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भारतीय स्वतंत्रता दिवस गर्व दिवस या शर्म दिवस ! कुछ अनुत्तरित प्रश्न

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-निर्मल कुमार शर्मा,

ब्रिटिशसाम्राज्यवादी भारत के कुछ पूँजीवादी,शोषणकारी,क्रूर,असंवेदनशील,  मजदूरों और किसानों के प्रति अनुदान तथा असहिष्णु एक राजनैतिक दल को 15 अगस्त 1945 को आधी रात को अपनी सत्ता को सौंपकर अपने वतन को लौट गये ! वास्तव में उस दिन सत्ता का हस्तानांतरण हुआ,शोषण पर आधारित सत्ता विदेशी शोषकों मतलब ब्रिटिश-साम्राज्यवादियों के हाथ से देशी भूरे रंग के शोषकोंं के हाथों में सौंप दी गई ! भारत के सबसे बड़े स्वप्नदृष्टा और दार्शनिक शहीद-ए-आजम स्वर्गीय भगतसिंह ने ब्रिटिशसाम्राज्यवादियों से देशी साम्राज्यवादियों को सत्ता हस्तांतरण के दिन मतलब कथित स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 1947 से लगभग 17 वर्ष पूर्व ही अपनी फाँसी से कुछ ही दिनों पूर्व यह सार्वजनिक तौर पर घोषणा कर दिए थे कि ‘निश्चितरूप से यह देश और इस देश की आवाम,किसान,मजदूर आदि कुछ ही वर्षों में ब्रिटिश-साम्राज्यवादियों की गुलामी से मुक्त हो जाएंगे,लेकिन ब्रिटिशसाम्राज्यवादियों की जगह देशी साम्राज्यवादी और शोषक सत्ता में आ जाएंगें ! इस कथित स्वतंत्रता के बाद भी इस देश की आवाम,मजदूर किसान वर्ग के जीवनस्तर में कोई सुधार की गुँजाइश नहीं है,शोषण, असहिष्णुता और क्रूरता के मामले में नये देशी शासक अंग्रेज शासकों से किसी तरह भी कमतर नहीं होंगे,बल्कि और क्रूर और बर्बर होंगे

‘स्वप्नदृष्टा और दार्शनिक शहीद-ए-आजम स्वर्गीय भगतसिंह की आज से ठीक 91 वर्ष पूर्व की गई उक्तवर्णित भविष्यवाणी की बातें बिल्कुल खरी उतर रहीं हैं,आज इस देश में पिछले 44 वर्षों में सर्वोच्च स्तर पर बेरोजगारी है,किसानों को पिछले 74 वर्षों से उसकी फसल की उचित कीमत ही नहीं मिली,जिससे वह साल-दर साल कर्ज में डूबता चला जाता है,अंततः खुदकुशी कर लेता है ! पिछले दो दशकों में लगभग साढ़े तीन लाख किसान अपने जीवन को समाप्त कर लिए हैं यह दुनिया में विरलतम् उदाहरण है,विडंबना देखिए सत्ता के कर्णधार कहते नहीं थकते कि हमारा भारत महान युवाओं का देश है, आध्यात्मिक देश है,विश्वगुरु है आदि-आदि, लेकिन किसानों, बेरोजगारों की इस तथाकथित महान देश में इतनी नारकीय स्थिति है ! आज भी इस देश में हर आधे घंटे पर एक किसान और एक बेरोजगारी से त्रस्त युवा खुदकुशी कर रहा है ! इस देश के कथित उच्च जातियों में अभी भी जातिवादी वैमनस्यता का जहर इतना भरा हुआ है कि यहां के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार सन् 2019 में 32033 मतलब प्रतिदिन 88 या हर 20 मिनट में एक बलात्कार किसी दलित महिला या लड़की के साथ हो जाता है और ज्यादेतर मामलों में उसकी हत्या भी कर दी जाती है ! परंतु फिर भी इस देश में हर साल 15 अगस्त को जो कथित स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है और उस दिन हर वर्ष इस देश के कुछ बड़े खाये-अघाए शोषक सेठ,सत्ता की चाकरी करने वाले ब्यूरोक्रेट्स,इस देश के पूँजीपतियों की सुरक्षा में तैनात सेना और पुलिस के बड़े अफसर,न्याय के नाम पर आमजनविरोधी निर्णय देनेवाले कुछ कथित न्यायमूर्ति और पूँजीपतियों के दलाल भ्रष्ट नेता कथित आजादी दिवस के मौके पर अपने ऐश्वर्य और फैशन का खूब फूहड़ प्रदर्शन करने की हर साल एक परंपरा सी निभाते हैं। वर्तमानदौर इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि इस देश का आम आदमी,मजदूर, किसान, रेहड़ी-पटरी वाले,सब्जी बेचनेवाले, टैक्सी,टेंपो और ट्रक चलाने वाले या इस देश का हर साधारण व्यक्ति अशिक्षा,बेरोजगारी, बीमारी,महंगाई, भ्रष्टाचार से बुरी तरह त्रस्त है,दुःखी है,कराह रहा है,दूसरी तरफ चंद पूँजीपतियों की संपत्ति दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है,क्योंकि सत्ता के कर्णधार,जो वास्तव में पूँजीपतियों के मात्र दलाल हैं,इस देश के प्राकृतिक संसाधनों यथा गैस,कोयला,भूगर्भीय गैस आदि को अपने खुले हाथों पूँजीपतियों को लुटा रहे हैं !         

