अग्नि आलोक

शिक्षा के पवित्र मंदिर में नफ़रत के ज़हर का शिकार मासूम शालेय बच्चा

Share

                                     -सुसंस्कृति परिहार

उफ़ नफ़रत के ज़हर ने अभी तक बस्तियां जलाईं थी, कत्लेआम किए थे गुजरात,दिल्ली मणिपुर में नरसंहार की इबारतें तामीर की थीं लेकिन पिछले दिनों मुजफ्फरनगर जिले के एक गांव के पब्लिक स्कूल में एक मासूम मुस्लिम बच्चे के साथ शिक्षा के पवित्र मंदिर में एक शिक्षिका ने जिस तरह का काम किया दीगर कौम के बच्चों से पिटवाया वह हृदयविदारक है।

पहाड़ा याद ना होने पर बच्चे को मुस्लिम होने की जो सजा दी गई वह नफ़रत बढ़ाने वाली है शिक्षिका ने बच्चों से उस मासूम को पिटवाया बच्चे धीरे से प्रहार कर रहे थे उन्होंने ज़ोर से उन्हें मारने बाध्य किया बच्चे उसे एक घंटे के लगभग मारते रहे ये पिट रहे बच्चे का कहना है।शुक्र है इस घटना का वीडियो सामने आ गया वरना कौन समझ पाता उस मासूम के साथ क्या हुआ? लगता तो यह है कि शायद इस तरह का ज़हर शिक्षकों की  ट्रेनिंग का हिस्सा रहा हो तथा अन्य विद्यालयों में भी यह सब चल रहा हो चूंकि स्कूली बच्चों को मारने पीटने पर प्रतिबंध है हो सकता है इसीलिए बच्चों  से पिटवाने का कोई नया प्रारूप बनाया गया है क्योंकि शिक्षिका जिस तरह का व्यवहार बच्चे के साथ कर रही है और दीगर बच्चों को पीटने कह रही है वह शातिराना साज़िश ही लग रही है।

जब देश में नफ़रत की आंधी से निपटने मोहब्बत की दूकान का ज़ोर पकड़ रहा है तब ये सब आश्चर्यजनक नहीं। नफरतियों का मज़बूत गढ़ इस समय तमाम भाजपा शासित प्रदेश बने हुए हैं। बच्चों के बीच इस तरह का व्यवहार विचलित करने वाला है। बच्चों को मुस्लिम बच्चे से भरपूर नफ़रत सिखाई जा रही है। यह संविधान सम्मत नहीं है।बाल कल्याण समिति और बाल कल्याण आयोग को अविलंब ऐसे स्कूल के प्रबंधन और शिक्षिका पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।ज्ञात हुआ है कि जब बच्चे के पिता से एफआईआर करने कहा गया तो उन्होंने इंकार ये कहकर कर दिया कि कौन उनकी सुनेगा।वायरल  वीडियो के हंगामें की बदौलत स्थानीय प्रशासन ने बच्चे के पिता से रिपोर्ट दर्ज़ कराई है। उत्तर प्रदेश में जिस तरह मुस्लिमों का विरोध सरकार की टुकड़े टुकड़े गैंग करती है इस स्थिति में वीडियो बनाने वाले,वायरल करने वाले और  मुस्लिम बच्चे के परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

अफ़सोसनाक यह है कि मीडिया की अंधभक्ति की वजह से आज का सच वायरल वीडियो के ज़रिए ही बाहर आ रहा है। सोचिए यदि मणिपुर का नग्न महिलाओं वाला वीडियो सामने नहीं आया होता तो क्या सुप्रीम कोर्ट पहल कर पाता।वहां वीडियो बनाने वाले को ही पकड़ा गया।ऐसी भाजपाई सरकार का कोई भरोसा नहीं है। इसीलिए इन सबकी सुरक्षा के साथ बच्चे के अध्ययन की भी पुख्ता व्यवस्था ज़रूरी है ।

हालांकि सैकड़ों दलित,पिछड़े ,अल्पसंख्यक समुदाय के विश्वविद्यालयीन छात्रों के साथ पहले से नफ़रती भाव इस दशक में सामने आए हैं कई छात्र छात्राएं इस जातिगत और धर्मगत भेदभाव के कारण आत्महत्या भी कर चुके हैं हैदराबाद के रोहित वेमुला को भला कौन भूल सकता है किंतु छोटे छोटे नाबालिग बच्चों के दिल दिमाग में नफ़रत और घृणा भरना पिटवाना पहली बार प्रकाश में आया है।बालमन को इस तरह गलत दीक्षा दिया जाना संगीन जुर्म है।इसका डटकर प्रतिरोध भी आवश्यक है साथ ही साथ हम सबकी यह भी जिम्मेदारी बनती है कि बच्चों के मन में इस घातक रोगाणु को पनपने से पहले ही उसका सर्वनाश करने हम सब तत्पर हो जाएं।

Exit mobile version