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‘आप’ पार्टी के नेताओं को बरी करने पीछे कहीं कोई बड़ी साज़िश तो नहीं

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-सुसंस्कृति परिहार 

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को राउज एवेन्यू कोर्ट दिल्ली ने कथित शराब घोटाला मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हीं नहीं है और प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता। इसी के साथ केजरीवाल को केस में दिल्ली कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई है।इस खबर को सुनकर प्रथमदृष्टया ऐसा महसूस हो रहा है कि माननीय न्यायालय ने  सीबीआई को इस षड्यंत्र का आरोपी माना है।जैसा कि सर्वविदित है कि सीबीआई किस तरह वर्तमान सरकार के इशारे पर नाचती है। इसीलिए उधर सीबीआई ने हाईकोर्ट जाने की पहल शुरू कर दी है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि यह मामला थमेगा नहीं।

किंतु, हमें इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि आप पार्टी पर संघ का वरदहस्त है उसने भाजपा के झूठ और लूट के बरअक्स एक कथित ईमानदार केजरीवाल को सामने लाया था।ये बात और है कि उसके बढ़ते कदम से चिंतित भाजपा ने ही षड्यंत्र पूर्वक महत्वपूर्ण नेताओं को बारी बारी से जेल भेजना शुरू किया। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि आबकारी नीति में बिना उपराज्यपाल की सहमति के परिवर्तन के जरिए एक बड़ी रकम आम आदमी पार्टी के पास पहुंची तो ज़रुर थी जिससे उसका विस्तार गुजरात,गोवा और पंजाब में हुआ और वह राष्ट्रीय पार्टी के रुप में उभर के आई।

इस घटनाचक्र को देखते हुए यह शकोसुबह तो होती ही है कि यह सब कांग्रेस को परास्त करने की संघ की चाल थी जिससे भाजपा इन राज्यों में सरकार बना पाई।

आगत पंजाब और गुजरात चुनाव में कांग्रेस की मज़बूत स्थिति के मद्देनजर कयास लगाए जा रहे हैं कि इस फैसले के पीछे भाजपा का ही हाथ है।ताकि एक बार फिर कांग्रेस की बढ़त और मज़बूती को तोड़ा जा सके। केजरीवाल और सिसोदिया के पाक साफ होने की ख़बर फैलते ही आम आदमी के कार्यकर्ताओं में अभूतपूर्व जोश भर आया।उनका रुदन भी इस जोश को द्विगुणित करेगा ही।

यदि वास्तव में आबकारी नीति अच्छी थी तो उसे आतिशी सरकार ने वापस क्यों लिया।यह भी एक सवाल बनता है। दूसरे यदि पुख्ता सबूत नहीं थे तो इतने दिन जेल में क्यों रखा गया।इस बीच दिल्ली को कमज़ोर कर वहां भाजपा ने अपना परचम फहरा दिया और अब पूर्ववर्ती रणनीति का संघ-भाजपा सहारा लेना चाहता है और भाजपा भी तैयार है। जहां तक सवाल सीबीआई का हाईकोर्ट जाने का है तो वह मंद गति से चलता रहेगा और आमआदमी पार्टी नेताओं को दबाव में रखेगा ही।वे शरजील और उमर खालिद और सोनम वांगचुक नहीं है जिनका मज़बूत सैद्धांतिक आधार हो।आम आदमी पार्टी की यह परीक्षा का काल है यदि वह सचमुच भाजपा विरोधी है तो इंडिया गठबंधन को मज़बूत करने की घोषणा करें।वह ऐसा हर्गिज नहीं कर सकती क्योंकि केजरीवाल जन्मजात संघी है उनसे ऐसी अपेक्षा नहीं की जा सकती है।संघी अन्ना हजारे भी बिल से बाहर केजरीवाल को बधाई दे रहे हैं।इस बात को इस समय याद रखना होगा। 

कांग्रेस की उदारता देखिए जब  मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अचानक गिरफ्तार किया गया था तब सोनिया गांधी जी  केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल के साथ समूची कांग्रेस के साथ खड़ी थीं।शायद ही यह बात इनके ज़हन में आए।

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