    यक्षप्रश्न यह है कि हम हर साल 15 अगस्त को कथित स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाते हैं ? इस दुनिया में बहुत से ऐसे देश है,जो कभी किसी देश के गुलाम रहे ही नहीं,क्योंकि उस देश के लोग हजारों वर्षों से संगठित,सशक्त और मिल-जुलकर रहते आए हैं,वहाँ कोई जातिगत् वैमनस्यता नहीं, कहीं किसी तरह का दुराग्रह नहीं,कहीं अश्यपृश्यता नहीं,कहीं ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं,कहीं छुआछूत नहीं,उन लोगों ने अपने देश पर आक्रमण करनेवाले दुश्मनों और आतताइयों को इतनी बुरी तरह से मारकर भगाया का वह दुबारा फिर उनके देश पर हमला करने से पूर्व उसके अंजाम को सौ बार सोचा और उनसे दूर ही रहने में अपनी भलाई समझा,लेकिन दूसरी तरफ हमारे देश में कुछ धूर्त,मक्कार और अतिस्वार्थी जमात इस संपूर्ण देश और सभी की भलाई करने की कभी सोचा ही नहीं,केवल अपनी जाति व वर्ण की सुख की निकृष्टतम सोच में बंधे रहे,फल यह हुआ कि पूरा भारतीय उपमहाद्वीप कुछ हजार की संख्या वाले चंद लुटेरों,कबीलाई सरदारों आदि के सामने लुटपिटकर-हारकर यह पूरा देश गुलामी के अंधेरे कुँए में हजारों वर्षों तक गुलामी के जुए में पिसता रहा ! अब भारतीय समाज और इसके निराशाजनक इतिहास व वर्तमान को गौर से देखिये।

