बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और टीकाकरण की तीव्र गति से विश्व पर्यटन की पहली पसंद बनने में समर्थ भारत राष्ट्र की
समावेशी संवृद्धि को दे रहा नई दिशा…
मन की बात मोदी 2.0 (31वीं कड़ी, 26 दिसंबर 2021)
आत्मनिर्भर भारत का मंत्र
बड़ा सोचें, बड़े सपने देखें और उन्हें
पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करें
नए साल पर हर व्यक्ति, हर संस्था, कुछ और बेहतर करने, बेहतर बनने का संकल्प लेती है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
वर्ष 2021 के अपने आखिरी ‘मन की बात’ के जरिए जन संवाद किया तो बताया कि किस तरह से पिछले सात सालों से यह
यात्रा व्यक्ति, समाज व देश की अच्छाइयों को उजागर कर और बेहतर करने की प्रेरणा देती रही है। यह मंच ऐसा साधन बना
है जो जन-जन की शक्ति है। बीते वर्ष के आखिरी ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने आजादी के अमृत महोत्सव भारतीय
संस्कृति, स्वच्छता, जीवन में किताबों की महत्ता और बड़ी सोच के साथ बड़े सपने देखने और उसे पूरा करने में जुट जाने का
संदेश दिया। पेश है उसके अंश:
कोविड और जनशक्ति: ये जनशक्ति की ही ताकत है, भारत 100 साल में आई सबसे बड़ी महामारी से लड़ सका। आज जब
हम भारत की तुलना वैश्विक टीकाकरण के आंकड़ों से करते हैं, तो पता चलता है कि देश ने कितनी अभूतपूर्व उपलब्धि
हासिल की है।
सतर्कता: हमें ये भी ध्यान रखना है कि कोरोना का एक नया वेरिएंट दस्तक दे चुका है। ऐसे में स्वयं की सजगता, अनुशासन,
इस वेरिएंट के खिलाफ देश की बहुत बड़ी शक्ति है। हमारी सामूहिक शक्ति ही कोविड को परास्त करेगी, इसी दायित्वबोध के
साथ हमें 2022 में प्रवेश करना है।
ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह: हाल ही में तमिलनाडु में हादसे में हमने देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत कई वीरों
को खो दिया। इसी में ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह भी थे। उन्होंने अपने स्कूल के प्रिंसिपल को एक पत्र लिखा था जिसमें अपनी
असफलताओं की बात की थी कि कैसे उन्होंने अपनी कमियों को काबिलियत में बदला।
परीक्षा पर चर्चा: हर साल मैं परीक्षा पर चर्चा में परीक्षा के तनाव से निपटने से संबंधित विषयों पर चर्चा करता हूं। इस साल
भी मैं परीक्षा से पहले छात्रों के साथ चर्चा करने की प्लानिंग कर रहा हूं। कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों, शिक्षकों और
अभिभावकों के लिए ऑनलाइन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा।
किताब और व्यक्तित्व: किताबें सिर्फ ज्ञान ही नहीं देतीं बल्कि व्यक्तित्व भी संवारती हैं। ऐसे समय में जब हमारा स्क्रीन टाइम
बढ़ रहा है, बुक रीडिंग अधिक से अधिक लोकप्रिय बने, इसके लिए भी हमें मिलकर प्रयास करना होगा।
प्राचीन संस्कृति: आज दुनियाभर में भारतीय संस्कृति के बारे में जानने को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है। अगर हमारे देश के
लोग ठान लें, तो देश भर में हमारी प्राचीन कलाओं को सजाने, संवारने और बचाने का जज्बा एक जन आंदोलन का रूप ले
सकता है।
पक्षी संरक्षण: अरुणाचल प्रदेश के जंगलों में पक्षियों की संख्या में कमी को सुधारने के लिए एयरगन सरेंडर अभियान शुरू
किया गया है और क्षेत्र के 1600 से अधिक लोगों ने पक्षी शिकार को रोकने के लिए अपनी बंदूकें सरेंडर कर दी हैं।
स्वच्छता से नई राह: स्वच्छता के प्रयास में संस्थाएं हो या सरकार, सभी की महत्वपूर्ण भूमिका है। डाक विभाग ने जंकयार्ड
को कोर्टयार्ड-कैफेटेरिया में बदल दिया है। पर्यावरण मंत्रालय ने खाली हुए क्षेत्र को वेलनेस सेंटर में। पुनीत सागर अभियान में
एनसीसी कैडेट्स ने प्लास्टिक कचरा हटाया। साफ-वाटर नाम से स्टार्टअप युवाओं ने शुरू किया है।
संकल्प: हमें देश को विकास की नयी ऊंचाई पर लेकर जाना है, इसलिए हमें अपने हर संसाधन का पूरा इस्तेमाल करना
होगा। यह आत्मनिर्भर भारत का भी मंत्र है। आईये हम अपना संकल्प दोहरायें कि बड़ा सोचेंगें, बड़े सपने देखेंगे, और उन्हें
पूरा करने के लिए जी-जान लगा देंगे।

