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भारतीय महिलाओं में भी रफ्तार पकड़ चुकी है इनफर्टिलिटी*

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        डॉ. प्रिया

महिलाओं में इनफर्टिलिटी का कारण ओवरी, यूटरस, फैलोपियन ट्यूब और एंडोक्राइन सिस्टम में पाई जाने वाली असमानता है। आज के दौर में इनफर्टिलिटी एक बड़ी समस्या बनकर उभर रही है। लोग इस समस्या से उभरने के लिए डॉक्टरी उपचार के साथ साथ कई प्रकार के अन्य प्रयास भी करते हैं। किशोरी बनने से पहले ही नॉनस्टॉप सेक्सकर्म और गर्भरोधी दवाएं, देर से शादी अहम् कारण हैं. उचित पोषण और सही जीवन शैली फर्टिलिटी को इप्रूव करने का एक सामान्य तरीका है। कहीं न कहीं राजमर्रा के जीवन में बढ़ रहा तनाव भी इसका एक मुख्य कारण है।

     विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक इनफर्टिलिटी (Infertility) लाखों लोगों को प्रभावित करती है, जिसका असर उनके परिवारों और समुदायों पर पड़ता है। आंकड़ों के हिसाब से दुनिया भर में रिप्रोडक्टिव एज के हर छह लोगों में से लगभग एक व्यक्ति इनफर्टिलिटी का शिकार है। महिलाओं में इनफर्टिलिटी का कारण ओवरी, यूटरस, फैलोपियन ट्यूब और एंडोक्राइन सिस्टम में पाई जाने वाली असमानता हो सकता है।

      यूटरस संबंधी विकार जैसे कि एंडोमेट्रियोसिस, सेप्टेट यूटर्स और फाइब्रॉएड इस समस्या का कारण बनते हैं। वहीं ओवरी से जुड़ी समस्याएं जैसे पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम और अन्य फॉलिक्यूलर डिसऑर्डर भी इनफर्टिलिटी के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसके अलावा हार्मोंलय इंबैलेस भी इसका एक मुख्य कारण है।

 अपनाएं ये आसान उपाय :

    *1. वेजाइनल हाइजिन बनाए रखें*

     फर्टिलिटी का सीधा संबधी वेजाइनल हाइजीन से है। अगर आप एसटीडी, यूटीआई समेत किसी भी प्रकार के बैक्टीरियल संक्रमण से ग्रस्त हैं, तो इसका प्रभाव आपकी फर्टिलिटी पर दिखने लगता है।

    ऐसे में योनि की स्वच्छता को प्राथमिकता देना बेहद ज़रूरी है। यूरिन पास करने के बाद योनि को अवश्य क्लीन करें। इसके अलावा सेक्स के बाद वेजाइनल हाइजीन (Vaginal hygiene) को बनाए रखें, जो आगे चलकर पैल्विक में सूजन का कारण भी बन सकता है.

*2. व्यायाम करें*

     मांसपेशियों में आने वाली ऐंठन के चलते भी इनफर्टिलिटी की समस्या बढ़ने लगती है। नियमित तौर पर योग करें। इसके अलावा लंबे वक्त तक बैठने से परहेज करें। ओव्यूलेशन (Ovulation) को प्रभावित होने से बचाने के लिए योगाभ्यास ज़रूरी है। इसके लिए दिनचर्या में बाधा कोणासन, पश्चिमोत्तानासन, शवासन और प्राणायाम का प्रयास करें।

*3. वज़न को नियंत्रित करें*

    हमारा बॉडी वेट (Body Weight) ज़रूरत से ज्यादा बढ़ना और घटना दोनों ही बांझपन का कारण साबित होते है। दरअसल, बॉडी में जमा फैट्स आपकी पीरियड साइकिल (Period Cycle) को अफेक्ट करने लगते है और धीरे धीरे पीरियड अनियमित होते चले जाते हैं।

    इसका प्रभाव बॉडी में एग डवलपमेंट पर दिखता है। ऐसे में रनिंग (Running), वॉकिग (Walking), योग (Yoga) और एक्सरसाइज़ के माध्यम से वेट को नियंत्रित (Weight Control) करना ज़रूरी है।

