
चंद्रशेखर शर्मा
कोई कितना ही नाक-भौं सिकोड़े, कसमसाए या कुनमुनाए, लेकिन आईपीएल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया का एक मेगा इवेंट है ! आईपीएल यानी इंडियन प्रीमियर लीग। यानी क्रिकेट। कुछ लोग कहते हैं तमाशा क्रिकेट ! वो जब ऐसा कहते हैं तो उनके मुंह से हिकारत यानी घृणा और तिरस्कार भी झरता है। तमाशा क्रिकेट !
यों हिकारत अपनी जगह, लेकिन तमाशा थोड़ी ऊंची चीज भी मानी गयी है ! ज्ञानीजन की नजरों में तो यह दुनिया ही ऊपरवाले का रचा एक तमाशा है ! उधर, जिंदगी को भी तमाशा कहा गया है। शायर जफर इकबाल का शेर है कि, “यूं भी होता है कि यक दम कोई अच्छा लग जाये, बात कुछ भी न हो और दिल में तमाशा लग जाये !” मिर्जा गालिब फरमा गए हैं कि, “बाजीचा-ए-अतफाल है दुनिया मिरे आगे, होता है शब-ओ-रोज तमाशा मिरे आगे ! बाजीचा-ए-अतफाल यानी बच्चों का खिलौना। दरअसल तमाशे पर बेशुमार अशआर कहे गए हैं। जो हो।
अपन थोड़ी सी इस आईपीएल तमाशे की बात करें। इस बार थोड़ी सी अलग बात यह है कि यह फिर से अपने देश में हो रहा है और दूसरी बात यह कि इस बार दो नयी टीमों ने भी मैदान पकड़ा है। जी हां, एक लखनऊ की है और दूसरी गुजरात की। अभी टुकड़ों में कुछ मैच अपन ने देखे हैं। गुजरात की बात करें तो इसके कप्तान हैं हार्दिक पंड्या। देखा कि शुरू के दोनों मैच उनकी टीम ने जीत लिए हैं। पहले उन्होंने नयी टीम लखनऊ को हराया और कल तगड़ी दिल्ली को पटक मारा। दिल्ली पिछली मर्तबा की उप विजेता टीम है और उसके कप्तान ऋषभ पंत को भारतीय टीम का भावी कप्तान माना जा रहा है ! कल हार के बाद पंत का मुंह साफ उतरा हुआ नजर आया।
काबिलेगौर बात यह है कि पिछले कुछ समय में गुजरात ने क्रिकेट में खासा दखल बढ़ाया है। याद दिला दूं कि कुछ अरसा पहले ही अहमदाबाद में देश का नहीं वरन दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम तैयार हुआ है। एक लाख तीस हजार से भी ज्यादा दर्शक वहां मैच का लुत्फ ले सकते हैं ! जाहिर है दुनिया के इस सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम को बनने में समय लगा। इत्तेफाक देखिए कि इसी गुजरात में दुनिया की सबसे बड़ी, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा यानी स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी भी खड़ी की गई है और मजेदार बात यह कि इन दोनों कामों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खूब निशाने पर लिए गये ! कहने की जरूरत नहीं कि दोनों कामों में बहुत बड़ी धनराशि खर्च की गई है, लेकिन यह भी सच है कि यह दोनों काम गुजरात के लिए दीर्घकाल तक दुहने वाली दुधारू गाय हो गये हैं। इस नजरिए से देखें तो राज्य के लिए और देश के लिए भी खूब सोचकर विजन के साथ किया गया कारोबारी निवेश। चालू भाषा में कहें तो बनिया बुध्दि अथवा अकल से बकरी चार बच्चे देती है, वाला उपक्रम। आगे यह कि फिर देश के गुजराती गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सचिव हो गए और अब दुनिया की इस सबसे बड़ी लीग में गुजरात की टीम गुजरात टाइटन्स का प्रवेश। गोया इस पसे मंजर में देखें तो भारतीय क्रिकेट में अब गुजरात भी एक ‘फोर्स’ बनकर उभरा है और उभर रहा है। गुजरात को उसका कितना लाभ और गर्व होगा, यह कोई रॉकेट साइंस की बात न। अभी दो गुजराती देश के दो सबसे ताकतवर पदों पर हैं। एक प्रधानमंत्री और दूसरे गृह मंत्री। क्या भारतीय क्रिकेट में गुजरात के इस बड़े और बढ़ते दखल में इन दोनों का भी कुछ हाथ है ? इसका जवाब खुद से पूछो तो हां ही निकलती मालूम होती है। नेता को ऐसा ही होना भी चाहिए कि वह अपने लोगों और इलाके की मजबूती और तरक्की तय करता चले ! बिना इस बात की चिंता किये कि लोग क्या कहेंगे ! खैर।
मिर्जा गालिब के शेर से बात खत्म करते हैं। अर्ज किया है कि, “थी खबर गर्म कि ‘गालिब’ के उड़ेंगे पुर्जे, देखने हम भी गए थे पर तमाशा न हुआ !
‘-चंद्रशेखर शर्मा