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ज्योतिष : भाग्य पूर्वनिर्धारित है या पुरुषार्थजनित 

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        – ज्योतिषाचार्य पवन कुमार 

क्या ज्योतिष की बातें सच होती है। क्या हमारा भाग्य पूर्व निर्धारित होता है या हम अपने कर्मों से ही सब कुछ प्राप्त करते हैं।क्या ज्योतिष एक ढोंग है लोगों को मूर्ख बनाने की कला है। 

यह प्रश्न ना चाहते हुए भी बार बार सब के मन में आता है।

      लगभग पाँच सौ ऐसे लोगों का बर्थ डेटा स्टडी किया गया, जो अनुराधा नक्षत्र में उत्पन हुए थे. पाया गया कि इस नक्षत्र में उत्पन लोगों का स्वभाव मिलता जुलता होता है।

     यही निष्कर्ष पाँच सौ के लगभग चित्रा नक्षत्र में उत्पन्न और पाँच सौ के लगभग शतभिषा नक्षत्र के लोगों से मिला।

 पाया गया कि हर जन्म नक्षत्र-समूह में उत्पन लोगो का अपने- अपने नक्षत्र के हिसाब से प्राप्त स्वभाव मिलता-जुलता होता है।

  जैसे आप देखोगे की ऐपस में मकैक बंदरों या  किसी दूसरे प्रकार के बंदरों का स्वभाव अपनी अपनी प्रजाति के ग्रुप में एक दूसरे से मिलता जुलता होता है, लेकिन हैं तो सभी बंदर।

   इस प्रकार हम ज्योतिष के सिर्फ़ इस एक फैक्टर से अर्थात् नक्षत्र से किसी व्यक्ति का स्वभाव मालूम कर सकते हैं।

  अब यही स्वभाव हमारे कर्म करने के तरीक़े को निर्धारित कर देता है। जैसे अनुराधा नक्षत्र मिलनसार, रौनक़ मेला लगाने वाला, खाने पीने का शौक़ीन होता है और भागदौड़ करने की प्रवृति होती है. ज़ाहिर है उसके काम करने के इस तरीक़े से वह अच्छा व्यापारी, मैनेजर, नेता बनने का गुण रखता है।

    शतभिषा नक्षत्र कम बोलने वाला हर काम धैर्यपूर्वक करने वाला होता है तो ज़ाहिर है वह नेता तो नहीं बन सकता लेकिन डॉक्टर, इंजीनियर या रिसर्चर जरूर बन सकता है। 

    इसका अर्थ यह हुआ कि सिर्फ़ जन्म नक्षत्र से एक सम्भावना बन गई कि व्यक्ति के कर्मों की दशा और दिशा क्या हो सकती है।

       यह तो सिर्फ़ एक बिंदु मात्र है। अब मान लो दो व्यक्ति अनुराधा नक्षत्र के हैं , उनमें एक मंगल त्रिशांश का है और दूसरा वृहस्पति तृषांश का, तो मंगल वाला उग्र और वृहस्पति वाला शांत। 

    इस फैक्टर से मंगल वाला नेता बन सकता है लेकिन वृहस्पति वाला अच्छा व्यापारी। 

    इस प्रकार फिर ग्रह कैसे पड़े हैं कौन कितना सफल होगा यह भी पता चल जाता है। इसका अर्थ यह हुआ कि ज्योतिष या जन्म कुंडली के आधार पर यह तय हो जाता है :

   ~ व्यक्ति किस प्रकार से कर्म करता है.

   ~उसके जीवन में क्या संभावनायें हैं.

  ~उसका जीवन और कार्यक्षेत्र क्या हो सकता है। 

~अन्य संभावनायें क्या- क्या हो सकती हैं। 

       इन्ही पहलुओं के अध्ययन को ज्योतिष कहते हैं। ‘भाग्य बड़ा या कर्म?’ यह रिसर्च का विषय होना चाहिए न कि बहस का या एक- दूसरे को नीचा दिखाने का। 

     इतना तो तय है आपके कर्मों की दिशा आपकी जन्म कुंडली तय करती है. इसमें नमक-मिर्च कितना होगा यह आप किस माहौल में पले- बढ़े हैं इससे यह तय होता है।

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