इसकी गरीबी,आपसी भेदभाव,छुआछूत, अन्धविश्वास,पाखण्ड,भाग्यवाद और गन्दगी देखकर आपको लगता है पिछले तीन हज़ार सालों में इसके अध्यात्म ने इसे कुछ भी सकारात्मकता प्रदान किया हो ! सन् 711 से लेकर 1947 तक मतलब पिछले 1236 साल से ये देश किसी न किसी अर्थ में किसी न किसी बाहरी कौम का गुलाम रहा है। मुट्ठी भर आक्रमणकारियों ने करोड़ों की आबादी वाले इस देश को कैसे गुलाम बनाया,ये भी एक चमत्कार ही है। ऐसे नपुंसकता और कायरता के हज़ारों अध्याय इस देश में हैं। इसीलिये इस देश ने अपना वास्तविक इतिहास को कभी लिखा ही नहीं, बल्कि वह लिखा जिससे इससे मूर्खतापूर्ण और कायरतापूर्ण करतूतों के सबूत मिटते रहें। गौरवशाली इतिहास की कल्पनाओं को गढ़कर गर्व करते हैं,परन्तु यह कहने को एक पूरा उपमहाद्वीप को घेरे यह बड़ा सा देश हमेशा ही अपने से बहुत ही छोटे-छोटे कबीलों के सरदारों,आक्रमणकारियों,लुटेरों से इस महादेश के कथित रणबांकुरे हारते रहे यथा इस देश पर सन् 711 में अरब का एक सरदार मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध और मुल्तान को जीत लिया,फिर एक गुमनाम छोटे से कबीले गजनी के मुहम्मद गजनवी,उज्बेकिस्तान के एक छोटे से कबीले तिमूरिड का तैमूरलंग,उज्बेकिस्तान के ही आँदिजान कबीले का बाबर,ईरान के एक नन्हें से कबीले का नादिरशाह,अफगानिस्तान के हेरात कबीले का अहमदशाह अब्दाली और अफगानिस्तान के ही खिलजी कबीले के अल्लाउद्दीन खिलजी जैसे लुटेरों द्वारा भी हमेशा  इसीलिए लुटता-पिटता रहा। और इस देश के लिए सबसे अधिक दुःखद और शर्म की बात यह है कि इस देश के कथित अत्यंत बहादुर राजा गुलामों से भी हार गये ! ज्ञातव्य है मुहम्मद गोरी गुलाम वंश का सुल्तान कहलाता है। अन्त में कुछ लाख एक छोटे से द्वीप जिसे इंग्लैंड कहते हैं और इस तीस करोड़ की आबादी वाले देश पर सैकड़ों साल अकथनीय जुल्म करते रहे ! ये सब देखकर अब दोबारा सोचिये कि भारत के परलोकवादी अध्यात्म,आत्मा,परमात्मा और ध्यान ने इस देश के लोगों को क्या दिया है ? इन्होंने दुनिया से बिल्कुल अलग किस्म के आविष्कार किये जैसे ऊपरवाला ख़ुश कैसे होता है ? ऊपरवाला नाराज़ क्यों होता है ? स्वर्ग में कैसे जायें ? नरक में जाने से कैसे बचें ? स्वर्ग में क्या-क्या मिलेगा ? नरक में क्या-क्या सज़ा है ? हलाल क्या है,हराम क्या है ? बुरे ग्रहों को कैसे टालें ? मुरादें कैसे पूरी होती हैं ? पाप कैसे धुलते हैं ? पित्तरों को तृप्त कैसे करें ? आदि-आदि बहुत से अंधविश्वास और पाखंड से भरे कथित धार्मिक सिद्धांत इस देश की तमाम धार्मिक पोथियों में भरे पड़े हैं !       

      इस देश को परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़े जाने और हजारों वर्षों तक छोटे-छोटे आक्रांताओं से पदाक्रांत होने को इसलिए अभिशापित होना पड़ा,क्योंकि यह देश हजारों जातियों में बंटा रहा ! किसी भी विदेशी आक्रमणकारी से इस देश के सभी लोग मिलजुलकर,सशक्त और जबर्दस्त मुकाबला किए ही नहीं,क्योंकि कुछ धूर्तों ने अपने छुद्र निजी स्वार्थ और लोभ के लिए इस देश को पहले चार वर्णों में और उसके बाद हजारों जातियों-उपजातियों में बाँटकर रख दिया ! इस देश की जातिवादी कुव्यवस्था यहाँ के समाज में इतनी रच-बस गई है कि यहाँ के लोग जाति को परम सत्य मान लिए हैं ! कुछ विद्वानों का कथन बिल्कुल सत्य है कि ‘भारत में आप अपना धर्म आसानी से बदल सकते हैं,परन्तु अपनी जाति कभी नहीं बदल सकते ! ‘ यही जातिवादी तत्व इस देश के लोगों को किसी भी विदेशी आक्रांता के खिलाफ एकजुट नहीं होने दिया,न किसी अच्छे काम के लिए संपूर्ण भारतीय समाज कभी एकजुट हुआ ! आज वर्तमान समय पर नजर डालिए,जिन जातिगत् वैमनस्यता और धार्मिक संकीर्णता से यह देश गुलाम हुआ,वे सारी बुराइयां अभी भी यथावत हैं या अपने और उग्र व भीषण रूप में जीवित हैं,इस देश का हर व्यक्ति,यथा किसान, मजदूर, विद्यार्थी, कर्मचारी दवा,शिक्षा, भोजन,ऑक्सीजन आदि मूलभूत जीवन की समस्याओं से मरहूम है,त्रस्त है,मर रहा है ! कटुसच्चाई यह है कि वर्तमानदौर की मोदी ऐंड कंपनी सरकार जातिगत् और धार्मिक वैमनस्यता के बल पर ही सत्ता में आई भी है और टिकी भी है ! तो इस दुःखद स्थिति में हर साल ये 15 अगस्त  कथित स्वतंत्रता दिवस की व्यर्थ की चोंचलेबाजी व छद्म ढोंग को धूमधाम से मनाने का क्या औचित्य है ?

-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद, उप्र

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