     अधिक वजन या मोटापे के चलते बॉडी में एस्ट्रोजन हार्मोन बढ़ने लगता है, जो इनफर्टिलिटी का कारण बन सकता है। रनिंग, वॉकिग, योग और एक्सरसाइज़ के माध्यम से वेट को नियंत्रित करना ज़रूरी है। 

*4. तनाव से रहें दूर*

     अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रहे हैं, तो खुद को रिलैक्स रखें और हर तरीके की टेंशन से दूर रहें। आपके आस पास तनाव की स्थिति रहने से आपके गर्भवती होने की संभावना कम हो जाती है। इससे बॉडी में हार्मोनल चेंजिज आने लगते हैं। अगर आप तनाव महसूस करते है, तो खुद को किसी सी ऐसी एक्टिविटी में इलवाल्व कर लें, जिससे आपको सुकून मिलता हो।

   हर वक्त खुश रहने से शरीर में हैप्पी हार्मोस रिलीज़ होते हैं, जो गर्भधारण में कारगर रहते हैं।

*5. हेल्दी फूड खाएं*

    फोलेट और जिंक जैसे एंटीऑक्सिडेंट फर्टिलिटी बढ़ाने में अहम रोल निभाते हैं। इनकी मदद से शरीर में फ्री रेडिकल्स को डिएक्टिवेट कर देते हैं। जो एग को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं।

    नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक रिसर्च के मुताबिक रोज़ाना एंटीऑक्सीडेंटस से भरपूर 75 ग्राम वॉलनट खाने से पुरुषों के स्पर्म की क्वालिटी में सुधार पाया गया है।

     वहीं महिलाओं पर किए गए एक रिसर्च से पता चला है कि फोलेट का नियमित सेवन करने से क्लीनिकल प्रेगनेंसी और लाइव बर्थ की दर बढ़ जाती है।

*इंटरकोर्स से लेकर टाइट अंडरगारमेंट्स तक का फर्टिलिटी पर प्रभाव*

    हर बार इनफर्टिलिटी की वजह अपनाये गए गर्भ-निरोधक उपक्रम या मेडिकल कंडिशन ही नहीं होती, बल्कि हमारी दिनचर्या में कुछ ऐसे काम भी होते है जिसकी वजह से इनफर्टिलिटी की समस्या पेश आने लगती है।

      ज्यादातर लोगाें का लाइफस्टाइल ऐसा हो चुका है जिसमें कुछ भी तय नहीं है। भागदौड़ और समय न होने के कारण हम कुछ भी खा रहे हैं। थकान को दूर करने के लिए स्मोकिंग, एल्कोहल का सेवन कर रहे हैं। रात भर सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। ये सभी कारण फर्टिलिटी को प्रभावित करते हैं।

      वास्तव में ये सभी चीजें हॉर्मोन पर निर्भर करती हैं और हार्मोन तभी सही ढंग से रिलीज हो पाते हैं, जब आपकी दिनचर्या सही हो। इसलिए अगर आप बेबी प्लान कर रहे हैं, तो आपको सबसे पहले अपने लाइफस्टाइल पर ध्यान देना होगा।

      लाइफस्टाइल की खराब आदतें महिलाओं और पुरूषों दोनों में इनफर्टिलिटी का कारण बन सकती हैं। इनके अलावा उम्र (उम्र के साथ प्रजनन क्षमता में कमी आती है, विशेष रूप से महिलाओं में), कुछ चिकित्सा स्थितियां (जैसे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या एंडोमेट्रियोसिस),STI यानी यौन संक्रमण, आनुवंशिक विकार, जीवन शैली कारक (जैसे) धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, या मोटापा), और कुछ दवाएं या उपचार : जैसे कीमोथेरेपी)।

फर्टिलिटी को बेहतर बनाने के लिए अपने लाइफस्टाइल की इन 5 चीजों पर दें ध्यान :

