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पीएम मोदी पर हमला, क्या सच में सयाने हैं राहुल गांधी?

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अवधेश कुमार

अमेरिका यात्रा के दौरान राहुल गांधी के बयानों पर भारत में हंगामा मचना ही था। बीजेपी को तो उनके बयान पसंद नहीं ही आए, देश में भी कइयों को लगता है कि विदेश में ऐसी बातें नहीं कहनी चाहिए। दूसरी ओर, कई लोग राहुल की बातों का समर्थन भी कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि राहुल विपक्ष के नेता हैं। इसलिए वह सरकार की आलोचना करेंगे ही। फिर राहुल गांधी के इन बयानों को कैसे देखा जाए?

इस मामले में किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले राहुल गांधी के चर्चित बयानों की कुछ खास बातों पर गौर करना चाहिए।

हालांकि राहुल गांधी ने कहा कि हम यहां किसी से मदद मांगने नहीं आए हैं। यह हमारी लड़ाई है और हम लड़ रहे हैं। इसी तरह रूस-यूक्रेन युद्ध के मामले में उन्होंने कहा कि इस पर हमारी नीति वही है, जो मोदी सरकार की है। मगर दूसरी ओर उन्होंने भारत की ऐसी डरावनी तस्वीर पेश की, मानो यहां लोकतंत्र और संवैधानिक शासन खत्म हो गया है। फासिस्ट सोच रखने वाली सरकार काम कर रही है और मीडिया, जूडिशरी सब उसके कंट्रोल में है। मैं यहां इसके चार उदाहरण दे रहा हूं।

क्या मीडिया की स्वतंत्रता केंद्र सरकार और राज्यों की बीजेपी सरकारों ने खत्म कर दी है? क्या कर्नाटक इलेक्शन से पहले ज्यादातर मीडिया सर्वेक्षणों ने कांग्रेस को बीजेपी से आगे नहीं बताया था? क्या राहुल की संसद सदस्यता अडाणी के साथ सरकार की सांठगांठ का आरोप लगाने के कारण गई? इन सभी सवालों का जवाब ना में है। लेकिन राहुल की बातों से लग रहा है कि मानो कोर्ट ने सरकार से डरकर उनके खिलाफ फैसला दिया। क्या उनकी कही गई बात से विदेश में भारत की छवि खराब नहीं हो रही?

ओवरसीज कांग्रेस उनकी सार्वजनिक यात्राएं आयोजित कर रही है ताकि दुनिया में नरेंद्र मोदी के मुकाबले राहुल को सबसे मजबूत विपक्षी नेता साबित किया जा सके। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पॉप्युलैरिटी विश्व के किसी भी नेता की तुलना में ज्यादा है। कांग्रेस प्रधानमंत्री की ओर से कही गई दो-तीन बातों को अपना मतलब निकालने के लिए गलत ढंग से पेश करती है।

मोदी क्यों हैं पॉप्युलर

वह गहराई से छानबीन करे तो पता चलेगा कि मोदी ने न केवल अपनी सरकार के दौरान भारत में आए बदलावों की पॉजिटिव तस्वीरें विदेशी मंच पर पेश कीं, बल्कि दुनिया की समस्याओं को लेकर भी अपनी सोच रखी। इसलिए उन्हें विजनरी लीडर माना जा रहा है। जहां तक हिमाचल और कर्नाटक में बीजेपी की हार का सवाल है तो पार्टी गुटबाजी की वजह से हारी है। नरेंद्र मोदी के प्रति आज भी बीजेपी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के अंदर सम्मान और श्रद्धा का भाव है। राहुल गांधी, उनके रणनीतिकारों और ओवरसीज कांग्रेस के संचालकों का नरेंद्र मोदी, बीजेपी और संघ परिवार के प्रति सनातन वैर-भाव समझ में आता है लेकिन विदेश में देश की खराब छवि पेश कर और नेता को खलनायक बनाने से उन्हें इज्जत नहीं मिलेगी। उलटा इससे राहुल को कमजोर नेता ही माना जाएगा।

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