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आईटी सेल बना झूठ और नफरत का स्रोत

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मुनेश त्यागी

आजकल आईटी सेल (इनफार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी सेल)की बहुत चर्चाएं हो रही हैं। अधिकांश पार्टियों और जनविरोधी ताकतों ने अपनी-अपनी आईटी सेल बना रखी हैं जिसमें बीजेपी, कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टियां सपा और बीएसपी शामिल हैं, आप की भी अपनी आईटी सेल है। मगर सबसे ज्यादा आईटी सेल बीजेपी की हैं आईटी सेल कार्यकर्ता महावीर सिंह के अनुसार बीजेपी की आईटी सेल में 300 से ज्यादा कार्य कर्ता हैं जिनका वेतन ₹30,000है जो मंथली ₹90 लाख बैठता है जो अशोका रोड नई दिल्ली से निर्देशित होती है।उन्होंने बताया कि बीजेपी की 20000 आईटी सेल्स हैं। 
 उनका कहना है कि इन आई टी सैल्स से फैलाए जा रहे दुष्प्रचार से देश को बेहद आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक नुकसान हो रहा है और यह देश और समाज की एकता और अखंडता के लिए बेहद खतरा बन गई हैं। उनका कहना है कि इसमें झूठ और नफरत को बार-बार दोहराया जाता है जिसे दर्शक सच मान बैठते हैं और इसका प्रयोग नफरत और झूठ फैला कर सत्ता हासिल की जाती ह और इसका प्रयोग धर्म विशेष और विभिन्न जातियों के खिलाफ किया जाता है। यह सब देश और समाज के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है।
 दुष्प्रचार के बारे में जानना चाहे तो सबसे बड़ा दुष्प्रचारक हिटलर का प्रचार मंत्री गोयबल्स था जो झूठ के प्रयोगों को बार-बार दोहरा कर यहूदियों के खिलाफ माहौल तैयार करता था। उसका कहना था कि यदि एक झूठ को सौ बार बोलोगे जो लोग उसको सच मानने लगेंगे। आज की सांप्रदायिक ताकतों द्वारा बनाई गई हजारों सेल्स यही काम कर रही हैं। आज अगर हम देखें तो यह आईटी सेल्स समाज का "साइलेंट किलर" बन गया है। इन्होंने बहुत से लोगों की बौद्धिकता को हर लिया है उसमें सांप्रदायिकता अंधविश्वास और पूंजीवाद का जहर भर दिया है उनके विकास उनके बौद्धिक विकास को रोक दिया है और अब वे बौद्धिक विनाश के कगार पर खड़े हैं। इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल मुसलमानों के खिलाफ किया जाता है। उन्हें विदेशी, समाज विरोधी, देशद्रोही और खलनायक बना कर पेश किया जाता है और इस बात को बार-बार दोहराया जाता है जिसे दर्शकों ने सही मान लिया है।
 यह केवल मुसलमानों को ही नहीं बल्कि कम्युनिस्टों और ईसाईयों और समय पड़ने पर सिखों के खिलाफ भी प्रयोग किया जाता है। गांधी और नेहरू के खिलाफ भी इसका जमकर प्रयोग किया जाता है। आईटी सेल के दुष्प्रचार का परिणाम हमने मुजफ्फरनगर और दिल्ली के दंगों में देखा था, जहां बहारी घटनाओं और दृष्यों को वीभक्त तरीके से दर्शकों के सामने परोसा गया, जिसे लोग सच मान बैठे और मुजफ्फरनगर और दिल्ली की गंगा जमुनी तहजीब, मिलीजुली संस्कृति, आपकी हमदर्दी, सहयोग, भाईचारा संविधान और कानून के शासन को देखते ही देखते खाक में मिल गया।
 आजकल आईटी सेल द्वारा मोबाइलों का सहारा लेकर दुष्प्रचार शहर शहर, गांव गांव, गली मोहल्लों में पहुंच गया है। लोगों को, बच्चों को, लड़के लड़कियों को और औरतों को झूठ बोल कर गुमराह किया गया है उनके अंदर झूठ और नफरत को ठूंसा जा रहा है, हकीकत और ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ करके तोड़ा मरोड़ा गया है और धर्म विशेष और जाति विशेष के खिलाफ या विपक्षियों के खिलाफ जहर उगला गया है। इसमें अपने विरोधी पक्ष को खलनायक, देशद्रोही नालायक और गद्दार बताया जाता है जिसे लोगों ने बिल्कुल सच मान लिया है।