    *1 इंटरकोर्स (Intercourse) :*

   कई बार पुरूषों को ये पता ही नहीं होता है कि पेनिट्रेशन की सही जगह क्या है, संभोग कैसे करना है और कितना करना जरूरी है। कई बार गलत या अपूर्ण इंटरकोर्स करने की वजह से भी महिलाएं कंसीव नहीं कर पाती हैं।

   तो सबसे पहले इसके बारे में अपने डॉक्टर से जानकारी लें, मर्द में कोई कमी हो तो दूर कराएं और फिर ट्राई करें।

*2 तनाव को कम करें (Manage stress)*

 तनाव के कारण भी इनफर्टिलिटी हो सकती है। इसलिए सबसे पहले आपको तनाव को कम करने के लिए योगा, एक्सरसाइज और मेडिटेशन करना चाहिए।

   उच्च स्तर का तनाव प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है।

*3 लुब्रिकेंट (Lubricant):*

     कई बार इंटरकोर्स के सामय हम कुछ ल्यूब्स का इस्तेमाल करते हैं। बाजार में कई लुब्रिकेंट मौजूद हैं। कुछ सादा हैं, तो कुछ में खुशबू मौजूद होती है। कई लुब्रिकेंट ऐसे होते हैं जो स्पर्म को मार देते हैं। जिससे स्पर्म का प्रभाव खत्म हो जाता है।

    इसलिए विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही लुब्रिकेंट चुनें। वे ऐसे हों, जो स्पर्म को जीवित रखें। लाइफस्टाइल की खराब आदतें महिलाओं और पुरूषों दोनों में इनफर्टिलिटी का कारण बन सकती हैं।

*4 पर्याप्त नींद लें (Get enough sleep):*

     हार्मोनल संतुलन और समग्र कल्याण का समर्थन करने के लिए एक अच्छी नींद का लेना बहुत जरूरी है। प्रति रात 7-9 घंटे की नींद लें।

    कई बार नींद ठीक न होने के कारण महिलाओं के पीरियड अनियमित हो जाते है इससे भी प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है।

*5 शराब और स्मोकिंग से बचें  (Alcohol and Smoking):*

      किसी भी तरह का नशा करने से महिलाओं के अंडों की क्वालिटी पर फर्क पड़ता है। साथ ही पुरूषों में स्पर्म काउंट और मूवमेंट पर भी फर्क पड़ता है। इसलिए यह जरूरी है कि अपने लाइफस्टाइल से शराब और स्मोकिंग को बिल्कुल कम कर दें।

   कम से कम तब तक के लिए इसका सख्ती से पालन करें, जब तक आप बेबी प्लान नहीं कर लेते।

*6 हुत ज्यादा टाइट कपड़े न पहनें (Tight undergarments)*

   आप बहुत टाइट अंडर्वेयर नहीं पहने. योनि को अक्सीजन चाहिए होता है. अगर पुरूष ज्यादा टाइट कपड़े या अंडरगारमेंट पहनते हैं, तो इससे उनके टेस्टिकल्स शरीर से चिपक जाते है।

    शरीर का तापमान ज्यादा गर्म होता है टेस्टिकल्स की तुलना में। जिससे उनमें ठीक से स्पर्म नहीं बन पाता है। टेस्टिकल्स का शरीर से बाहर होने का मतलब है कि उन्हे ठंडा रखा जा सके। इसलिए पुरुषों के लिए भी ढीले अंडरवियर पहनने की सलाह दी जाती है।

*7 पौष्टिक आहार लें (Balanced diet):*

     संपूर्ण यानी संतुलित आहार का सेवन करें जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज, लीन प्रोटीन और स्वस्थ वसा शामिल हों।

   एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थ, जैसे जामुन, पत्तेदार साग और नट्स शामिल करें। इससे भी फर्टिलिटी अच्छी होती है।

*8 स्वस्थ वजन बनाए रखें (Healthy weight)*:

     मोटापा और कम वजन दोनों ही प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। संतुलित आहार का पालन करके और नियमित शारीरिक गतिविधि में संलग्न होकर स्वस्थ शरीर के वजन को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

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