भारत संवाद अभियान की शुरुआत मई-जून (2021) में होनी थी। कोरोना महामारी की दूसरी लहर
के प्रकोप के चलते वह संभव नहीं हो सका। नवंबर-दिसंबर में भी कोरोना के नए वेरिएंट ने दुनिया के
दरवाजे पर दस्तक दे दी। नया साल भी लगता है महामारी से जूझने में जाएगा। इन्हीं हालातों में
भारत संवाद अभियान चलना है। अभियान के बारे में कुछ विवरण इस प्रकार है:
भारत के वे लोग जो अपनी नागरिक पहचान भारत के संविधान के साथ जोड़ कर देखते हैं, किसी
धर्म, जाति, क्षेत्र, परिवार, व्यक्ति आदि के साथ नहीं, भारत संवाद अभियान के स्वाभाविक हिस्सेदार
होंगे। हालांकि पिछले तीन दशकों में शासक-वर्ग द्वारा थोपे गए कारपोरेट-कम्यूनल गठजोड़ ने
स्वतंत्रता आंदोलन और वैश्विक विकास के मंथन से निकले आधुनिक भारतीय राष्ट्र की चेतना को
बहुत हद तक विकृत कर दिया है, पूरे देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं होनी चाहिए।
विदेश में बसे भारतीयों को भी भारत संवाद अभियान में हिस्सेदारी करनी चाहिए। भारत में रुचि
रखने वाले अथवा एक समतामय शांतिमय विश्व चाहने वाले अन्य देशों के नागरिक भी भारत संवाद
अभियान में हिस्सा लेंगे तो उसकी व्यापकता बढ़ेगी। भारत संवाद अभियान में स्त्रियों की अधिकाधिक
हिस्सेदारी उसे सार्थकता के नए आयाम प्रदान करेगी।
भारत संवाद अभियान का कोई दावा नहीं है। इतनी भर मंशा है कि लंबे संघर्ष और कुर्बानियों से
अर्जित भारत की स्वतंत्रता, संप्रभुता और स्वावलंबन को अक्षुण्ण रखते हुए संविधान में निहित मूलभूत
मूल्यों को राष्ट्रीय जीवन का हिस्सा बनाया जाए। यह प्रतिबद्धता नागरिकों की सोच का हिस्सा
बनेगी, तभी संवैधानिक संस्थाओं का तेजी से जारी अवमूल्यन रुकेगा और उनकी मजबूती तथा
नवीकरण होगा।
भारत संवाद अभियान का कोई संचालक केंद्र अथवा संस्था नहीं है। यह नागरिकों का नागरिकों के
लिए नागरिकों द्वारा चलाया जाने वाला अभियान है। इसमें एक व्यक्ति स्वयं से संवाद कर सकता
है. दो लोग आपस में संवाद कर सकते हैं। परिवार के सदस्य विभिन्न अवसरों पर आपस में संवाद
कर सकते हैं। एक पेशे से जुड़े लोग अपना समूह बना कर संवाद कर सकते हैं। इच्छुक लोग ज्यादा
से ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए ‘भारत संवाद अभियान मण्डल’ बना सकते हैं। ये मण्डल अपने
क्षेत्र में स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं के बीच आधुनिक भारतीय राष्ट्रीयता से जुड़े
विषयों पर चर्चाओं का आयोजन कर सकते हैं।
भारत संवाद अभियान में सभी नागरिक अपना नियमित काम-काज करते हुए हिस्सेदारी कर सकते
हैं। बेरोजगार नागरिकों की अभियान में अग्रणी भूमिका हो सकती है और वे अभियान की सबसे बड़ी
ताकत बन सकते हैं।
लोकतंत्र, नागरिक अधिकार, मानव गरिमा, धार्मिक-सांस्कृतिक बहुलता के साथ राज्य की
कल्याणकारी भूमिका और समाजवाद के समर्थन में पुस्तकों, लेखों, पत्रिकाओं, वृत्तचित्रों, संगोष्ठियों,
वीडियो भाषणों आदि की कमी नहीं है। तानाशाही, फासीवाद, आतंकवाद आदि कट्टरता के विविध
रूपों का विरोध करने वाला साहित्य भी बड़ी मात्रा में उपलब्ध है। भारत संवाद अभियान का बल
लोगों के बीच आपसी सीधे संवाद पर रहेगा।
यह केवल सहमना लोगों के बीच संवाद नहीं है। अलग-अलग विचार और मान्यता रखने वाले लोग
भारत संवाद अभियान में शामिल होकर अपना पक्ष रख सकते हैं।
भारत संवाद अभियान का कोई कोष (फंड) और खाता नहीं होगा। आपसी सहयोग के सहारे काम
किया जाएगा। प्रत्येक इकाई द्वारा संवादधर्मी लोगों से मिलने वाली सहयोग राशि और उसके खर्च
का हिसाब रखा जाएगा।
अभियान राजनीतिक है, जिसका पहला चक्र 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों तक चलेगा। नतीजा
जो भी रहे, उसके बाद अभियान का दूसरा चक्र शुरू होगा। आगे चक्र दर चक्र यह अभियान चलता
रहेगा – कारपोरेट राजनीति के बरक्स भारतीय समाज के भीतर से एक नई रचनात्मक राजनीति का
निर्माण होने तक। ताकि लोकतांत्रिक, समाजवादी एवं धर्मनिरपेक्ष भारत सदैव अक्षुण्ण बना रहे।
भारत संवाद अभियान की सफलता तभी होगी जब उसकी व्याप्ति संभ्रांत नागरिक समाज से होते हुए
संगठित-असंगठित क्षेत्र की विशाल श्रमशील जनता तक होगी। जब वे खुद संवाद करेंगे और बतौर
भारतीय नागरिक अपना बराबरी का हक हासिल करेंगे।
भारत संवाद अभियान के तहत कुछ साथी देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों से बात-चीत करते हुए
निरंतर यात्रा करेंगे। इस विश्वास के साथ कि अन्य इच्छुक लोग उस यात्रा से जुड़ेंगे अथवा अलग से
अपनी यात्रा का आयोजन करेंगे।
भारत संवाद अभियान एक प्रक्रिया है, जिसमें सुझावों और अनुभवों के साथ संवर्धन होता चलेगा।
इस पर्चे का सभी भारतीय भाषाओं में अनुवाद होना जरूरी है। जो साथी अपनी भाषा में अनुवाद की
जिम्मेदारी लेते हैं, वे कृपया सूचित करें।
जिन सरोकारधर्मी नागरिकों को यह संदेश मिलता है, वे सुझाव देने और अपने विवेक से संदेश को
आगे प्रसारित करने का कष्ट करें।
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