 कम्युनिस्टों को इसमें खासकर दोषी बताया और निशाना बनाया गया है क्योंकि कम्युनिस्ट लोग और पार्टियां समता, समानता, धर्मनिरपेक्षता, जनतंत्र, समाजवाद, गणतंत्र, और आर्थिक सामाजिक राजनीतिक आजादी की बात करते हैं, सबको शिक्षा सबको काम, जनता की एकता और अखंडता और देश में धर्म और जातियों के आपसी प्रेम, सम्मान, सहयोग और भाईचारे की बात करते हैं। हजारों पुरानी गरीबी, लाचारी, अन्याय ,शोषण, वंचना और भेदभाव का विरोध करते हैं और सामंती पूंजीवादी गठजोड़ और व्यवस्था का खात्मा करके समाजवादी विचारों के समाज और व्यवस्था की स्थापना की बात करते हैं। अतः उन्हें विशेष निशाना बनाया जाता है और खुलेआम बदनाम किया जाता है।
 यहीं पर विशेष बात यह है कि अधिकांश आईटी सेल्स इस लुटेरी, शोषक और अन्यायी व्यवस्था की पैरोकारी करते हैं। ये सब इस व्यवस्था के दलाल बन गई हैं और इस अन्याय शोषक और गैर बराबरी की स्थापना को सदा सदा के लिए कायम रखना चाहती हैं। कुल मिलाकर यह अधिकांश जन विरोधी और संविधान विरोधी बन गई हैं। समता, समानता, न्याय, एकता अखंडता भाईचारे  और वैज्ञानिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार में और अंधविश्वास, अज्ञानता, झूठ फरेब, धर्मांधता और पाखंडों के खात्मे में इनका कोई विश्वास नहीं है।
यह सब देख और सुनकर, अब यह जरूरी हो गया है कि सारी की सारी कम्युनिस्ट, वामपंथी, समाजवादी, समतावादी पार्टियां और संगठन, मीडिया कर्मी, लेखक, कवि और बुद्धिजीवी, जज, वकील और वैज्ञानिक एकजुट होकर इस नफरतभरी मुहिम का मुकाबला करें। उनका कर्तव्य है कि समस्त ऐतिहासिक तथ्यों और सच्चाई को, गुमराह हो गई जनता, किसानों, मजदूरों, नौजवानों, विद्यार्थियों और महिलाओं के सामने लाया जाए, उनसे उन्हें अवगत कराया जाए और एक बार फिर उन्हें संविधान में लिखित मूल्यों और सिद्धांतों के इर्द-गिर्द इकट्ठा किया जाए।
अब इन सब तबकों, ताकतों, संगठनों और पार्टियों की महती जिम्मेदारी बन गई है कि तमाम मेहनतकश जनता, मजदूर, किसान, नौजवान और बुद्धिजीवी मिलकर देश और दुनिया के महान लोगों जैसे अशोक, रविदास, कबीर, टीपू सुल्तान, बहादुर शाह जफर, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हजरत महल, बिस्मिल, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, गांधी, नेहरू प्रेमचंद और वैज्ञानिकों, बुद्धिजीवियों और संस्कृति कर्मियों की जीवनी और उनके महान विचारों और कारनामों से अवगत कराएं, जन समर्थक आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक मूल्यों और व्यवस्था की तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों की और ज्ञान वैज्ञान की जानकारियों की उन्हें सूचना दें।
 इसी के साथ साथ दुनिया के महान लोगों जैसे कॉपरनिकस, ब्रूनो, डार्विन, मार्क्स, लेनिन, शेक्सपियर, गोर्की, स्टालिन, अब्राहिम लिंकन, माओ, फिदेल कास्त्रो,चे ग्वेरा,  प्रेसिडेंट शावेज आदि के विचारों से भी भारत के लोगों को अवगत कराएं। अब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम लोग आईटी सेल और मोबाइल का सकारात्मक प्रयोग करके जनता को जनता के जनवाद, समता, समानता, धर्मनिरपेक्षता, क्रांति, समाजवाद और आपसी भाईचारा के उसूलों से अवगत करा कर एक ऐसे ही समाज की स्थापना के अभियान में लगाएं और आईटी सेल के नकारात्मक अभियान का करारा जवाब दें और इनकी हकीकत से जनता को अवगत कराएं।
इसमें अब कोई बहाना नहीं चलेगा। आईटी सेल और मोबाइल, वैज्ञानिक युग की अभी तक की सबसे महान उपलब्धि है। इनका प्रयोग नकारात्मक और सकारात्मक दोनों तरह से किया जा सकता है। जन विरोधी और साम्प्रदायिक ताकतें इनका प्रयोग, दुष्प्रचार के लिए और जनता की एकता और अखंडता को तोड़ने के लिए और इस लुटेरी शोषक और अन्यायी व्यवस्था को कायम रखने के लिए कर रही हैं। हम आईटी सेल्स और मोबाइल के द्वारा, लोगों को इस देश की जनता को समता, समानता, भाईचारे, जनता के जनवाद और समाजवाद और क्रांति के विचारों से अवगत कराएं और ऐसी ही व्यवस्था कायम करने के अभियान में लगाएं। अब यह हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
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