
*राजकुमार जैन*
संसद में बने नए वक्फ बोर्ड के कानून के मौजू पर दिल्ली सरकार में अव्वल दर्जे के आई ए एस अफसर, तथा उर्दू साहित्य के नामवर क्रिटिक, व दिल्ली वक्फ़ बोर्ड के सीईओ, सचिव पद पर रहे मेरे पुराने दोस्त अज़ीम अख्तर साहब की आज “इतिहाद इंडिया” नामक चैनल के साथ वार्ता सुनने को मिली। इस साक्षात्कार की अहमियत इसलिए ज्यादा है, क्योंकि आज की बातचीत किसी सियासतदान अथवा मस्जिद के मौलवी से न होकर कानून, खासतौर से इस्लामी कानूनों तथा हिंदुस्तानी आईन के कानूनो के जानकार आलिम अफसर से सुनने को मिली। उन्होंने बहुत ही साफगोई, बेबाकी, तथा बिना किसी की तरफदारी के वक्फ़ बोर्ड के हर पहलू पर रोशनी प्रदान की। उनका कहना था कि मैंने पहले ही कह दिया था कि यह कानून पास होकर ही रहेगा क्योंकि एक मरकजी मिनिस्टर ने तालठोकर पहले ही मुनादी कर दी थी। अज़ीम अख्तर साहब ने वक्फ बोर्ड के बारे पहले के बने कायदे कानूनों का हवाला देते हुए नए कानून में जो तरमीम की गई है, उसकी कई नजीरें पेश की। मसलन वक्फ बोर्ड में वही मुसलमान वक्फ कर सकता है जिसने 5 साल पक्का मुसलमान होने की सनद पेश की हो,यह कैसा कानून है? उनकी शिकायत है कि वक्फ के बारे में कैसी-कैसी गलत जानकारियां दी जा रही है। उन्होंने बताया कि वक्फ़ की रिवायत के मुताबिक किसी भी जमीन जायदाद को वक्फ़ में शामिल करने से पहले उसकी कानूनी जांच पड़ताल लाजमी होती है, उस के बाद उसको वक्फ़ में शामिल किया जाता है। उन्होंने मरकज के एक वजीर के इस ब्यान पर अफसोस जाहिर किया जिसने पार्लियामेंट में कहा था कि कल को कोई पार्लियामेंट की बिल्डिंग को भी वक्फ की संपत्ति घोषित कर सकता है। इंटरव्यू लेने वाले के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार का यह कहना कि हमने खातूनों तथा पसमांदा मुसलमानों की भलाई के लिए यह कानून लाया गया है। परंतु जमीन जायदाद को वक्फ़ को देने वाला अपनी ख्वाहिश जाहिर करता है कि मेरी दान दी गई संपत्ति में से किस प्रकार गरीब गुरबो, मस्जिद मदरसो की मदद की जाए। अज़ीम साहब की मान्यता है कि जब तक इस्लामी कानूनों उसकी रिवायत से कोई वाकिफ नहीं है तो वह कैसे वक्फ की परिभाषा कर सकता है। नए कानून के मुताबिक सारे अख्तियार डीएम को दिए गए हैं वह कैसे इंसाफ कर पाएगा?
इस वार्ता की सबसे सनसनी तब रही जब उन्होंने खुद दिल्ली वक्फ बोर्ड के सीओ सेक्रेटरी सरकारी पद पर रहते हुए वहां के भ्रष्टाचार को देखते हुए इस्तीफा दे दिया था। उनका कहना था कि इस बात में कोई शक नहीं की वक्फ बोर्ड में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार है। अज़ीम अख्तर साहब ने नए बने कानून के अच्छे प्रावधानों का समर्थन भी किया। खातूनो को बोर्ड में शामिल करने को अच्छा कदम बताया।
उन्होंने नए वक्फ कानून के खिलाफ संसद से सड़क तक कुछ मजहबी नेताओं, तथा जमातों की धमकी पर रोष प्रकट करते हुए कहां कि आपको किसने रोका है, आप इसमें खुद शामिल हो, अपने बच्चों को शामिल करें। परंतु होता यह है कि गरीब मुसलमान इनकी बातों में आकर सड़क पर आ जाता है ,जिन पर पुलिस और सरकार का कहर टूट पड़ता है, सजाए उनको होती है। उन्होंने मुज़फ़्फ़र नगर की नजीर देते हुए कहा की काली पट्टी बांधकर विरोध करने पर दो-दो लाख का जुर्माना किया गया, उसकी रकम किसने चुकाई? भूतपूर्व सरकारी अफसर ने अफसोस प्रकट करते हुए कहा कि आज हिंदुस्तान में मुसलमानों के साथ बेइंसाफी हो रही है, इसके लिए हम खुद भी जिम्मेदार हैं। हमारे आपसी मतभेद भी है, शिया-सुन्नी, नेताओं की खुदगर्जी, गरीब मुसलमानों में तालीम की कमी इसकी बड़ी वजह है।
यह वार्ता इसलिए महत्व रखती है, क्योंकि इसको कानून के जानकार तथा वक्फ के रोजमर्रा के क्रियाकलापों, उसके अंदर व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने के साथ-साथ अपनी कौम की कमजोरी को भी बेबाकी से पेश किया गया है।