अमरीष कुमार
भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था विश्व में वेहतर माना जाता है। न्यायपालिका कार्यपालिका और विधायिका का कार्यक्षेत्र लोकतांत्रिक व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सभी को अपने अपने दायरा में रहकर शक्ति का निर्धारण किया गया है।सभी संवैधानिक अंग की व्यवस्था को लागू करने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई है।अबतक के देश की हालात से समझ सकते हैं कि अधिकारी किस प्रकार से कार्य कर रहे हैं।भारत में जितना शक्ति प्रशासनिक अधिकारियों को दिया गया है उतना विश्वभर में कहीं नहीं दिया गया है। भारत में सभी तरह के योजना और परियोजना को तैयार करने के लिए उन्हें ही जिम्मेदारी सौंपी जाती है। अधिकारियों को जनहित में वैसी भी कार्ययोजना को तैयार करने के लिए कहा जाता है जिसमें उनको कोई ज्ञान या अनुभव भी नहीं रहता है।इनका प्रोमोशन काम की समीक्षा करने के बदले समय बीतने के साथ-साथ खुद व खुद होता चला जाता है।अब लोग कहने लगे हैं कि प्रसाशनिक अधिकारी केवल रूटिन वर्क कर रहे हैं और उन्हें मिले शक्ति का सही मायने में समुचित सदुपयोग नहीं करने के कारण देश व समाज इस हालात में है और वेहतर ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते तो सरकारी व्यवस्था तंत्र पारदर्शी और सुदृढ़ हो गया होता। संवैधानिक तंत्र और सरकार के द्वारा बनाई गई नीतियां, कार्यक्रम और कानून सही मायने में क्रियान्वित कराना प्रसाशनिक अधिकारियों की है, इसमें वे कितना सफल होते हैं इसकी समीक्षा जरूरी है और इसी आधार पर प्रोमोशन या डिमोशन करना तय होना चाहिए।
अधिकारियों को संवैधानिक दायरे में कानून बनाने का प्रस्ताव सरकार व विधायिका के पास भेजना की है,इस पर भी वे खड़े नहीं उतर सके हैं। इससे यही स्पष्ट होता है कि वे सरकार का चेहेते बनकर बढ़िया विभाग हमेशा आवंटित होते रहे।ऐसा क्यों किया जाता है, सभी बुद्धिजीवी लोग समझ रहे हैं। मुठ्ठी भर काम करने बाले अच्छे प्रशानिक अधिकारी भी है उन्हें राजनीतिक कारणों से जनहित से जुड़े विभाग से अलग रखा जाता है। हजारों में मुठ्ठी भर अच्छे प्रशासनिक अधिकारियों से सरकारी तंत्र दुरूस्त नहीं हो सकता है।
अतः अब प्रशासनिक अधिकारियों की अधिकार काम करने की प्रतिबद्धता लगन और उनके कार्यो की समीक्षा के तहत होना चाहिए,तभी देश और समाज का समावेशी विकास हो सकता है।
जनता सरकार को बदल देती है लेकिन सरकारी व्यवस्था तंत्र का बदलाव नहीं होने से जनसमस्या यथावत रहती है।
अमरीष कुमार सामाजिक कार्यकर्ता खगड़िया, बिहार

