीं, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए “ब्रेन स्ट्रोक” है।?
  • किसान मारा जाएगा (आयात से)?
  • मजदूर मारा जाएगा (निर्यात पर टैक्स लगने से)?
  • और मुनाफा सिर्फ अमेरिकी कंपनियों का होगा।
    जो इसे अब भी मास्टरस्ट्रोक कह रहे हैं, वो या तो इस अंग्रेजी दस्तावेज को पढ़ नहीं पा रहे हैं, या फिर उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली है।
    जागिए देशवासियों! यह हमला आपकी थाली और आपकी जेब, दोनों पर है। 🇮🇳😡
Exit mobile version