Site icon अग्नि आलोक

*प्राचीन समय में इंदौर एक सम्रद्ध शहर हुआ करता था*

Share

*©️ देवेंद्र चौहान*

30 सिनेमाघर थे 7 कपड़ा मिल थी, अम्बानी से बड़े हुकुमचंद सेठ थे, सब तरफ हरियाली थी, नवलखा में नों लाख पेड़ थे…पलासिया नाम के गांव में पलास के पेड़ थे हवा बंगला में बेहतरीन हवा चलती थी… कान्ह नदी में कल कलपानी बहता था… बड़े बड़े तालाब थे, सब तरफ डामर की सड़कें थी, जाम ना के बराबर था… अपनापन इतना की लोग दिवाली पर मिलने घर घर जाते थे… नेताओ में अपने दम पर कुछ करने का दम था, सब मिलकर नर्मदा ले आये थे…

आबो हवा इतनी अच्छी थी की लोग इंदौर को शबे मालवा कहते थे… उत्सव प्रिय शहर था, अनंत चतुर्दशी की झांकी सबसे बड़ा उत्सव था…

फिर कुछ विकास पुरुष आये, उन को शहर का विकास करने की चूल मची… भोली जनता ने भी उनको सर माथे बैठाया, नेताओ अधिकारियों ने जनता की सोच से कही आगे की सोचते हुए

शहर को सिंगापुर दुबई बनाने की बजाय वेनिस बनाने की सोची.. उन्होंने जनता की सोच को छोटा बताते हुए कहा हमारे शहर में बड़ी नदी नही है आओ हम शहर में ही नदी ले आते है…

जनता नेताओ की सोच पर निहाल हो गई, कुछ गरीब कभी हवाई जहाज में नही बैठे थे उन्होंने चाँद को नजदीक से नही देखा था, तो नेताओ ने उसका भी समाधान निकाला ओऱ शहर की सारी सड़के 

चाँद के धरातल जैसी कर दी….

लो जी भर कर घूमो चाँद पर… शहर के नेता BRTS को दुनिया का सब से बड़ा आइडिया बताकर शहर

में ले आये… फिर उसी को फैल बताकर तोड़ने लग गए..

*एलएनटी ने शहर में इतनी अच्छी सड़क बनाई थी उस के बाद उसे ठेका दिया ही नहीं क्योंकि अच्छी सड़के हमें पसंद नहीं*

रोजगार के नाम पर शहर में E रिक्शा नाम का वायरस ले आये, ट्रैफिक सिग्नल इतनी ज्यादा ऊंची क्वॉलिटी के लगाए की एक कुकुर

के सुसु करते ही बन्द हो जाते है…

विकास की चूल में इन्होंने तालाब की जमीन पर कोर्ट बना दी…

*नालों की जमीन पर प्लाट काट कर बेच दिए… अब बताओ पानी सड़क पर नहीं बहेगा तो कहां बहेगा*

बगीचे की जमीन पर मंदिर बना दिये… पार्किंग की जमीन पर दुकानें बना दी.. ओर फ्लाई ओवर के नीचे ये बगीचे बना रहे.. बायपास पर बोगदे इन की अक्ल जीतने छोटे बना दिये… सड़क बन्द करके 56 बना दिया… शहर की जनता से विकास के नाम पर वोट ले कर खुद राजा बन गए ओर जनता को… #%तीया बना दिया..

दुनिया में जितने राजा नही हुए

उस से ज्यादा गणेशोत्सव में राजा हमारे यंहा हो गए..

अब कांवड़ यात्रा इस शहर में नया इवेंट हो गया… शहर की जनता जाम में फंसकर हर प्रकार की गाली नही बक लेती  तब तक भी इनको संतोष नही हुआ…

अभी इनकी इन्ही हरकतों को देख कर गणेश जी ने प्रजापत नगर में पांडाल सहित खुद का विसर्जन कर लिया… लेकिन इन को (नेताओं को) डूबने के लिए चुल्लू भर पानी नही मिला…

पहले बाढ़ पहाड़ों में आती थी

नदियों में आती थी अब मेरे शहर में घर के ड्राइंग रूम तक आती है ओर कितना विकास चाहिए तुमको?

अभी तो प्रजापत नगर में परिवार सहित कार ही बही है देखना एक दिन मेरे शहर में पूरी की पूरी ट्रेन बह जाएगी… लेकिन नही बहेगी तो बस नेताओ की अदूरदर्शिता, अधिकारियों के बेसिरपैर के प्लान पूरा शहर डूब जाएगा लेकिन ये शर्म से नही डूबेंगे।

Exit mobile version